UP चुनाव से पहले अखिलेश और शिवपाल में नहीं कम हो रही दूरियां, सपा को चुकानी पड़ सकती है कीमत

लखनऊ, 27 अगस्त: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मुलायम परिवार एकजुट होगा या फिर अखिलेश और शिवपाल की राहें अलग अलग ही रहेंगी। शिवपाल यदि अकेले चुनाव लड़ेंगे तो वो अखिलेश को कितना नुकसान पहुंचा पाएंगे। हालांकि शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी (सपा) गठबंधन को लेकर कुछ भी बोलने को तैया नहीं हैं। राजनितिक विश्लेषकों की माने तो शिवपाल के साथ सपा का गठबंधन ही अखिलेश को नुकसान से बचा सकता है। शिवपाल और अखिलेश यादव की पार्टी के परम्परागत वोटर एक ही है और यदि दोनों में एक बार फिर यदि बिखराव हुआ तो सपा का भारी नुकसान होना तय है। लिहाजा इसीलिए अखिलेश भी अभी इस मामले ज्यादा कुछ नहीं बोल रहे हैं।

शिवपाल

उत्तर प्रदेश में अखिलेश और शिवपाल के अलग होने के बाद दोनों ही पार्टियों को काफी नुकसान पहुंचा था। अखिलेश से अलग होने के बाद शिवपाल ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के नाम से नई पार्टी बना ली थी। हालाकि उस समय पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने शिवपाल को ऐसा करने से मना किया था। लेकिन शिवपाल सपा के भीतर हो रही अपनी बेइज्जती से काफी नाराज थे। शिवपाल के अलग होने का नुकसान अखिलेश को पिछले विधानसभा चुनाव में भी उठाना पड़ा था।

शिवपाल यादव से यह पूछे जाने पर कि अगला चुनाव क्या वह अखिलेश के साथ मिलकर लड़ेंगे, इस सवाल के जवाब में उन्होंने केवल इतना कहा कि अभी इसका समय नहीं आया है। इसके बारे में जब भी उचित समय होगा जानकारी दी जाएगी। हालांकि इससे पहले भी शिवपाल कई मंचों पर कह चुके हैं कि वह अखिलेश यादव से मिलने का समय कई बार मांग चुके हैं लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आया है।

विलय और गठबंधन को लेकर फंसा है पेंच
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के मुखिया शिवपाल और सपा केचीफ अखिलेश के बीच इस बात को लेकर पेंच फंसा है कि प्रसपा का विलय सपा में या फिर गठबंधन के साथ चुनाव लड़ा जाए। इस सवाल के जवाब में अखिलेश ने एक बार कहा था कि जसवंत नगर सीट से सपा चुनाव लड़ेगी। यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव में सभी छोटे दलों को साथ लेकर गठबंधन किया जाएगा। उनके साथ भी बातचीत हो सकती है। हालांकि शिवपाल के अलग होने के बाद सपा को लोकसभा चुनाव में इसका खामियाजा उठाना पड़ा था। अखिलेश भी इस बात को बखूबी जानते हैं कि शिवपाल को साथ लाने में ही ज्यादा फायदा है वरना यूपी की सत्ता मिलना बड़ा मुश्किल है।

अखिलेश यादव

2020 में सैफई में लगे थे चाचा-भतीजा जिंदाबाद के नारे
2020 में मुलायम सिंह और अखिलेश (और उनकी पत्नी और पूर्व सांसद डिंपल) की मौजूदगी में सैफई में होली मनाने के लिए पूरा परिवार एक साथ आया था। लॉन में एक मंच बनाया गया था। मंच पर, शिवपाल ने मुलायम सिंह के पैर छूकर उनका आशीर्वाद मांगा था, जबकि अखिलेश ने शिवपाल के साथ भी ऐसा ही किया था, जिसमें पार्टी कार्यकर्ताओं को "चाचा-भतीजा जिंदाबाद" के नारे लगाने शुरू कर दिए थे। वो तब तक नारेबाजी करते रहे जब तक कि अखिलेश ने उनसे रुकने का अनुरोध नहीं किया।

दोनों पार्टियों के पारंपरिक मतदताओं में होगा विभाजन
वर्ष 2022 में यदि एसपी और पीएसपीएल के अलग-अलग चुनाव लड़ने से उनके पारंपरिक मतदाता आधार का बंटना तय है। के के सी डिग्री कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रोफेसर राम शंकर मिश्र कहते हैं कि,

''2017 के विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में यादव वोट बैंक के बंटवारे का खामियाजा सपा को भुगतना पड़ा। अखिलेश और शिवपाल के बीच जिस तरह के मतभेद दिखाई दे रहे हैं, वह 2022 से पहले न केवल सपा और पीएसपीएल के बीच चुनावी समन्वय को प्रभावित करेगा, बल्कि यादव मतदाताओं के बीच एकता स्थापित करने में भी विफल रहेगा। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा सपा को भुगतना पड़ेगा।''

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