Bengal Election 2026: लखनऊ से WB लौट रहे सारे बंगाली, चुनावी समंदर में 'मछली' का बड़ा खेल

Bengal Election 2026 Fish Politics: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रहने वाले बंगाली समुदाय के लोग इन दिनों सामान बांधकर पश्चिम बंगाल की ओर रवाना हो रहे हैं। वजह है- 23 और 29 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में वोट डालना। लेकिन इस बार उनकी यात्रा सिर्फ मताधिकार का नहीं, बल्कि एक बड़े सांस्कृतिक-चुनावी मुद्दे का हिस्सा बन गई है 'मछली बनाम शाकाहार'।

लखनऊ के मशहूर भोजनालय में कबाब बनाने वाले शफीकुल और हरि सभा मंदिर के पुजारी तारक नाथ भट्टाचार्य दोनों बंगाल पहुंच चुके हैं। दोनों के बीच दो चीजें कॉमन हैं, बंगाल उनका गृह राज्य है और दोनों 'माछ-भात' के बिना अपना भोजन अधूरा मानते हैं। कैसे बंगाल के इस हाई-वोल्टेज चुनाव में मछली अब सिर्फ थाली का व्यंजन नहीं, बल्कि राजनीतिक हथियार बन गई है। आइए समझते हैं...

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'माछ भात-ए बंगाली': TMC vs BJP का नया प्लैंक

पश्चिम बंगाल मुख्य रूप से मांसाहारी समाज है। यहां मछली-चावल रोजमर्रा का भोजन है। लेकिन चुनावी मौसम में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया। TMC का आरोप है कि अगर BJP सत्ता में आई तो मछली, मांस और अंडे पर पाबंदी लगा देगी।

इस आरोप की धार कुंद करने के लिए BJP ने अपने नेताओं को सार्वजनिक रूप से मछली और मांस खाते दिखाया। खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 21 अप्रैल को कहा कि अगर प्रधानमंत्री मछली खाना चाहते हैं, तो मैं खुद उनके लिए पकाऊंगी।

लखनऊ के पुजारी तारक नाथ भट्टाचार्य (45 वर्ष) ने PTI से कहा कि माछ भात-ए बंगाली। बंगाली घरों में मछली-चावल मुख्य भोजन है। वे पश्चिम मेदिनीपुर के डेबरा विधानसभा क्षेत्र में वोट डालने गए हैं, जहां 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान है। भट्टाचार्य ने बताया कि 18 साल की उम्र से हर चुनाव में मैं बंगाल जाता हूं। इस बार मुकाबला बहुत कड़ा है। लेकिन 'शाकाहारी बनाम मांसाहारी' वाली बहस मुझे हैरान कर रही है।

लखनऊ से बंगाल तक: रसोइए और पुजारी क्यों लौट रहे हैं?

लखनऊ के मशहूर भोजनालय में कबाब शेफ शफीकुल (मालदा जिले के चंचल विधानसभा क्षेत्र के मतदाता) ने बताया कि लखनऊ और UP के कई रेस्टोरेंट में बंगाल के रसोइए, हेल्पर और वेटर काम करते हैं। इस बार सभी पार्टियां वोटरों को लाने के लिए हर कोशिश कर रही हैं। शफीकुल के अनुसार, खाने की आदतें भावनात्मक मुद्दा बन गई हैं। जब मुकाबला कड़ा होता है, तो स्विंग वोटर इन्हीं मुद्दों से प्रभावित होते हैं।

लखनऊ के रबींद्रपल्ली में रहने वाले पुजारी सुब्रतो चक्रवर्ती बीरभूम जिले की नानूर सीट पर वोटर हैं। उन्होंने कहा कि मैं वोट डालने घर जा रहा हूं। मेरा भाई सुप्रियो और भाभी तुली भी पहुंच रहे हैं। लालबाग इलाके के रेस्टोरेंट कर्मचारी नजरुल करीम ने दावा किया कि मालदा से लखनऊ आए करीब 50 लोग वोट डालने बंगाल पहुंच चुके हैं। इनमें ताजिमुल हक और अनारुल हक भी शामिल हैं।

क्यों बनी मछली चुनावी मुद्दा?

  • 2024 लोकसभा चुनाव में BJP को 'बाहरी' पार्टी बताया गया था।
  • इस बार TMC ने इसे और आगे बढ़ाया, BJP आएगी तो मछली-मांस बंद।
  • BJP ने जवाब में नेताओं को मछली खाते दिखाकर काउंटर किया।

शफीकुल ने कहा कि पहले कभी खाने की आदत चुनाव का मुद्दा नहीं बनी थी। इस बार जरूर कोई वजह है। उन्होंने वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision (SIR) का भी जिक्र किया, जिसे लेकर बंगाल में पहले विवाद हुआ था।

West Bengal Election 2026: बंगाल चुनाव के मतदान दो फेज में

पश्चिम बंगाल विधानसभा के 294 सीटों वाले चुनाव दो चरणों (23 और 29 अप्रैल) में होंगे। नतीजे 4 मई को आएंगे। पहले चरण में करीब 3.60 करोड़ मतदाता वोट डालेंगे। इस बार के मुद्दे सिर्फ मछली तक सीमित नहीं, सीमा घुसपैठ, समान नागरिक संहिता (UCC) और विवादित वोटर लिस्ट भी गरमा रहे हैं। लेकिन 'मछली' ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं क्योंकि यह बंगाली पहचान से सीधा जुड़ा है।

खाने की थाली से निकला राजनीतिक स्वाद

लखनऊ से बंगाल लौट रहे बंगाली रसोइए, पुजारी और मजदूर इस बार सिर्फ वोट देने नहीं जा रहे, वे अपनी सांस्कृतिक पहचान को बचाने का संदेश भी दे रहे हैं। 'माछ-भात' अब सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि बंगाल की अस्मिता का प्रतीक बन गया है। TMC इसे BJP के खिलाफ हथियार बना रही है, तो BJP इसे 'संस्कृति बचाओ' का मुद्दा बता रही है। 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान शुरू होगा। देखना होगा कि मछली की इस थाली वाली बहस स्विंग वोटर को किस तरफ ले जाती है।

(PTI इनपुट के साथ)

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