महिला आरक्षण बिल को लेकर मायावती ने वंचित समाज को किया अलर्ट! SC-ST-OBC मुद्दे पर कांग्रेस और सपा की खोली पोल
महिला आरक्षण अधिनियम के लागू होने और इसकी अधिसूचना जारी होने के साथ ही देश की राजनीति गरमा गई है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस, भाजपा और समाजवादी पार्टी (SP) पर कड़ा प्रहार किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों को 'छलावा' और 'दोगला' करार दिया। आइए जानते हैं बसपा सुप्रीमो ने किन मुद्दों पर विपक्षी दलों को घेरा?
मायावती ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए उसे 'गिरगिट' की तरह रंग बदलने वाली पार्टी बताया। उन्होंने कहा कि आज जो कांग्रेस महिला आरक्षण में पिछड़ों की वकालत कर रही है, उसी ने केंद्र में सत्ता के दौरान कभी भी SC, ST और OBC के आरक्षण कोटे को भरने की सुध नहीं ली।

समाजवादी पार्टी का रवैया 'जातिवादी' और 'तिरस्कारी'
इसी तरह समाजवादी पार्टी को आड़े हाथों लेते हुए बसपा प्रमुख ने कहा कि सपा जब सत्ता से बाहर होती है तो बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन सत्ता में आते ही उसका रवैया 'जातिवादी' और 'तिरस्कारी' हो जाता है। उन्होंने याद दिलाया कि 1994 में पिछड़े मुस्लिमों को OBC लाभ देने वाली रिपोर्ट को सपा ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था, जिसे बाद में 1995 में बसपा सरकार ने लागू किया।
जनगणना और परिसीमन पर रुख
महिला आरक्षण के क्रियान्वयन में हो रही देरी और 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के सवाल पर मायावती ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार इसे जल्द लागू करना चाहती है, तो पुरानी जनगणना ही आधार होनी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि आज कांग्रेस सत्ता में होती, तो वह भी भाजपा की तरह ही देरी करने वाले कदम उठाती।
1. देश के SC, ST व OBC समाज के संवैधानिक/क़ानूनी अधिकारों आदि के मामले में, कांग्रेस भी गिरगिट की तरह अपना रंग बदलने वाली यह पार्टी भी, महिला आरक्षण में, जो अब इन वर्गों की बात कर रही है, तो यही कांग्रेस पार्टी है जिसने अपनी केन्द्र की सरकार के रहते हुये किसी भी क्षेत्र में इनके…
— Mayawati (@Mayawati) April 17, 2026
वंचित समाज को आत्मनिर्भर बनने की सलाह
मायावती ने SC, ST, OBC और मुस्लिम समाज को आगाह करते हुए कहा कि कोई भी राजनीतिक दल उनके भविष्य के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने इन वर्गों को संदेश दिया कि: वर्तमान में जो मिल रहा है, उसे स्वीकार करें। किसी भी दल के बहकावे में न आएं। अपने पैरों पर खड़े होकर समाज को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाएं।












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