दलित वोटरों को लुभाने के लिए अंबेडकर परिनिर्वाण दिवस पर अभियान चलाएगी बीजेपी, ये है गेम प्लान

लखनऊ, 01 दिसंबर: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले चुनाव से पहले सभी दल अपनी अपनी तैयारियों को अमली जामा पहनाने में जुटे हुए हैं। बीजेपी हर कदम फूंक फूंक कर रख रही है। जाटवों को लुभाने के लिए कुछ दिन पहले ही बीजेपी ने उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल बेबीरानी मौर्या को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर अहम जिम्मेदारी सौंपी थी। अब भाजपा इससे भी एक कदम आगे बढ़कर 6 दिसम्बर को अंबेडकर की पूण्य तिथि के मौके पर पूरे प्रदेश में दलितों के बीच एक अभियान छेड़ेगी। संविधान गौरव यात्रा के माध्यम से अब बीजेपी अब यूपी के उन 150 विधानसभा सीटों पर अभियान चलाएगी जहां दलित और जाटवों की संख्या ठीक ठाक है।

बीजेपी

2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले दलित मतदाताओं को लुभाने के लिए, भाजपा का एससी मोर्चा बी आर अंबेडकर पर विशेष जोर देने के साथ संविधान दिवस को चिह्नित करने के लिए राज्य के लगभग 150 विधानसभा क्षेत्रों में 20 "बड़े" कार्यक्रम आयोजित करेगा। कार्यक्रमों का विवरण साझा करते हुए, भाजपा के एससी विंग के अध्यक्ष लाल सिंह आर्य ने कहा कि 26 नवंबर को देश भर के सभी जिलों में पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा 'संविधान गौरव यात्रा' का आयोजन किया जाएगा, जिसे संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

आर्य ने कहा कि कार्यक्रमों का समापन अम्बेडकर की पुण्यतिथि 6 दिसंबर को होगा। आर्य ने यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा की सभी जिला इकाइयां संविधान दिवस पर अपने-अपने कार्यालयों में कार्यक्रम आयोजित करेंगी। उन्होंने कहा कि इन सभी कार्यक्रमों की शुरुआत संविधान और इसके मुख्य वास्तुकार बी आर अंबेडकर के सामने नतमस्तक होकर होगी।

स्वतंत्रदेव

यूपी में संविधान गौरव यात्रा के तहत होंगे 20 बड़े कार्यक्रम

उत्तर प्रदेश में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के बारे में पूछे जाने पर आर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 20 बड़े कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। इनमें से कई कार्यक्रमों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके डिप्टी केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा संबोधित करेंगे। ये कार्यक्रम लगभग 150 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करते हुए 20 जिलों में फैलाए जाएंगे। सूत्रों ने बताया कि इन कार्यक्रमों पर विशेष जोर दलित आदर्श अंबेडकर पर रहेगा। उनके बड़े आकार के चित्रों का उपयोग भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा की जाने वाली जनसभाओं में किया जाएगा।

अम्बेडकर के रास्ते पर चलने वाली बीजेपी अकेली पार्टी

लखनऊ के विश्वेश्वरैया हॉल में सम्मान समारोह में मौजूद पार्टी के एक नेता ने बताया कि कि समारोह के दौरान मौर्य ने भीमराव अम्बेडकर का आह्वान करते हुए मुख्य रूप से दलित श्रोताओं को अम्बेडकर की तीन मुख्य बातों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि, "वह चाहते थे कि समुदाय शिक्षित हो, एकजुट रहे और कुरीतियों के खिलाफ लड़े और अंबेडकर के दिखाए रास्ते पर चलने वाली भाजपा ही एकमात्र पार्टी है।

दलित एवं जाटवों के विकास और समृद्धि का आश्वासन

बेबीरानी मौर्य कहती हैं कि, "मैं इस जाति में पैदा हुई थी। मेरा परिवार चमड़े और जूतों के काम में था और अब भी है। जाटव के तौर पर मैं करीब तीन दशक से बीजेपी के साथ हूं।'' यह पूछे जाने पर कि क्या वह भाजपा को जाटव वोट दिलाने के लिए आश्वस्त हैं, मौर्य ने कहा, '' मायावती ने उनको एक वोट बैँक के तौर पर इस्तेमाल किया। इस समुदाय के गरीब अंततः उस पार्टी के साथ होंगे जिसने उन्हें शिक्षा, विकास और समृद्धि का आश्वासन देगा।''

बेबीरानी मौर्य कहती हैं, "हां, मैं एक 'दलित की बेटी' हूं,"। उन्होंने स्वीकार किया कि 2022 के उत्तर प्रदेश (यूपी) चुनावों में, वह जाटवों को रैली करने की कोशिश करेंगी। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का मुख्य आधार माना जाता है और पार्टी प्रमुख मायावती के कट्टर समर्थक हैं जो भी जाटव हैं। मौर्य के पिता आगरा में कांग्रेस पार्षद थे।

यूपी में करीब 21 फीसदी दलित वोट बैंक में जाटवों का एक बड़ा हिस्सा है, लगभग 11 फीसदी है। इस वोट बैंक पर अब तक बसपा की मुखिया मायावती का एकक्षत्र राज था। अब उसमें सेंध लगाने की कोशिश भीम आर्मी के चंद्रशेखर ने की अब बीजेपी बेबीरानी मौर्य को जाटव बताने में जुटी हुई है। दरअसल, सितंबर में उत्तराखंड की राज्यपाल का पद छोड़ने के लगभग 34 दिन बाद आगरा की दलित महिला नेता बेबी रानी मौर्य लखनऊ पहुंचीं। उनके आगमन को लेकर जो तस्वीरें लगाई गईं थी उसमें उनको जाटव के नाम से दर्शाया गया था।

अंबेडकर

6 दिसंबर को मनाया जाता है महापरिनिर्वाण दिवस

डॉ बीआर अंबेडकर की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में हर साल 6 दिसंबर को महापरिनिर्वाण दिवस मनाया जाता है। डॉ बीआर अम्बेडकर भारत के संविधान के मुख्य वास्तुकार थे। वह एक प्रख्यात भारतीय विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक भी थे जिन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन के साथ-साथ महिलाओं और श्रमिकों के अधिकारों को भी प्रेरित किया। बौद्ध धर्म में, 'परिनिर्वाण' जिसका अर्थ है निर्वाण-मृत्यु के बाद किसी की मृत्यु पर होता है जिसने अपने जीवनकाल में निर्वाण प्राप्त किया है।

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