मोदी का चेहरा और अमित शाह का दिमाग, यूपी में ऐसे हुआ कमल का कमाल
सियासी तौर पर बेहद अहम माने जाने वाले उत्तर प्रदेश में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिलता दिख रहा है। बीजेपी की जीत का पूरा गणित भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बिठाया।
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की लहर देखने को मिल रही है। बीजेपी ने यूपी में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो-तिहाई से ज्यादा सीटें हासिल किया है। यूपी विधानसभा चुनाव में जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी ने कमाल किया है, इसका पूरा श्रेय बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को जाता है। जिन्होंने बीजेपी के 'चाणक्य' की तरह भारतीय जनता पार्टी की रणनीति को अमलीजामा पहनाया। 2014 की तरह ही उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से अमित शाह की सोशल इंजीनियरिंग ने असर दिखाया। प्रदेश के लगभग सभी बड़े जिलों में बीजेपी का जलवा दिखाई दिया।
यूपी में फिर चला अमित शाह का जादू
सियासी तौर पर बेहद अहम माने जाने वाले उत्तर प्रदेश में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला है। बीजेपी की जीत का पूरा गणित भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बिठाया। उन्होंने जिस तरह से यूपी में हिंदुत्व के साथ-साथ सोशल इंजीनियरिंग को साधने की कोशिश की, उसने वहां के वोटरों पर असर दिखाया। बीजेपी के 'चाणक्य' की तरह ही उन्होंने पिछड़े, सवर्णों और मुस्लिम विरोधी वोटों को कैश करने की कोशिश की। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने यूपी के लिए बेहद खास मास्टर प्लान तैयार किया। देखिए कैसे भाजपा के चाणक्य अमित शाह ने यूपी में जीत के लिए किन-किन रणनीतियों पर खास ध्यान दिया...

ऐसे साधा जातीय समीकरण
यूपी जीतने के लिए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने जातीय गणित को साधने की कवायद की। यूपी में जाति सबसे अहम फैक्टर था, जिसे अमित शाह ने अपनी रणनीति में शामिल किया। यूपी में करीब 30 फीसदी वोटर अति पिछड़ी जाति के हैं। इनमें ईबीसी के अंतर्गत कुर्मी, लोध और कोइरी वोटर भी शामिल हैं। अब तक इन वोटरों पर सपा और बसपा का ही कब्जा देखा गया है। हालांकि इस बार बीजेपी ने ऐसा गणित बिठाया कि सपा-बसपा को करारा झटका लगा। पार्टी ने उनके वोटों पर तो सेंध लगाई ही साथ ही लोध वोटरों को भी अपने साथ जोड़ लिया, जो एक समय कल्याण सिंह के छिटकने की वजह से बीजेपी से खिसक गया था। इस बार उमा भारती की वजह से इस वर्ग का समर्थन बीजेपी को मिला।

केशव प्रसाद मौर्य पर लगाया दांव
यूपी फतह के लिए अमित शाह ने काफी पहले से ही गणित बिठानी शुरू कर दी थी। उनकी पूरी नजर पिछड़ी जाति के वोटरों पर टिकी थी। यही वजह है कि प्रदेश अध्यक्ष जैसा अहम पद केशव प्रसाद मौर्य का दिया गया। पार्टी को उम्मीद थी कि इससे कोइरी वोटर पार्टी से जुड़ेंगे। ऐसा ही हाल नतीजों में नजर आ रहा है। कुर्मी वोटर भी बीजेपी के समर्थन में दिखाई दिया। जिससे बीजेपी को इतनी बड़ी जीत मिली है।

अगणी जातियों को बीजेपी से ऐसे जोड़ा
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पिछड़ी जातियों के साथ-साथ अगड़ी जातियों को भी अपने साथ जोड़ने की कोशिश की। यूपी में करीब 24 फीसदी वोटर अगड़ी जातियों के हैं। माना यही जा रहा था कि इस बार के चुनाव में ये वर्ग सीधे तौर पर बीजेपी से जुड़ेगा, नतीजें इस बात की तस्दीक कर रहे हैं। माना यही जा रहा है कि यूपी में सेक्युलर वोट में बंटवारा हुआ, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला है।

बीजेपी के 'चाणक्य' ने ऐसा बनाया मास्टर प्लान
बीजेपी के 'चाणक्य' अमित शाह ने यूपी चुनाव को साधने के लिए दलित फैक्टर को साधने की कोशिश की। वो दलित परिवारों के घर गए, उनके साथ खाना खाया। उनके साथ रात बिताई। इन सभी फैक्टर ने काम किया। अमित शाह ने सोशल इंजीनियरिंग के जरिए जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखा। यूपी में करीब 35 फीसदी वोटर यादव, जाटव और मुस्लिम हैं। बीजेपी को ऐसी संभावना थी कि इन वोटरों को साधने में उसे कामयाबी मिलने के आसार कम ही हैं, इसीलिए पार्टी ने बाकी 65 फीसदी वोटरों को साधने की कोशिश की। इसका असर भी दिख रहा है। प्रदेश में बीजेपी को करीब 40 फीसदी से ज्यादा का वोट शेयर मिला है।

यूपी चुनाव में मोदी फैक्टर का दिखा असर
यूपी चुनाव में एक बार फिर से मोदी फैक्टर ने असर दिखाया है। ये अमित शाह की ही रणनीति थी कि यूपी में उन्होंने सीएम कैंडिडेट घोषित नहीं करके नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ा। मोदी सरकार के नोटबंदी समेत लिए गए अहम फैसलों को आधार बनाया गया। जनता को बताने की कोशिश की गई कि आखिर कैसे कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्र सरकार ने काम किया। प्रधानमंत्री मोदी को ही चुनाव का चेहरा बनाया गया। पीएम मोदी ने जमकर रैलियां की, रोड-शो किए। इसका असर भी जनता पर हुआ, ये चुनाव के नतीजों में नजर आ रहा है।












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