5000 से कम मार्जिन से जीती हुई सीटों पर भी रणनीति बनाने में जुटी BJP, जानिए क्या है प्लानिंग
लखनऊ, 26 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने हैं और फिलहाल बीजेपी पूरी तरह से चुनावी मोड में नजर आ रही है। बीजेपी के सूत्रों की माने तो बीजेपी ने हारी हुई सीटों के साथ ही कम मार्जिन से जीती हुई सीटों पर भी फोकस करने की कवायद शुरू कर दी है। एक तरफ जहां हारी हुई सीटों पर एक एक कर विरोधी दलों के अहम नेताओं को तोड़कर अपनी स्थिति बनाने में जुटी है वहीं दूसरी ओर कम मार्जिन वाली सीटों पर भी नए सिरे से अपनी रणनीति को अंजाम देना शुरू कर दिया है।

दरअसल पार्टी ने 2017 के चुनावों में 403 सीटों वाले सदन में 300 का आंकड़ा पार किया था, करीब 40% वोट जीते थे, लेकिन पिछली बार 5,000 से कम वोटों के अंतर वाली 20 सीटें इस बार भी एक चुनौती हो सकती हैं। भाजपा उन सीटों के लिए अपनी रणनीति तैयार कर रही है जिन पर वो पिछले बार कम मार्जिन से चुनाव जीती थी। दूसरी ओर बीजेपी दूसरे दलों के नेताओं और विधायकों को पार्टी से जोड़ने में लगी हुई है। कई एमएलसी और वर्तमान विधायक पार्टी का दामन थाम चुके हैं। आने वाले दिनों में कई और बड़े नाम बीजेपी में शामिल हो सकते हैं जिसकी तैयारी में बीजेपी जुटी हुई है।
पिछले चुनाव में 20 सीटों पर जीत का मार्जिन काफी कम रहा
दरअसल , 2017 में बीजेपी ने 312 सीटें जीती थीं. इनमें से 20 सीटों में अंतर कम था, जबकि समाजवादी पार्टी मोदी लहर के बावजूद दूसरे नंबर पर थी. ये सीटें अच्छी तरह से तय कर सकती हैं कि बीजेपी लगातार दूसरी बार 300 का आंकड़ा पार करने में सक्षम है या नहीं। 2017 में इनमें से कुछ महत्वपूर्ण सीटों पर बीजेपी काफी कम अंतर से जीती थी जिसमें श्रावस्ती - 445 वोट, पट्टी - 1,473 वोट, भदोही - 1,102 वोट, फरेंदा - 2,354 वोट, टांडा - 1,725 वोट, भरथना - 1,968 वोट, आंवला - 3,546 वोट, महोली - 3,717 वोट, बिधूना - 3,910 वोट ,धौरहरा - 3,353 वोट, पटियाली - 3,771 वोट, गोरखपुर ग्रामीण - 4410 वोट, नकुर - 4,057 जैसी सीटें शामिल हैं।
पश्चिम में रालोद-सपा गठबंधन के असर का आंकलन कर रही बीजेपी
सत्तारूढ़ दल के लिए एक और चिंताजनक बात यह है कि कुछ सीटों पर, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) को मिले कुल वोट, जिन्होंने 2022 के चुनावों में भागीदारी की है, या तो भाजपा के आंकड़े से अधिक हैं या अंतर को और कम करते हैं। इन सीटों में सिवालखास, किठौर, बड़ौत और बलदेव शामिल हैं। अब बीजेपी के सूत्र ये बता रहे हैं कि पार्टी इस रणनीति पर काम कर रही है कि ऐसी कौन सी सीटें हैं जहां पर सपा और रालोद के उम्मीदवारों के मतों का अंतर बीजेपी से ज्यादा हो रहा है।
बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा कि,
"हर चुनाव के अपने मुद्दे होते हैं और हर बार स्थिति अलग होती है। 2017 में, हमने लोगों को समाजवादी पार्टी सरकार की कमियों और विफलताओं के बारे में बताया। हमारी पार्टी ने संकल्प पत्र भी जारी किया था। आज हमने उस संकल्प पत्र में किए वादों को पूरा किया है। 2017 के मुकाबले बीजेपी का संगठन भी मजबूत हुआ है। 2017 के चुनाव से पहले हमारे पास 1.87 करोड़ भाजपा सदस्य थे, लेकिन आज हमारे पास 2.5 करोड़ सदस्य हैं। अब हम 1.5 करोड़ नए सदस्यों की भर्ती करने की कोशिश कर रहे हैं। हम उन सीटों के लिए एक विशेष रणनीति पर भी काम कर रहे हैं जहां मार्जिन कम था और जिन्हें हम हार गए थे और इसलिए हमें विश्वास है कि हम आगामी चुनाव प्रचंड बहुमत से जीतेंगे।''












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