'लंकेटिंग' के नाम पर BHU को बदनाम करने वालों, पहले इसे पढ़ लो
बीते दो दिनों से मीडिया में बीएचयू को लेकर एक खबर चल रही है जिसमें ये दावा किया गया है कि वहां पर छात्रों के लिए छात्राओं के साथ छेड़खानी करना एक आम बात है और इसके लिए उन्होंने एक खास शब्द 'लंकेटिंग' इजाद कर रखा है। इस खबर को जब मैंने पढ़ा तो हैरान रह गया। बीएचयू में मैंने अपने जीवन के दो सबसे बेहतरीन साल गुजारे हैं। इन दो सालों में लंकेटिंग हमारी रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा था लेकिन इसका मतलब वो कभी नहीं था जो मीडिया में बताया गया है। बीएचयू का पूर्व छात्र होने के नाते मैं ये दावे के साथ कह सकता हूं कि लंकेटिंग को लेकर मीडिया में चल रही खबरें पूरी तरह से झूठी और मनगढ़ंत है।

तो क्या है लंकेटिंग?
दरअसल, बीएचयू मुख्यद्वार के ठीक बाहर एक मार्केट है जिसे लंका मार्केट के नाम से जाना जाता है। चाय पीने से लेकर किताब खरीदने तक, बीएचयू के छात्र इसी लंका मार्केट में आते है जिसे वो लंकेटिंग कहते हैं। लंकेटिंग यानी कि बीएचयू हॉस्टल से निकलकर लंका मार्केट जाना। लंका जाना यहां के छात्रों के लिए किसी पिकनिक स्पॉट से कम नहीं है। इस लंकेटिंग में यादव की चाय पीकर दोस्तों के संग गप्पेबाजी, पहलवान की लस्सी, चाची का समोसा, बीबीसी की थाली, एसबीआई फुटपाथ की लाइब्रेरी, केशव का बनारसी पान, रविदास गेट पर सोडा शॉप, रविवार को मेस बंद होने पर हिंदुस्तान का खाना समेत और भी कई चीजें शामिल हैं। यहां तक कि रात में दो बजे भी, जब लड़कियां बीएचयू हॉस्टल में कैद होती है, छात्र आपको यादव जी की दुकान पर चाय की चुस्कियों के साथ लंकेटिंग करते हुए दिख जाएंगे।

लड़कियां भी करती हैं लंकेटिंग
जी, लड़कियां भी लंकेटिंग करती हैं। लंकेटिंग शब्द गर्ल्स हॉस्टल में भी उतना ही प्रचलित है जितना की लड़कों के हॉस्टल में क्योंकि वे भी लड़कों की तरह अपनी रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी चीजों को खरीदने इसी मार्केट में आती हैं। और ये गली के आखरी कोने में रात के घने अंधियारे में बसा मार्केट नहीं है। लंका मार्केट बनारस के सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाले इलाकों में से एक हैं। यहां आपको छात्र और छात्राएं बेलौस बेपरवाह अंदाज में टहलते हुए दिखाई देंगे। मैं अगर खुद की बात करूं तो मेरी गर्लफ्रेंड, बीएचयू में लड़कियों के लिए बने त्रिवेणी कैंपस के कावेरी हॉस्टल में रहती थी। हम दोनों अक्सर शाम में दोस्तों से नजरें बचाकर लंकेटिंग करने आते थे जहां हम हाथों में हाथ डालकर टहलते थे। बाद में हम दोनों के लिए लंकेटिंग का अर्थ थोड़ा व्यापक हो गया और हम लंकेटिंग के नाम पर संकटमोचन मंदिर के लड्डू खाने और अस्सी घाट पर गंगा आरती तक देखने चले जाते थे। और ये सिर्फ हमारी ही नहीं बल्कि बीएचयू में पढ़ने वाले हजारों छात्र-छात्राओं की कहानी है।

तो फिर क्यों आई ऐसी खबरें?
बीएचयू हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के लिए लंकेटिंग एक भावना है जिससे उनकी तमाम यादें जुड़ी हैं। ऐसे में लंकेटिंग को मीडिया में छेड़खानी के पर्यायवाची के रूप में देखना एक दुखद एहसास था। इस खबर को मनगढ़त तरीके से मसाला बनाकर पेश किया गया था। यह कुछ ऐसा ही था जैसे जेएनयू प्रकरण सामने आने के बाद परिसर के डस्टबिनों से भारी मात्रा में कंडोम बरामद होने की खबर आई थी। इन दोनों खबरों के पीछे एक ही मंशा थी, संस्थान की छवि को बदनाम करना। दरअसल, मीडिया में अब एक ऐसा धड़ा आ गया है जो हर मुद्दे पर अपनी एक राय लेकर चलत है। वो पहले से ही सोच लेता है कि उसे क्या दिखाना है। उसे जो दिखाना होता है वो वही दिखाता है और अगर उसे उसकी मनमुताबिक खबरें नहीं मिलती तो वह गढ़ लेता है जैसे इस लंकेटिंग वाली खबर के साथ हुआ।

तो क्या BHU में छेड़छाड़ नहीं होती?
बिल्कुल होती हैं। इस तथ्य को नकारना सत्य को नकारना होगा। लेकिन जैसा कि कुछ खबरों में लिखा जा रहा है कि वहां पर लड़कियों के साथ छेड़खानी करना आम बात है ये बिल्कुल गलत हैं। हां छेड़छाड़ की घटनाओं पर वहां प्रशासन द्वारा कार्रवाई न करना, ये जरूर आम बात है। वहां प्रशासन कार्रवाई के नाम पर छात्राओं पर बंदिशें थोप कर इतिश्री कर लेता है। आप इसे अपनी घर-पड़ोस में हुई किसी छेड़छाड़ की घटना से समझ सकते हैं जहां लड़की जब घर में छेड़छाड़ की शिकायत करती है तो उसके मां-बाप लड़के को डांटने की जगह उसे ही घर से निकलने से मना कर देते हैं। बीएचयू प्रशासन भी इसी सोच के साथ चलता है। वह कार्रवाई के नाम पर लड़कियों पर बंदिशें थोपने में यकीन करता है। बीएचयू में लड़कियों का हुआ विरोध प्रदर्शन, छेड़छाड़ की घटना से ज्यादा इसी सोच के खिलाफ प्रदर्शन था जहां पीड़िता से सुरक्षा गार्ड कहता है कि 'तुम 6 बजे के बाद बाहर निकली ही क्यों?'। अगर हम सही में चाहते हैं कि इस मामले में लड़कियों के साथ इंसाफ हो तो हमें प्रशासन की इसी सोच पर हमला करना होगा न कि मनगढ़त खबरें बनाकर देश की एक प्रतिष्ठित संस्थान की छवि को धूमिल करना।












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