'वक्फ बोर्ड नहीं, ज़मीन माफियाओं का बोर्ड है', संभल मुद्दे पर भी जमकर बोले CM योगी आदित्यनाथ
Shahi Jama Masjid controversy:उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज तक के धर्म संसद में शाही जामा मस्जिद विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। आजतक पर एक संवाद कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह दावा किया कि धार्मिक आयोजन की साइट को वक्फ संपत्ति बताने के आरोप निराधार हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, "धरोहर को पुनः प्राप्त करना कोई बुरी बात नहीं है, सनातन का प्रमाण अब संभल में दिखाई दे रहा है। भारत को मुस्लिम लीग मानसिकता से नहीं चलाया जा सकता।"
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बयान में कहा कि वक्फ के नाम पर ली गई एक-एक इंच ज़मीन को वापस लिया जाएगा। उन्होंने कहा, "हम इस ज़मीन का उपयोग गरीबों के लिए आवास, शैक्षिक संस्थान और अस्पताल बनाने के लिए करेंगे।" मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार इस मामले में सख्त कदम उठाएगी और भू-माफियाओं द्वारा कब्जा की गई ज़मीन को हर हाल में लौटाया जाएगा।

वे अपनी गलतियों को स्वीकार करें,बाधा खड़ी न करें
उन्होंने कहा, "2013 के कुम्भ में मॉरीशस के प्रधानमंत्री ने गंगा में डुबकी लगाने से परहेज किया ,क्योंकि नदी की स्थिति बहुत गंदी थी।" योगी ने कहा कि यह दर्शाता है कि सपा सरकार के समय गंगा की सफाई की कोई प्राथमिकता नहीं थी।
शाही जामा मस्जिद पर दिया यह बयान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संभल की शाही जामा मस्जिद को लेकर कहा कि हरिहर मंदिर तोड़कर मस्जिदनुमा ढांचा खड़ा किया गया है, इसका जिक्र अबुल फजल द्वारा लिखी गई पुस्तक आइन-ए-अकबरी में है। सीएम योगी ने कहा कि वे अपनी गलतियों को स्वीकार करें और जो सनातन धर्म से जुड़े हुए प्रतीक हैं, उनमें अनावश्यक बाधा खड़ी न करें।
सीएम आदित्यनाथ ने कहा, "संभल में श्रीहरि विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में होगा। ये आज से 5000 वर्ष पहले हमारे पुराणों में उल्लेख है। कब-कब कौन अवतार कहां-कहां होंगे, इन सभी के बारे में विस्तार से उल्लेख आता है। इसमें संभल का भी उल्लेख आता है। संभल में इस समय आपको जो कुछ भी देखने को मिल रहा है, वो सब धर्म से जुड़े हुए प्रमाण प्राप्त हो रहे हैं।
वहां पर साजिश के तहत और दूर नहीं भारत में जितने भी पुराण बने हैं, उनकी रचना 3500 से लेकर 5000 वर्ष पहले हुई थी। तब इस धरती पर इस्लाम नहीं था, सनातन धर्म ही था। उस समय भी उल्लेख है, उस समय तो जामा मस्जिद थी ही नहीं। जब इस्लाम ही नहीं था तो जामा मस्जिद कहां से आ गई।"
विवादित ढांचे को मस्जिद नहीं कहना चाहिए: सीएम योगी
जब उनसे पूछा गया कि अयोध्या, मथुरा और काशी के बाद अब संभल और अजमेर का नाम भी सामने आ गया है तो इस पर उन्होंने कहा, "हमने पहले भी इस बात को कहा, किसी भी विवादित ढांचे को हमें मस्जिद नहीं कहना चाहिए। मुझे लगता है कि जिस दिन हम बोलना बंद कर देंगे, वहां लोग जाना बंद कर देंगे। वैसे भी ये इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ है कि किसी भी ऐसी जगह पर जहां किसी की आस्था को ठेस पहुंचाकर मस्जिदनुमा ढांचा खड़ा कर दिया गया, वहां कोई भी इबादत, वह खुदा को मंजूर नहीं होती है। जब मंजूर नहीं होती है तो क्यों आप वहां कर रहे हैं।
इस्लाम में उपासना काल के लिए कोई एक ढांचा खड़ा हो, ये जरूरी नहीं है। ये सनातन में है, उपासना के लिए वो मंदिर जाएगा। इस्लाम के लिए नहीं है। फिर इस बात के लिए आप जिद नहीं कर सकते हैं। समय है, हम एक नए भारत के बारे में सोचें। जो भारत अपनी विरासत पर गौरव की अनुभूति करे।"
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को संभल की शाही जामा मस्जिद के विवाद में यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। संभल शाही जामा मस्जिद प्रबंधक कमेटी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। याचिका में मस्जिद कमेटी प्रबंधन ने मांग की थी कि जिलाधिकारी को निर्देश दिया जाए कि यथास्थिति बरकरार रखी जाए। जिस निजी कुएं की खुदाई की जा रही है, वह मस्जिद की सीढ़ियों के पास है।
सुप्रीम कोर्ट कुएं की पूजा पर रोक लगायी, ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गयी
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की सदस्यता वाली पीठ ने प्रशासन को यह भी निर्देश दिया है कि वे नगर पालिका के नोटिस पर कार्रवाई न करें, जिसमें सार्वजनिक कुएं को हरि मंदिर बताया गया है और उसकी पूजा की इजाजत दी गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने पूजा पर रोक लगा दी है।
कुएं के सार्वजनिक इस्तेमाल की छूट है। संभल शाही जामा मस्जिद प्रबंधन कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। ट्रायल कोर्ट ने 19 नवंबर 2024 को मस्जिद के सर्वे का निर्देश दिया था। मस्जिद कमेटी की तरफ से वरिष्ठ वकील हुफैजा अहमदी सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। वहीं वादी पक्ष की तरफ से वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर जैन पेश हुए। विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट में कहा कि कुआं मस्जिद के बाहर है।
वहीं वरिष्ठ वकील हुफैजा अहमदी ने कहा कि कुआं आधा अंदर और आधा मस्जिद के बाहर है। कुआं मस्जिद के इस्तेमाल के लिए ही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुएं का इस्तेमाल अगर मस्जिद के बाहर से हो रहा है, तो इस पर कोई आपत्ति नहीं है।
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