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कोर्ट से राहत के बाद बृजभूषण की 'विजय रैली'! हनुमानगढ़ी से भरी हुंकार, थम गई कानूनी जंग या बाकी है तूफान?

दिल्ली की एक अदालत ने भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत दर्ज यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली है।

यह केस एक नाबालिग पहलवान के पिता द्वारा दर्ज कराया गया था, लेकिन जांच के दौरान उन्होंने अपना बयान बदलते हुए कहा कि उन्होंने यह शिकायत ग़ुस्से और निजी नाराज़गी में दर्ज कराई थी। पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपों में दम नहीं है और लड़की की उम्र भी अब तय मानदंडों के तहत 'नाबालिग' नहीं पाई गई। अदालत ने रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए केस को बंद कर दिया।

Brij Bhushan Victory Parade

एयरपोर्ट पर हजारों समर्थकों की भीड़
फैसले के अगले ही दिन बृजभूषण शरण सिंह अयोध्या पहुंचे, जहां का नजारा किसी राजनीतिक रैली से कम नहीं था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एयरपोर्ट पर हजारों समर्थकों की भीड़, 100 से ज्यादा SUV गाड़ियों का काफिला और नारों के साथ उनका ज़ोरदार स्वागत हुआ। यह साफ दिख रहा था कि वह इस फैसले को अपनी 'राजनीतिक और सामाजिक वापसी' के तौर पर पेश कर रहे हैं।

मैंने पहले ही कहा था, ये आरोप झूठे हैं - बृजभूषण
मीडिया से बात करते हुए बृजभूषण ने कहा कि उन्हें पहले से ही खुद पर भरोसा था और भगवान हनुमान पर भी। उन्होंने कहा कि, 'जब आरोप लगे थे, मैंने उसी समय कह दिया था कि यह सब झूठ है। अब कोर्ट ने भी ये बात मान ली।' उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि अगर वे दोषी पाए जाते, तो वे खुद को फांसी लगा लेते। उन्होंने इसे अपनी सच्चाई की जीत बताया और न्यायपालिका का आभार जताया।

'कानून जरूरी हैं, लेकिन दुरुपयोग पर रोक हो'
बृजभूषण शरण सिंह ने साफ किया कि वे यौन शोषण से जुड़े कानूनों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन अब इनका दुरुपयोग बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि, 'यह कानून जरूरी हैं, लेकिन कुछ लोग इनका इस्तेमाल बदला लेने या छवि खराब करने के लिए कर रहे हैं।' उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच हो और झूठे केस दर्ज कराने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।

'जो मुझे भगवान कहते थे, उन्हीं ने झूठे आरोप लगाए'
बृजभूषण ने भावनात्मक अंदाज में कहा कि जिन खिलाड़ियों ने उन पर आरोप लगाए, वे कभी उन्हें 'कुश्ती का भगवान' कहते थे। उन्होंने कहा कि ये खिलाड़ी उनके घर आते थे, वे उनके पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होते थे। इस टिप्पणी से उन्होंने यह जताने की कोशिश की कि उनके और खिलाड़ियों के बीच पहले अच्छे रिश्ते थे, लेकिन बाद में निजी कारणों से यह विवाद खड़ा हुआ।

क्या कानूनी जंग वाकई थमी है या तूफान बाकी है?
POCSO केस तो खत्म हो गया है, लेकिन बृजभूषण शरण सिंह अभी भी छह महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे हैं। ये केस एक अन्य अदालत में विचाराधीन हैं। बृजभूषण इन आरोपों को शुरू से ही खारिज करते आ रहे हैं और अब भी खुद को निर्दोष बता रहे हैं। फिलहाल कानूनी जंग थमी नहीं है।

राजनीतिक संकेत: 'क्लीन चिट' के बाद अगला कदम?
बृजभूषण का यह शक्ति प्रदर्शन सिर्फ कानूनी लड़ाई की जीत का जश्न नहीं था, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक संदेश भी छिपा था। 2024 का लोकसभा चुनाव भले बीत गया हो, लेकिन यूपी की राजनीति में उनकी वापसी और प्रभाव को फिर से स्थापित करने की कोशिश साफ दिख रही थी। अयोध्या जैसे संवेदनशील शहर में ये विजय परेड किसी बड़े इशारे से कम नहीं थी।

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