“घर का भेदी लंका ढाए”? तो क्या मुलायम के गढ़ में सेंधमारी का ये है BJP का बड़ा प्लान
लखनऊ, 03 सितंबर: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान अपनी फजीहत कराने वाले प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (पीएसपी-एल) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव ने यदुकुल को जोड़ने का अभियान शुरू किया है। ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि अब वो मुलायम सिंह यादव के गढ़ मैनपुरी से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। बीजेपी के सूत्रों की माने तो शिवपाल का मैनपुरी से चुनाव लड़ना बीजेपी के यूपी में 75 प्लस सीटें जीतने के अभियान का ही एक हिस्सा है। फिलहाल मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से सांसद हैं। हालांकि शिवपाल ने अभी केवल इतना ही कहा है कि वह चाहते हैं कि मैनपुरी से नेताजी ही चुनाव लड़ें। लेकिन पीएसपी के सूत्र बता रहे हैं कि शिवपाल को पता है कि मुलायम सिंह की तबीयत ठीक नहीं है इसलिए शायद वो इस बार लोकसभा का चुनाव न लड़ें। ऐसी परिस्थिति में वो अपने आपको इसके लिए तैयार करने में जुट गए हैं।

बीजेपी के साथ मिलकर लड़ सकते हैं 2024 का चुनाव
शिवपाल ने हालांकि साफतौर पर कहा कि वह कभी भी समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ नहीं जाएंगे और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठजोड़ की संभावनाओं से इंकार नहीं कर सकते। 2024 के लोकसभा चुनावों के बारे में बात करते हुए शिवपाल ने कहा, "इस बार हम (कुछ सीटें) जीतने के लिए चुनाव लड़ेंगे।" शिवपाल ने राज्य मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बातें कहीं। शिवपाल के इस बयान के बाद ही कयास लगाए जा रहे हैं कि 2024 का चुनाव वह बीजेपी के साथ मिलकर लड़ सकते हैं।
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नेताजी चुनाव नहीं लड़ेंगे तो देखा जाएगा
शिवपाल ने हालांकि यह कहा कि, "मैं चाहता हूं कि नेताजी (मुलायम) इस सीट से चुनाव लड़ें। " दरअसल मैनपुरी सीट का प्रतिनिधित्व वर्तमान में सपा संस्थापक और मुख्य संरक्षक मुलायम सिंह यादव कर रहे हैं, लेकिन ऐसी अटकलें हैं कि वह इस बार स्वास्थ्य कारणों से चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। शिवपाल ने कहा कि मैं उनके स्वस्थ होने और सीट पर फिर से चुनाव लड़ने की कामना करता हूं। अगर वह चुनाव नहीं लड़ते हैं, तो देखते हैं कि चीजें कैसी होती हैं। जैसी परिस्थितियां बनेंगी वैसा किया जाएगा।

राष्ट्रपति चुनाव के बाद अखिलेश से अलग हो गए थे शिवपाल
शिवपाल ने 2022 के यूपी विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी के गठबंधन के तहत सपा के टिकट पर जसवंत नगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, ने जुलाई में सपा के साथ एक अल्टीमेटम के बाद नाता तोड़ लिया। इससे पहले उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा नीत एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को वोट दिया था। द्रौपदी का समर्थन करने के बाद से ही अखिलेश के साथ उनकी दूरियां बढ़ गईं थीं। बाद में अखिलेश ने भी उनको अपने गठबंधन से स्वतंत्र कर दिया था।

निकाय चुनाव और आम चुनाव की तैयारी में जुटेगी प्रसपा
शिवपाल ने कहा कि हमने सपा के साथ अच्छे संबंधों की उम्मीद में पांच साल बर्बाद किए, लेकिन अब नहीं। अब हम अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए पूरी ताकत से जुटेंगे। हम 2024 का चुनाव लड़ेंगे और उससे पहले शहरी स्थानीय निकाय चुनाव लड़ेंगे। शिवपाल 1992 में पार्टी की स्थापना के बाद से संस्थापक मुलायम सिंह यादव के साथ सपा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे। हालांकि, 2012-2017 के दौरान सपा शासन के दौरान, शिवपाल और तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एक दूसरे से अलग हो गए थे। शिवपाल ने 2018 में पीएसपी-एल का गठन किया था।

2024 का चुनाव मजबूती से लड़ने की तैयारी
2024 के लोकसभा चुनावों के बारे में पूछे जाने पर, शिवपाल ने कहा कि हम चुनाव लड़ेंगे। पिछली बार (2019 में) हमने 48 सीटों पर चुनाव लड़ा था (कोई नहीं जीता)। लेकिन इस बार हम और सीटों पर चुनाव लड़ सकते हैं, हालांकि निश्चित रूप से सभी सीटों पर नहीं, क्योंकि हम नए हैं। लेकिन चीजें तब स्पष्ट होंगी जब चुनाव एक साल दूर होंगे। लोकसभा चुनावों में अभी भी लगभग दो साल बाकी हैं। किसी भी रूप में सपा से कोई नाता नहीं रहेगा। हमें कई बार एसपी ने धोखा दिया है। भाजपा के साथ किसी भी संभावित जुड़ाव के बारे में समय ही बताएगा। यह अब समय से पहले है।












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