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‘दबदबा था, दबदबा रहेगा, मैं इनका बाप हूं’,इतना सुनते ही क्यों फूट-फूटकर रो पड़े बृजभूषण शरण सिंह? वीडियो वायरल

Brij Bhushan Sharan Singh Video: उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपने दबदबे को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वाले पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई बयान या विवाद नहीं, बल्कि उनकी भावुकता है। गोंडा में चल रहे राष्ट्र कथा महोत्सव के दौरान ऐसा दृश्य सामने आया, जिसे देखकर वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए।

मंच पर बैठे बृजभूषण शरण सिंह अचानक फूट-फूटकर रोने लगे और यह पल कैमरों में कैद हो गया। अब यही वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। गोंडा जिले में राष्ट्र कथा महोत्सव का आयोजन चल रहा था। दूसरे दिन कथा वाचन के बाद सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज बच्चों को राष्ट्र के नाम संदेश दे रहे थे।

Brij Bhushan Sharan Singh Video

इसी दौरान उन्होंने अवध क्षेत्र, उत्तर प्रदेश और गोंडा में प्रभाव और दबदबे की बात करते हुए बृजभूषण शरण सिंह का नाम लिया। महाराज ने कहा कि जब लोग कहते हैं दबदबा था, दबदबा है और दबदबा रहेगा, तो यहां उसका बाप बैठा है। उनका भी दबदबा था, है और रहेगा।

मंच पर बैठे बृजभूषण शरण सिंह यह सुनते ही भावुक हो गए। पहले उनकी आंखें भर आईं और कुछ ही पलों में वह खुद को संभाल नहीं पाए। देखते ही देखते वह मंच पर ही फूट-फूटकर रोने लगे।

करीब एक घंटे तक छलकते रहे आंसू

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह भावुक क्षण कुछ सेकंड का नहीं था। पूर्व सांसद करीब एक घंटे तक आंसुओं के साथ मंच पर बैठे नजर आए। कथा के दौरान उनकी आंखों से लगातार आंसू निकलते रहे। वीडियो में साफ दिख रहा है कि बृजभूषण शरण सिंह भावनाओं में डूबे हुए हैं और खुद को रोक पाने में असमर्थ हैं।

यह वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। समर्थक इसे सम्मान और आत्मीयता से जुड़ा पल बता रहे हैं, तो आलोचक उनके पुराने बयानों और दबदबे से जुड़े विवादों को याद दिला रहे हैं।

'दबदबा' शब्द और बृजभूषण का पुराना रिश्ता

बृजभूषण शरण सिंह के साथ 'दबदबा' शब्द नया नहीं है। गोंडा और आसपास के इलाकों में उनका राजनीतिक प्रभाव लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। समर्थक उन्हें इलाके का मजबूत नेता मानते हैं, जबकि विरोधी इसी दबदबे को लेकर उन पर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में राष्ट्र कथा के मंच से जब यही शब्द पूरे आत्मविश्वास के साथ बोला गया, तो यह उनके लिए भावनात्मक क्षण बन गया।

सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज का राष्ट्र और संस्कारों पर जोर

राष्ट्र कथा महोत्सव में सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने सिर्फ किसी एक व्यक्ति की बात नहीं की, बल्कि राष्ट्र, संस्कृति और शिक्षा पर विस्तार से अपनी अमृत वाणी रखी। उन्होंने कहा कि कथा केवल मनोरंजन नहीं होती, बल्कि यह मन का मंथन है। यह चेतना को जागृत करती है और ऊर्जा को ऊंचा उठाती है।

उन्होंने भारतीय शिक्षा नीति की कमियों की ओर भी इशारा किया और कहा कि ज्ञान, विज्ञान और प्रज्ञा को केवल कर्मकांडों तक सीमित कर दिया गया है। उनके अनुसार, झंडे और डंडे से देश नहीं बचता, बल्कि संस्कारों से राष्ट्र मजबूत होता है।

युवाओं को दिया राष्ट्र चेतना का संदेश

कथा महोत्सव के तीसरे दिन सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने खास तौर पर युवाओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म का मूल ही राष्ट्र की चिंता करना है। भारत की संस्कृति केवल रीति-रिवाज नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। अगर मनुष्य के भीतर सच्ची मानवता जागृत हो जाए, तो कथा, पूजा और गुरु-शिष्य परंपरा अपने आप सार्थक हो जाती है।

उन्होंने यह भी कहा कि जीवन में अगर इंसान केवल इंद्रियों के पीछे भागता रहेगा, तो उसे कभी सच्चा सुख नहीं मिलेगा। सनातन दर्शन सिखाता है कि असली आनंद भीतर है।

क्यों चर्चा में है यह वीडियो?

इस पूरे आयोजन में कई विचार और संदेश सामने आए, लेकिन चर्चा का केंद्र बना बृजभूषण शरण सिंह का रोना। राजनीति में जहां ताकत और दबदबे की बातें आम हैं, वहां किसी नेता का मंच पर इस तरह भावुक हो जाना लोगों को चौंका गया।

शायद यही वजह है कि वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसके मायने निकालने में जुटे हैं। एक बात तय है कि 'दबदबा' शब्द ने इस बार बृजभूषण शरण सिंह को विवाद में नहीं, बल्कि भावनाओं के केंद्र में ला खड़ा किया है।

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