विधानसभा चुनाव में मिली हार से Mayawati ने लिया सबक, BSP ने निकाय चुनाव को लेकर बनाया ये गेम प्लान
Bahujan Smaj Party की मुखिया Mayawati आम चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में जुट गई है।बसपा नगर निगम का चुनाव सिंबल पर लड़ने जा रही है। इसके पीछे पार्टी का मकसद पार्टी के संगठन को मजबूत करना है। हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में बीएसपी को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। एक समय में अपने दम पर यूपी में सरकार बनाने वाली मायावती की पार्टी केवल एक सीट पर ही सिमट कर रह गई थी। इससे सबक लेते हुए अब मायावती ने नगर निकाय के चुनावों में उतरने का फैसला किया है ताकि संगठन को फिर से पुराने लेवल पर ले जाया सके।

शहरी एवं स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर हुई बैठक
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने शुक्रवार को पार्टी कार्यकर्ताओं को आगामी शहरी स्थानीय निकाय चुनाव की तैयारी शुरू करने का निर्देश दिया। चुनाव की रणनीति पर चर्चा के लिए यहां पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों की बैठक हुई। प्रत्याशियों की स्क्रीनिंग का जिम्मा जिला कमेटी को सौंपा गया है। समिति नगर निगमों में पार्षद के प्रत्येक पद के साथ-साथ नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों के सदस्यों के लिए तीन नामों को अंतिम चयन के लिए प्रभारी क्षेत्र को अग्रेषित करेगी।

उम्मीदवार को कई मानकों पर परखा जाएगा
उम्मीदवार की जीत योग्यता चयन का मुख्य मानदंड होगा। चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों को निर्देश दिया गया है कि वे अपना बायोडाटा जिला समिति के पास जमा करें। बसपा के एक नेता ने कहा कि मेयर और अध्यक्ष पदों के लिए उम्मीदवारों को पार्टी की केंद्रीय समिति द्वारा अंतिम रूप दिया जाएगा। बसपा के वरिष्ठ नेता अखिलेश अंबेडकर ने कहा, 'पार्टी प्रमुख मायावती के निर्देश पर पूरे उत्तर प्रदेश में प्रत्येक संभाग में शहरी स्थानीय निकाय चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के लिए बैठकें हो रही हैं।

अपने सिंबल पर निकाय चुनाव लड़ेगी बसपा
उन्होंने कहा, 'पार्टी ने नगर निगम चुनाव पार्टी के चुनाव चिह्न पर लड़ने का फैसला किया है। एक बार वार्डों का परिसीमन और सीटों का आरक्षण पूरा हो जाने के बाद, पार्टी उम्मीदवारों का चयन शुरू करेगी। " उम्मीदवारों के चयन को लेकर पार्टी ने एक बार निचले स्तर पर बैठकें करने का फैसला लिया है। इन बैठकों के बाद ही वार्ड के उम्मीदवारों के नाम तय किए जाएंगे। बीएसपी की कोशिश है कि इस बार नगर निगम के चुनाव में ज्यादा से ज्यादा उम्मीदवार जिताए जाएं जिसका लाभ आने वाले आम चुनाव में मिल सके।

पिछले बार बीएसपी ने किया था अच्छा प्रदर्शन
नगर निगम चुनाव में विभिन्न पदों के लिए उम्मीदवारों के चयन के दौरान पार्टी युवा, वफादार और प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं को वरीयता देगी। बसपा ने 2017 के शहरी स्थानीय निकाय चुनाव पार्टी के चुनाव चिह्न पर लड़ा था। इसने दो महापौर पदों, 26 नगर पालिका परिषद अध्यक्षों, 45 नगर पंचायत अध्यक्षों, 246 नगर पालिका परिषद सदस्यों, 211 नगर पंचायत सदस्यों और 147 नगरसेवकों को जीतकर राजनीतिक पर्यवेक्षकों को चौंका दिया।

कार्यकर्ताओं को उत्साह बढ़ाने की कवायद
कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने में जुटी बसपा बसपा को स्थानीय निकाय चुनावों में अपने खोए हुए राजनीतिक क्षेत्र को फिर से हासिल करने में जुट गई है। हाल ही में सम्पन्न हुए यूपी चुनावों में बसपा का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा था। नगर निगम के चुनाव के बहाने बसपा अपने कैडर के मनोबल को मजबूत करने की कोशिश में जुट गई है। पार्टी कुछ पूर्व विधायकों को यूएलबी में उतारने पर भी विचार कर रही है। 2017 के निकाय चुनावों में, बसपा ने दो नगर निगम सीटें - अलीगढ़ और मेरठ - जीतने में कामयाबी हासिल की थी। बाद में 2019 के लोकसभा चुनावों में सपा के साथ गठबंधन करके 10 सीटें जीती थीं।












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