‘कोर्ट ने सजा दी, कोर्ट ने ही जमानत दी, तो हंगामा क्यों?’,कुलदीप सेंगर के समर्थन में क्या बोल गए बृजभूषण
Brij Bhushan Sharan Singh on Kuldeep Singh Sengar: उन्नाव रेप केस में दोषी ठहराए गए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित होने के बाद देशभर में उठे विरोध के बीच भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और कैसरगंज से बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह खुलकर उनके समर्थन में आ गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया है कि जब सजा देने वाली और सजा निलंबित करने वाली संस्था एक ही है, यानी अदालत, तो फिर इस फैसले पर इतना शोर क्यों मचाया जा रहा है।
'सजा भी कोर्ट ने दी, राहत भी कोर्ट ने दी'
UP TAK की खास पॉडकास्ट सीरीज 'यूपी की बात' में बातचीत के दौरान बृजभूषण शरण सिंह ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि कुलदीप सेंगर को सजा भी अदालत ने दी और सजा निलंबित करने का फैसला भी अदालत का ही है। उनके मुताबिक, जब ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को दोषी ठहराया था, तब उसी फैसले का खूब स्वागत किया गया। लेकिन अब जब दिल्ली हाई कोर्ट ने सजा निलंबित की है, तो उसी न्यायपालिका पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अगर अदालत के एक फैसले पर भरोसा किया जाता है, तो दूसरे फैसले पर भी वही भरोसा दिखना चाहिए। वरना इसका मतलब यही निकलेगा कि लोगों को अदालत पर भरोसा नहीं है, बल्कि वे फैसले अपनी सुविधा के हिसाब से स्वीकार कर रहे हैं।
🟡 धरना-प्रदर्शन को बताया 'नाटक'
बृजभूषण शरण सिंह ने कुलदीप सेंगर की सजा निलंबित होने के बाद हो रहे विरोध प्रदर्शनों को सीधे तौर पर नाटक करार दिया। उन्होंने कहा कि यह देश भावनाओं से नहीं, कानून से चलता है। नैतिकता के नाम पर किसी को सजा या फांसी नहीं दी जा सकती। यहां फैसला कानून करता है और कानून का मतलब है अदालत।
उनका कहना था कि अगर किसी को हाई कोर्ट के फैसले से आपत्ति है, तो उसके लिए संवैधानिक रास्ता मौजूद है। लोग सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं, आगे की अदालतों में अपील कर सकते हैं। लेकिन सड़कों पर उतरकर हंगामा करना और दबाव बनाना न्यायपालिका के सम्मान के खिलाफ है।
🟡 'प्रश्न उठाने का मतलब कोर्ट पर भरोसा नहीं'
बृजभूषण ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि कुलदीप सेंगर के मामले में हर कदम न्यायपालिका ने उठाया है। सजा भी कोर्ट ने दी, जमानत और सजा निलंबन भी कोर्ट ने ही किया। ऐसे में सवाल उठाने का सीधा मतलब यही है कि लोग अदालत की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं कर रहे। उन्होंने कहा कि जब अदालत ने सजा सुनाई थी, तब सबको अच्छा लगा। अब उसी अदालत ने राहत दी है, तो वही लोग नाराज हैं। यह दोहरा मापदंड सही नहीं है।
🟡 ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर भी खुलकर बोले
इसी बातचीत में बृजभूषण शरण सिंह ने उत्तर प्रदेश में बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों की बैठक का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ऐसी बैठकों में कुछ भी गलत नहीं है। अगर पार्टी अलग-अलग जातियों और वर्गों के सम्मेलन कर सकती है, तो किसी समाज के विधायक या नेता आपस में बैठकर बातचीत करें, इसमें आपत्ति क्यों होनी चाहिए।
उनका कहना था कि ऐसी बैठकों से समाज और बिरादरी के सुख-दुख साझा होते हैं। इसे सजा या अनुशासनहीनता से जोड़ना गलत है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि पार्टी नेतृत्व का अपना दृष्टिकोण है, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर वे इस तरह की बैठकों के खिलाफ नहीं हैं।
🟡 पार्टी लाइन से अलग रुख
गौरतलब है कि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर सख्त रुख अपनाया था। उन्होंने साफ कहा था कि बीजेपी जाति, वर्ग या परिवार आधारित राजनीति में विश्वास नहीं रखती और भविष्य में इस तरह की बैठकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है। इस पर बृजभूषण का बयान पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग नजर आया।
🟡 'मेरे खिलाफ भी हुआ था विश्वव्यापी षड्यंत्र'
कुलदीप सेंगर के मुद्दे पर बोलते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जिक्र भी किया। उन्होंने महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए आरोपों को विश्वव्यापी षड्यंत्र बताया। उनका दावा था कि कनाडा, अमेरिका समेत कई देशों में उनके खिलाफ प्रदर्शन कराए गए और इसमें विपक्षी दलों से लेकर किसान संगठनों तक शामिल थे। उन्होंने सवाल उठाया कि अब वे सारे लोग कहां हैं। उनके मुताबिक, यह सब एक साजिश थी, जो अब धीरे-धीरे बेनकाब हो रही है।
🟡 'कुलदीप सेंगर के साथ भी साजिश'
जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या कुलदीप सिंह सेंगर पर लगे आरोप गलत थे, तो बृजभूषण शरण सिंह ने साफ कहा कि उनके साथ भी षड्यंत्र हुआ। उनका दावा था कि अगर यह साजिश नहीं होती, तो आज सजा निलंबित होने के बाद धरना-प्रदर्शन और विरोध की नौबत ही नहीं आती।
इस तरह बृजभूषण शरण सिंह ने साफ संदेश दिया कि अदालत के फैसलों को भावनाओं के चश्मे से नहीं, बल्कि कानून और संविधान के दायरे में देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, न्यायपालिका का सम्मान ही लोकतंत्र की असली कसौटी है।












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