UP में तालिबान के मुद्दे को और हवा देगी BJP,सपा के पक्ष में मुसलमानों के एकजुट होने का सता रहा डर
लखनऊ, 20 अगस्त: उत्तर प्रदेश की सियासी राजनीति में 'तालिबान' की एंट्री हो चुकी है। समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क के तालिबन के समर्थन वाले बयान पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में जिस तरह से सपा पर पलटवार किया उससे ऐसे संकेत मिले कि आने वाले दिनों में तालिबान के मुद्दे को बीजेपी और हवा देगी। गुरुवार को दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से सीएम योगी ने मुलाकात की थी। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में तालिबान के मुद्दे को लेकर भी रणनीति बनायी गई। बीजेपी के रणनतिकारों को इस बात का डर सता रहा है कि तालिबानी समर्थन वाले बयान पर यूपी के मुसलमान यदि सपा के पक्ष में लामबंद हुए तो मिशन 2022 की राह काफी कठिन हो जाएगी।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को सदन में तालिबान का जिक्र करते हुए कहा कि जो लोग तालिबान का समर्थन कर रहे हैं उन्हें शर्म आनी चाहिए। सीएम योगी के इस बयान के बाद ही तालिबान के मुद्दे ने और तूल पकड़ लिया। सियासी उठापटक के बीच सीएम को दिल्ली तलब किया गया जिसमें इस बात पर भी चर्चा हुई कि तालिबानी मुद़दे को काउंटर करने के लिए बीजेपी सरकार और संगठन की रणनीति क्या रहेगी।
भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधकारी ने कहा कि,
'' पश्चिम बंगाल में जिस तरीके से मुस्लिम समुदाय का ध्रुवीकरण तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में हुआ उससे पार्टी को काफी नुकसान हुआ था। मुसलमानों की एकजुटता की वजह से ही वहां पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। वही डर यूपी में भी बना हुआ है। पार्टी को लगता है कि तालिबान के मुद्दे पर यदि यूपी का मुसलमान सपा के पक्ष में लामबंद हुआ तो बीजेपी के सामने और चुनौतियां बढ़ जाएंगी।''
पश्चिम बंगाल की हार से सबक लेना चाहती है भाजपा
दरअसल पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता ने जिस तरह से बीजेपी को धूल चटाई थी उसके बाद ही भाजपा यूपी में काफी सतर्क नजर आ रही है। बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में पूरा जोर लगाया था उसके बावजूद भी ममता वहां मुस्लिमों को एकजुट करने और बंगाली अस्मिता के मुद्दे के सहारे जीतने में सफल रहीं थी। पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों का ध्रवीकरण पूरी तरह से तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में हो गया था। ममता की पार्टी के कई नेताओं को पार्टी में शामिल कराने के बाद भी वहां भाजपा को सफलता नहीं मिली थी।
भाजपा के सूत्रों ने बताया कि सपा के नेताओं के तालिबानी समर्थन बयान के बाद बीजेपी को बैठे बिठाए एक मुद्दा मिल गया। वह इस मुद्दे को और लंबा खींचना चाहती है। पार्टी को इसमें फायदा दिख रहा है। भाजपा इस मुद्दे को गरमाकर हिन्दुओं को एकजुट करना चाहती है। वह चाहती है कि इस मुद्दे को गरमाए रखने से यूपी में गैर मुस्लिम जातियों में माहौल बनाने में आसानी रहेगी। आने वाले दिनों में तालिबानी मुद्दे को लेकर सियायसत और तेज होने की उम्मीद है।

तालिबान के समर्थन में शफीकुर्रहमान बर्क ने कही थी ये बात
अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने तालिबान को लेकर बयान दिया था। सपा सांसद ने तालिबान का समर्थन करते हुए अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे को सही बताया था। उन्होंने अफगानिस्तान में तालिबान की कार्रवाई की तुलना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से कर दी। बर्क के मुताबिक अफगानिस्तान में अमेरिका की हुक्मरानी क्यों? तालिबान वहां की ताकत है।
तालिबानी मुद्दे पर बोलने से बच रहे सपा के नेता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सपा पर पलटवार के बाद से ही अब समाजवादी पार्टी के नेता इस मसले पर बोलने को तैयार नहीं हो रहे हैं। सपा के नेताओं को लगता है कि इस मुद़दे पर अब ज्यादा बोलने से पार्टी का ही नुकसान होने की संभावना है। सपा के सूत्रों के मुताबिक पार्टी के सभी नेताओं और प्रवक्ताओं को हिदायत दी गई है कि वो तालिबान के मुद़दे पर किसी तरह का बयान न दें जिससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचे।
सपा के एमएलएसी अनुराग भदौरिया ने कहा,
''देश और प्रदेश में बहुत सारे मुद्दे हैं जिनपर बात की जा सकती है। आपलोग सिर्फ तालिबान पर ही सवाल क्यों पूछ रहे हैं। आप लोग हमारे ही कंधे पर बंदूक रखकर अपना मकसद क्यों साधना चाहते हैं।''












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