Mulayam Singh Yadav के जाने के बाद क्या मैनपुरी में BJP खेलेगी ये बड़ा दांव ?
Samajwadi Party के संरक्षक मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) के निधन के बाद खाली हुई मैनपुरी लोकसभा सीट भाजपा और सपा के बीच सियासी जंग का मैदान बन जाएगा? मुलायम के निधन के साथ ही 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले उपचुनाव को लेकर अटकलें भी शुरू हो गई हैं। हालांकि बीजेपी (Bhartiya Janta Party) के सूत्रों की माने तो बीजेपी अब इस सीट को लेकर अपनी रणनीति तैयार करने के साथ ही अखिलेश यादव की घेरेबंदी भी करेगी। सूत्रों का दावा है कि मैनपुरी सीट से प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (PSP) के अध्यक्ष और मुलायम सिंह के छोटे भाई शिवपाल यादव ( Shivpal Yadav) लोकसभा उपचुनाव लड़ सकते हैं और बीजेपी उनका समर्थन कर सकती है। मैनपुरी से चुनाव लड़ने का फायदा भी शिवपाल को मिल सकता है। यदि वो जीते तो जसवंतनगर की सीट से बेटे आदित्य यादव को बीजेपी के सहयोग से विधानसभा भेज सकते हैं।

मैनपुरी लोकसभा सीट पर बीजेपी बढ़ा सकती है अखिलेश की टेंशन
मुलायम सिंह यादव के निधन के साथ ही मैनपुरी लोकसभा सीट भी खाली हो गई है। अगले छह महीने के भीतर चुनाव आयोग इस सीट पर चुनाव की घोषणा कर सकती है। बीजेपी के सूत्रों की माने तो बीजेपी इस सीट पर बड़ा दांव खेलने की तैयारी में जुटी हुई है। बीजेपी इस सीट पर शिवपाल यादव का समर्थन कर सकती है। इसके पीछे तर्क ये दिया जा रहा है कि शिवपाल मुलायम के हनुमान कहे जाते हैं और उनके छोटे भाई भी हैं। ऐसे शिवपाल को समर्थन देकर बीजेपी यह कहकर अपना बचाव कर सकती है कि मुलायम के बाद इस सीट के असली हकदार शिवपाल ही हैं।

शिवपाल को जिताकर 2024 से पहले केंद्र में मंत्री बना सकती है बीजेपी
सूत्रों की माने तो बीजेपी शिवपाल को अपना समर्थन देकर चुनाव जितवा सकती है। चूंकि मैनपुरी में शिवपाल का भी अपना जनाधार है और साथ में बीजेपी पिछले चुनाव में नंबर दो पर रही थी। इस सीट पर मुलायम सिंह यादव ने 2019 के चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार प्रेम सिंह शाक्य को काफी कम अंतर से ही हराया था। बीजेपी का उम्मीदवार भी इस सीट से चार लाख से ज्यादा वोट पाने में कामयाब रहा था। इस लिहाज से देखा जाए तो शिवपाल के लिए ये सीट काफी मुफीद होगी। बीजेपी के वोट के साथ ही उन्हें यादव वोट बैंक में भी मौका मिल सकता है। इस सीट से अगर शिवपाल जीत तो बीजेपी उन्हें 2024 में होने वाले आम चुनाव से पहले केंद्र में मंत्री का तोहफा देकर यादव वोट बैंक को साध सकती है। एक बार केंद्र में मंत्री बनने के बाद शिवपाल का कद अपने आप बड़ा हो जाएगा और वो यादवों में एक बड़े नेता के तौर पर स्थापित हो सकते हैं जिसका लाभ बीजेपी अखिलेश को कमजोर करने में उठाएगी।

शिवपाल को मोहरा बना सकती है बीजेपी
सपा पार्टी के संस्थापक के नुकसान से जूझ रही है, वहीं यूपी में राजनीतिक गलियारों में इस बात की संभावना बढ़ गई है कि भाजपा मैनपुरी में अखिलेश के चाचा और मुलायम के भाई शिवपाल सिंह यादव को सीट से अपना उम्मीदवार उतारने के बजाय समर्थन दे रही है। जहां भाजपा के वरिष्ठ नेता चुप्पी साधे रहे, वहीं पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि पार्टी शिवपाल को पूरे यादव गढ़ में एक बड़ा संदेश भेजने के लिए गुप्त समर्थन दे सकती है।

मैनपुरी का किला ढहाने के लिए सही अवसर की तलाश में थी बीजेपी
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "अखिलेश और उनके चाचा के बीच खटास एक खुला रहस्य है।" यूपी बीजेपी के प्रवक्ता हीरो बाजपेयी ने कहा कि राजनीति 'अवसरों का खेल' है। उन्होंने कहा, 'आलाकमान जरूरत पड़ने पर फैसला करेगा।' हालांकि, राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि मुलायम की मौत ने सपा के लिए सहानुभूति का एक बड़ा कारण पैदा कर दिया होगा, जो राज्य के अन्य हिस्सों के अलावा कोर यादव बेल्ट में अपनी स्थिति को मजबूत करने की संभावना को समझ सकता है।

आजमगढ़ और रामपुर की कहानी दोहरा सकती है बीजेपी
अखिलेश अब अपने पिता की राजनीतिक विरासत को संभालेंगे जिन्होंने पार्टी लाइन से हटकर असाधारण राजनीतिक संबंध बनाए। सपा प्रवक्ता राजीव राय ने कहा, "यह हमारे लिए निराशा की स्थिति है। मैनपुरी के मामले में क्या होगा, इसके बारे में हम कुछ नहीं कह सकते।" हालांकि, सपा सूत्रों ने कहा कि सपा की नींव को तोड़ने के उद्देश्य से भाजपा के अंदररूनी प्रयासों को विफल करने के लिए पार्टी सब कुछ करेगी। जानकारों का कहना है कि सपा के राजनीतिक गढ़ माने जाने वाले आजमगढ़ और रामपुर उपचुनाव में बीजेपी मैनपुरी में वही दोहराना चाह सकती है, जो उसने किया था.












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