Aniruddhacharya case: महिलाओं पर कमेंट कर मुश्किलों में फंसे 'पूकी बाबा', अनिरुद्धाचार्य के खिलाफ केस दर्ज
Aniruddhacharya case: महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी के कारण विवादों में घिरे कथावाचक स्वामी अनिरुद्धाचार्य की परेशानियाँ अब गंभीर कानूनी मोड़ ले चुकी हैं। मथुरा की सीजेएम उत्सव राज गौरव की अदालत ने उनके खिलाफ दाखिल परिवाद को स्वीकार करते हुए आधिकारिक रूप से केस दर्ज कर लिया है।
इससे मामले की कानूनी प्रक्रिया अब औपचारिक रूप से शुरू हो गई है और कथावाचक को कोर्ट में पेश होकर जवाब देना होगा। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला...

यह वही मामला है जिसमें अनिरुद्धाचार्य का एक वीडियो अक्टूबर 2024 में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे बेटियों को लेकर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी करते दिखाई दे रहे थे। इससे देशभर में भारी विरोध और निंदा हुई थी।
क्या था पूरा मामला?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने पूरे विवाद में आग में घी डालने का काम किया है। अक्टूबर महीने में स्वामी अनिरुद्धाचार्य का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वे कथित रूप से बेटियों को लेकर विवादित बातें कह रहे थे। वीडियो में उन्होंने कहा था-"आजकल बेटियों की शादी 25 साल में होती है, तब तक वह कई जगह मुंह मार चुकी होती हैं।"
यह टिप्पणी सामने आते ही सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा हो गया। महिला संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम जनता ने इसे महिलाओं के सम्मान पर सीधा हमला बताया। देश भर में नारी-सम्मान और महिलाओं की गरिमा को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध दर्ज हुआ। कई जगहों पर उनके खिलाफ एफआईआर और शिकायतों की मांग उठी। विवाद बढ़ने पर स्वामी ने सफाई दी कि उनका बयान तोड़-मरोड़कर पेश किया गया, और वे महिलाओं का सम्मान करते हैं। लेकिन विरोध थमा नहीं।
मीरा राठौर ने दायर की थी याचिका
इस मामले में अखिल भारत हिंदू महासभा (आगरा) की जिलाध्यक्ष मीरा राठौर ने मथुरा की सीजेएम अदालत में परिवाद दाखिल किया था। उन्होंने अपनी याचिका में कहा यह बयान महिलाओं की गरिमा का गंभीर अपमान है। धार्मिक मंच का इस्तेमाल कर समाज में गलत संदेश दिया गया। ऐसे बयान पर कठोर कार्रवाई आवश्यक है। सुनवाई के बाद अदालत ने याचिका को सही पाया और परिवाद दर्ज कर लिया।
सीजेएम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 1 जनवरी तय की है। इस दौरान वादी मीरा राठौर अदालत में अपना बयान दर्ज कराएंगी। बयान के बाद कोर्ट आगे की कानूनी प्रक्रिया-जांच, नोटिस जारी करने या समन भेजने फैसला लेगा।
अनिरुद्धाचार्य के लिए बढ़ सकती हैं कानूनी चुनौतियाँ
परिवाद स्वीकार होने के बाद अब मामला सिर्फ सोशल मीडिया विवाद नहीं रहा, बल्कि न्यायालय की निगरानी में चल रही विधिक प्रक्रिया बन चुका है। यदि अदालत में अनिरुद्धाचार्य की टिप्पणी को अभद्र, आपत्तिजनक या महिलाओं के सम्मान का उल्लंघन माना गया, तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई हो सकती है। धारा के आधार पर यह मामला दंडनीय अपराध की श्रेणी में जा सकता है।
उन्हें अदालत में पेश होकर अपना पक्ष रखना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, इसी बयान के खिलाफ वाराणसी में भी केस दर्ज हुआ था, जो उनकी मुश्किलें और बढ़ा सकता है। इस विवाद ने एक धार्मिक कथावाचक के बयान से शुरू होकर अब कानूनी लड़ाई का रूप ले लिया है। 1 जनवरी की सुनवाई इस मामले में अगला अहम कदम साबित होगी। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि स्वामी अनिरुद्धाचार्य को इस विवाद में कितनी गंभीर कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।












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