UP Nikay Chunav 2023: मंत्रियों, सांसदों, विधायकों को BJP की दो टूक, परिजनों के लिए न करें टिकट की पैरवी
उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव की तैयारयों में जुटे बीजेपी के मत्रियो, सांसदों और विधायकों को तगड़ा झटका लगा है। बीजेपी संगठन ने तय किया है कि मंत्रियों, सासंदों और विधायकों के परिजनों को टिकट नहीं दिया जाएगा।

Bhartiya Janta Party: उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव का बिगुल बजने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी है। निकाय चुनाव में टिकटों की सूची आने से पहले सोमवार देर शाम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर संगठन की अहम बैठक हुई। इस बैठक में कोर कमेटी के मेंबर शामिल हुए। बीजेपी सूत्रों की माने तो बैठक में यह तय किया गया कि निकाय चुनाव में मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के परिजनों को टिकट नहीं दिया जाएगा। संगठन के फैसले से निकाय चुनाव में उम्मीद लगाए बैठे बहुत से नेताओं को निराशा हाथ लगी है।

CM आवास पर हुई बीजेपी की अहम बैठक
बीजेपी के एक पदाधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में सोमवार देर शाम उनके आवास 5, कालिदास मार्ग पर हुई भाजपा संगठन नेतृत्व व वरिष्ठ मंत्रियों की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में पार्टी के लिए अधिकतम जीत प्रतिशत सुनिश्चित करने की रणनीति पर भी चर्चा हुई। बैठक में शामिल एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि नेतृत्व ने मंत्रियों से फीडबैक लिया और उनके बहुमूल्य सुझाव दिए।

बैठक में शामिल रहे बड़े पदाधिकारी
करीब 90 मिनट तक चली बैठक में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी और महासचिव (संगठन) धर्मपाल मौजूद थे। इस अवसर पर बोलते हुए, सीएम ने कहा कि मतदाता को मोदी सरकार और राज्य सरकार द्वारा किए गए कार्यों से अवगत कराया जाना चाहिए। प्रभारी मंत्रियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भाजपा स्थानीय निकाय चुनावों में अधिक से अधिक सीटें जीते।

योग्य और जिताऊ उम्मीदवारों को ही टिकट
इस मौके पर बीजेपी के चीफ भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि जीतने योग्य प्रत्याशियों को टिकट दिलाना सुनिश्चित करने की अतिरिक्त जिम्मेदारी प्रभारी मंत्रियों की होती है। प्रभारी को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि जिन लोगों को टिकट नहीं मिल सका वे असंतुष्ट न हों और प्रयास किया जाए कि वे भी पार्टी की जीत के लिए काम करें।

अपने परिजनों की पैरवी न करें मंत्री, सांसद और विधायक
भाजपा नेतृत्व अपने बयान में स्पष्ट था कि किसी भी सांसद, विधायक और मंत्री को अपने परिजनों की पैरवी नहीं करनी चाहिए। बैठक में दो डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी मौजूद थे। जिसे सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय के लिए एक नए प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है, नेतृत्व ने यह भी तय किया कि जिलों के प्रभारी मंत्री भी अपने अधिकार क्षेत्र में पार्टी के संगठनात्मक कार्यों के लिए जिम्मेदार होंगे।

प्रभारी मंत्रियों को पकड़ाई गई है बड़ी जिम्मेदारी
मंत्रियों को निर्देश दिया गया कि उन पर न सिर्फ अपने प्रभारी जिले बल्कि अपने पैतृक जिले की भी जिम्मेदारी है। उनसे कहा गया, "सभी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पार्टी 17 नगर निगमों सहित सभी 762 शहरी स्थानीय निकायों में जीत हासिल करे।" गौरतलब है कि प्रत्येक कैबिनेट मंत्री और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री को कम से कम दो जिलों का प्रभारी बनाया गया है जबकि राज्य मंत्रियों को एक जिले का दायित्व सौंपा गया है।












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