मतगणना से पहले EVM को लेकर चढ़ा UP का सियासी पारा, जानिये अखिलेश ने क्यों दी लोकतंत्र बचाने की दुहाई
लखनऊ, 9 मार्च: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के नतीजे 10 मार्च को आने वाले हैं। इस बीच राज्य में EVM को लेकर फिर से सियासत शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और सुभास्पा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर के वाराणसी में ईवीएम से लदी गाड़ी पकड़ने के दावों के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने वाराणसी के पहाड़िया मंडी इलाके में एक ईवीएम स्ट्रांग रूम के बाहर धरना दिया। वहीं, वाराणसी के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने मामले में सफाई दी है लेकिन मतगणना से पहले ईवीएम को लेकर मचे घमासान यूपी का राजनीतिक पारा जरूर बढ़ा दिया है।

देर रात तक काशी में चला सियासी घमासान
वाराणसी में जैसे ही इवीएम पकड़े जाने की बात सामने आई वहां सपा और सुभासपा के कार्यकर्ता एकत्र हो गए। हजारों कार्यकर्ता कई घंटे तक नारेबाजी करते रहे जिसके बाद डीएम कौशल राज शर्मा को खुद ही लोगों को समझाने के लिए बाहर आना पड़ा। दोनों दलों के कार्यकर्ताओं का आरोप था कि शहर दक्षिणी, रोहनिया और सेवापुरी में बीजेपी हार रही है इसलिए वहां की ईवीएम मशीनों को बदला जा रहा है। इसकी खबर लखनऊ पहुंचते ही अखिलेश यादव भी सक्रिय हो गए। आनन फानन में उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस कर आरोप लगाया कि ये सब मतगणना में धांधली कराने के लिए किया जा रहा है। बाद में सपा- सुभासपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचल आयोग में ज्ञापन देकर पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

किसान आंदोलन की तरह लोकतंत्र बचाओ आंदोलन की जरूरत
इस घटना के बाद अखिलेश ने ट्वीट कर लिखा कि वाराणसी में ईवीएम के फंसने की खबर यूपी की हर सभा को सतर्क रहने का संदेश दे रही है। मतगणना में धांधली की कोशिश को विफल करने के लिए सपा-गठबंधन के सभी प्रत्याशी और समर्थक कैमरे के साथ तैयार रहें. लोकतंत्र और भविष्य की रक्षा के लिए वोटों की गिनती में जवान बने सिपाही। अखिलेश ने एक अन्य ट्वीट में लिखा कि आज से हर युवा, हर मतदाता मतगणना केंद्र को मजबूत करके अगले 3 दिन तक वोट की रक्षा करे और ढोल-नगाड़ों से आजादी के नारे गाएं। किसानों की तरह उनके लिए भी लोकतंत्र के लंगर लगाए जाएंगे और दुनिया देखेगी कि लोकतंत्र की रक्षा कैसे होती है। राजनीति बाहुबल के आगे जनशक्ति नहीं झुकेगी।

"ईवीएम मशीनें रक्षा बलों के साथ क्यों नहीं जा रही थीं"
इससे पहले, अखिलेश यादव ने कहा, "एग्जिट पोल यह धारणा बनाना चाहते हैं कि भाजपा जीत रही है। यह लोकतंत्र का आखिरी चुनाव है। बिना उम्मीदवारों को बताए ईवीएम ले जाया जा रहा है. हर जगह ईवीएम पकड़ी जा रही है, हमने वोट दिया है, इसलिए अब हमें वोट बचाना है। यह लोकतंत्र की आखिरी लड़ाई है। अगर अभी बदलाव नहीं आया तो लोगों को क्रांति करनी पड़ेगी। अखिलेश यादव ने कहा, क्या कारण है कि बिना सुरक्षा के ईवीएम मशीनों को ले जाया जा रहा है। आप उम्मीदवार की जानकारी के बिना ईवीएम को एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं ले जा सकते। आखिर सुरक्षाबलों के साथ ईवीएम मशीनें क्यों नहीं जा रही थीं। यह वोटों की चोरी नहीं तो और क्या है? ईवीएम मशीनें पकड़ी गई हैं। अब अधिकारी कोई न कोई बहाना बनाएंगे कि हम इस वजह से ईवीएम ले जा रहे थे।

चुनाव आयोग ने सभी आरोपों को किया खारिज
उधर, वाराणसी के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा का कहना है कि कल वाराणसी के मतगणना कर्मियों का एक कॉलेज में प्रशिक्षण है। उसके लिए 20 ईवीएम मशीनें ली जा रही थीं। उसे कुछ लोगों ने एक छोटी गाड़ी में रोक लिया। उन लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी कि ये ईवीएम मशीनें हैं या नहीं। हालांकि देर रात तक चले सियासी ड्रामे के बाद चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि जो मशीनें गाड़ी में रखी गईं थी वह ट्रेनिंग के लिए ले जाई जा रहीं थीं। उनका स्ट्रांग रूम में रखी मशीनों से कोई लेना देना नहीं है।












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