MP CM Mohan Yadav: BJP के इस दांव से डर गए हैं अखिलेश यादव?, 2024 से पहले कैसे करेंगे डैमेज कंट्रोल
UP Ex CM Akhilesh Yadav: देश में अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta Party) ने Mohan Yadav को एमपी का सीएम बनाकर बड़ा दांव चला है। इस दांव से सबसे बड़ी मुश्किल यूपी के पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के सामने खड़ी हो गई है। सपा के सूत्रों की माने तो अब उनके सामने अब सबसे बड़ी चुनौती 2024 से पहले बीजेपी के इस दांव से होने वाले संभावित नुकसान को बचाना है।

सपा के एक बड़े पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर वनइंडिया हिन्दी को बताया कि बीजेपी ने मोहन यादव को सीएम बनाकर यूपी और बिहार के यादवों में एक संदेश देने का प्रयास किया है कि सिर्फ राजनीतिक घरानों के यादव ही सीएम नहीं बन सकते हैं बल्कि एक आम यादव भी किसी भी राज्य का सीएम बन सकता है। इस संदेश से यादवों में बीजेपी को लेकर एक नरम रुख बनाएगा।
सपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि, '' जाहिर तौर पर बीजेपी अब मोहन यादव को यूपी और बिहार जैसे राज्यों में घुमाने का काम करेगी। इससे बीजेपी को फायदा कितना होगा ये कहना अभी जल्दबाजी होगी लेकिन इस समाज में वो एक सकारात्मक रुख बनाने में कामयाब होती दिख रही है। बीजेपी के इस दांव से सपा के सामने कई तरह की चुनौतियां खड़ी हुई हैं जिससे शीर्ष नेतृत्व को निपटना होगा।''
सपा के रणनीतिकार ये मानकर चल रहे हैं कि मोहन यादव जैसे नेताओं का उभार सपा के लिए नुकसान दायक होगा। या एक तरह से कहें तो पार्टी के लिए इससे बुरा समय नहीं हो सकता है। मोहन यादव की ससुराल सुल्तानपुर में ही बतायी जा रही है।
सपा के सूत्रों की माने तो हिन्दुत्व और लाभार्थी वोट बैंक के बीच मोहन यादव के इस दांव ने पार्टी की चुनौती को और बढ़ा दिया है। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक पंकज कुमार यादव ने वनइंडिया हिन्दी को बताया कि, " स्थापना के बाद से ही सपा ओबीसी और मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने में जुटी हुई थी। लेकिन 2024 चुनाव से पहले बीजेपी ने मोहन यादव को सीएम बनाकर जाति आधारित राजनीति करने वालों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी करने का काम किया है।"
दरअसल, पिछले एक दशक के दौरान सपा 2014 और 2019 में दो लोकसभा चुनावों में भाजपा के विजय रथ को रोकने में विफल रही है। 2017 और 2022 में यूपी विधानसभा चुनाव भी हार गई इसके अलावा शहरी स्थानीय निकायों और दो पंचायत चुनावों में भी हार का सामना करना पड़ा था।
बीजेपी के इस नए दांव ने सपा के साथ ही INDIA गठबंधन की ओर से बनाए जा रहे जाति जनगणना मुद्दे को एक बड़ी चुनौती दे दी है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति-अन्य पिछड़ा वर्ग की 80 प्रतिशत से अधिक आबादी के बावजूद जाति जनगणना का मुद्दा सफल नहीं हो सका।
पंकज यादव कहते हैं कि,
बीजेपी का यह दांव सपा की यूएसपी पर एक बड़ा सवालिया निशान हैं। पिछले तीन दशकों से उत्तर प्रदेश के यादवों की 'सबसे पसंदीदा पसंद' रही है। मोहन यादव को मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री बनाकर बीजेपी ने हिंदी पट्टी के यादव समुदाय के सामने एक विकल्प पेश किया है। इसने ओबीसी के बीच भाजपा की साख को मजबूत करने का काम किया है। यह इस मिथक को भी तोड़ने का काम करेगी बीजेपी सवर्णों की पार्टी है।












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