VIDEO: 'महालक्ष्मी' के साथ जातिगत भेदभाव, अछूत बता शिक्षा के मंदिर से निकाला

Posted By: Prashant
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    चंदौली। स्कूल को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है जहां कोई छोटा बड़ा नहीं होता। स्कूल में शिक्षक को ज्ञान के भगवान का दर्जा दिया जाता है और उनसे ये उम्मीद कतई नहीं की जाती कि वे पढ़ने आए बच्चों को उनकी जाति के आधार पर बांटे। लेकिन पीएम के काशी से सटे हुए जिले चंदौली में शिक्षा के मंदिर को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है, जहां एक छात्रा को महज 2 दिनों के भीतर ही स्कूल से सिर्फ इसलिए निकाल दिया गया क्योंकि वह दलित जाति की है।

     खाने के लिए घर से बर्तन लाने को कहा

    खाने के लिए घर से बर्तन लाने को कहा

    यही नहीं बच्ची से स्कूल में अपने साथ बैग के साथ -साथ अपने घर के बर्तन भी लाने को बोला गया। जिससे वो मिड -डे मिल का खाना सबसे साथ स्कूल के बर्तन में ना खा सके। इतना सब होने के बाद भी स्कूल के प्रधानाचार्य के तुगलकी फरमान के बाद बच्ची को अब स्कूल आने के लिए मना कर दिया गया है। जिसके बाद से बच्ची के माता-पिता अब उसके भविष्य को लेकर चिंतित है।

    ये है पूरा मामला

    ये है पूरा मामला

    दरसअल चंदौली जिले के मारूपुर गांव की रहने वाले एक दलित परिवार की बच्ची महालक्ष्मी की माँ चिंता देवी ने बताया की दो दिनों पहले उसकी बच्ची का नाम चहनियां के बाबा रामकृष्ण जूनियर हाई स्कूल में बकायदा दाखिला किया गया था। स्कूल के प्रधानाचार्य विनोद यादव ने माता पिता को स्कूल बुला कर महालक्ष्मी का नाम भी लिखा। दो दिनों के बाद उसे स्कूल आने पर रोक लगते हुए ये कहा गया कि उसे हम लोग किताब कॉपी से लेकर सभी सुविधाएं दे देते है। पर आप इसे घर पर ही पढ़ाइए। जब परीक्षा का समय आएगा तो उसे पास कर दिया जाएगा। बच्ची की माँ ने चिंता देवी ने जब पूछा कि ऐसा तुगलकी फरमान क्यों सुनाया जा रहा है। तो प्रिंसपल ने कहा की इस स्कूल में ब्राह्मण,ठाकुर और यादवों के बच्चे पढ़ते हैं ,इसलिए आप की बच्ची दलित होने के कारण यहं नहीं पढ़ सकती। जिसके बाद से माँ बच्ची के माता-पिता को इस बात की फ़िक्र है की उसे पढ़ा सके ताकि वो समाज के किसी काबिल बने।

    कुछ यूँ बयां किया बच्ची ने अपना दर्द

    कुछ यूँ बयां किया बच्ची ने अपना दर्द

    वहीं इस पूरे मामले पर पीड़िता महालक्ष्मी ने बताया कि स्कूल के प्रिंसपल ने पहले तो उसका नाम लिखा। उसके बाद 2 दिनों के बाद से उसके साथ जाति के चलते तमाम फरमान भी सुना दिए गए। पहले बाकि बच्चों के साथ उसके बैठने पर रोक लगाई गई। फिर बाद में उसके स्कूल में मिलने वाले भोजन को करने के लिए घर से बर्तन साथ लाने को कहा गया। लेकिन स्कूल का अत्याचार महालक्ष्मी के लिए यहीं नहीं रुका उसे दो दिनों के बाद स्कूल ना आने का आदेश भी सुना दिया गया। वो भी ये कहते हुए कि तुम यहां मत आना क्योंकि तुम्हारे आने से लोगों को छूत लगता है, तुम नीच जाति की हो। बच्ची पढ़ना चाहती है लेकिन अब तक उसे शिक्षा के इस मंदिर में उसे ले जाए तो कौन।

    जांच के लिए आई थी टीम , प्रिंसिपल ऐसे देते हैं सफाई

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    पीड़ित के परिवार वालो ने अपने बच्ची के भविष्य को सवारने के लिए कई जगह चक्कर काटे कम्प्लेन भी किया। महालक्ष्मी की माँ चिंता देवी के सूचना पर बाबा रामकृष्ण जूनियर हाई स्कूल के चाइल्ड लाइन की टीम ने भी दौरा किया और परिजनों को इस बात के आश्वासन देकर चली गई कि उसे दोबारा से दाखिला मिल जाएगा। लेकिन उसे अभी तक किसी ने स्कूल नहीं बुलाया है। वहीं स्कूल के प्रिंसपल विनोद यादव अपनी सफाई देते हुए ये कहते हैं कि उन्होंने बच्ची को स्कूल आने से नहीं रोका है। अगर उन्हें ऐसा करना ही होता तो उसका दिखला ही क्यों करवाया जाता।

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    English summary
    Chandauli principle get out a student for being SC

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