अखिलेश यादव की Old Pension Scheme के दांव को Yogi सरकार इस तरह करेगी काउंटर?
राज्य के खजाने पर 29 करोड़ रुपये का बोझ डालने वाले प्रस्ताव से लगभग 10,000 कर्मचारियों को लाभ होने की संभावना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता की थी।

Old Pension Scheme in UP: लोकसभा चुनाव से पहले क्या भारतीय जनता पार्टी की यूपी सरकार ने सपा के चीफ अखिलेश यादव के उस दांव को काउंटर करने की तैयारी शुरू कर दी है जिसने बीजेपी सरकार की नीदें उड़ाकर रख दी थी। दरअसल उत्तर प्रदेश में 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को पोस्टल बैलेट में बीजेपी से ज्यादा वोट मिले थे। तब ऐसा माना गया था कि सरकारी कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन के मुद्दे को लेकर बीजेपी के सरकार के खिलाफ वोटिंग की थी। अब सरकार ने विपक्ष के उस दांव को समय रहते काटने की तैयारी शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि संविदा कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का लाभ देना इसी रणनीति का हिस्सा है।

संविदा कर्मचारियों को मिलेगा सातवें वेतन आयोग का लाभ
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने बुधवार को राज्य सरकार के विभागों में तदर्थ कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग के वेतनमान को लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। राज्य के खजाने पर 29 करोड़ रुपये का बोझ डालने वाले प्रस्ताव से लगभग 10,000 कर्मचारियों को लाभ होने की संभावना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता की। मीडियाकर्मियों को जानकारी देते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि यह निर्णय केवल उन कर्मचारियों के लिए लागू होगा जिन्हें उनके संबंधित विभागों द्वारा विज्ञापन के बाद भर्ती किया गया है।

पोस्टल बैलट में सपा ने बीजेपी को हराया था
उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को पोस्टल बैलट में भाजपा से ज्यादा वोट मिले थे। तब राजनीतिक विश्लेषकों ने ये दावा किया था कि यूपी का कर्मचारी वर्ग ने सपा के पुरानी पेंशन लागू करने वाले वादे पर ज्यादा भरोसा जताया है। पोस्टल बैलट में भाजपा गठबंधन को 1 लाख 47 हजार 407 वोट मिले थे जबकि सपा गठबंधन को 2 लाख 27 हजार 234 वोट मिले। ऐसे में करीब 80 हजार वोट सपा को ज्यादा मिले हैं।

चुनाव में कर्मचारी वर्ग ही करता है पोस्टल बैलट का इस्तेमाल
दरअसल, विधानसभा चुनाव की मतगणना में पोस्टल बैलट भी जीत का बड़ा आधार बनते रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि पोस्टल बैलट से मतदान कर्मचारी वर्ग ही करता है। चुनाव के दौरान कर्मचारी वर्ग में पुरानी पेंशन स्कीम को लेकर बड़ा क्रेज दिखाई दिया था। तब सपा ने लोगों से वादा किया था कि यूपी में सरकार बनी तो पुरानी पेंशन का लाभ कर्मचारियों को दिया जाएगा। सपा के इस दावे पर भरोसा करते हुए पोस्टल बैलट में सरकारी कर्मचारियों ने सपा को जिता दिया था। इसके बाद से ही बीजेपी के रणनीतिकार इस मुद्दे की काट ढूंढने में लगे थे।
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पुरानी पेंशन के मुद्दे को कांग्रेस भी दे रही धार
इस बीच सपा के अलावा कांग्रेस ने भी पुरानी पेंशन के मुद़दे को धार देना शुरू कर दिया था। कांग्रेस ने तो कई राज्यों में पुरानी पेंशन को बहाल करने का काम किया है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस की सरकारों ने पुरानी पेंशन का लाभ सरकारी कर्मचारियों को दे दिया है। इसको लेकर कांग्रेस ने अब बीजेपी पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था। ऐसा माना जा रहा था कि लोकसभा चुनाव में पुरानी पेंशन का मुद्दा एक बड़ा मुद्दा बनेगा। कांग्रेस ने हिमाचल के चुनाव में भी वादा किया था कि सरकार बनी तो पुरानी पेंशन लागू किया जाएगा और जल्द ही कांग्रेस की सरकार वहां इस व्यवस्था को लागू कर सकती है।

लोकसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बन सकती है पुरानी पेंशन
विधानसभा चुनाव के दौरान जिस तरह से कांग्रेस और सपा ने पुरानी पेंशन को एक मुद्दा बनाने की कोशिश की है उससे बीजेपी को काफी नुकसान हुआ था। बीजेपी ने इस मामले से निपटने का हर संभव प्रयास किया था। बीजेपी को भी पता है कि समय रहते कर्मचारयों के इस बड़े मुद्दे को काटने की कोशिश नहीं की गई तो ये चुनाव में काफी नुकसान पहुंचा सकता है। कर्मचारियों को साधने के लिए अब सरकार ने संविदा कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ देने का ऐलान किया है। हालांकि कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सरकार की यह पहल स्वागत योग्य है लेकिन कर्मचारी पुरानी पेंशन की अपनी मांग पर अभी भी कायम हैं।











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