बरेली: पीस पार्टी की कैंडिडेट राबिया के आने से कैंट में मुकाबला हुआ दिलचस्प
पीस पार्टी की कैंट उम्मीदवार राबिया अख्तर अपने समर्थकों के साथ पहुंची और नामांकन करवाया। लेकिन हिन्दू कैंडिडेट नामांकन करवाने के लिए नहीं पहुंचे।
बरेली। बरेली जिले में दिन मंगलवार होने के चलते कई पार्टियों के उम्मीदवारों ने नामांकन नहीं करवाया। मंगलवार सुबह से कलक्ट्रेट परिसर उम्मीदवारों के इंतज़ार में सूना पड़ा रहा। दोपहर करीब एक बजे के आसपास पीस पार्टी की कैंट उम्मीदवार राबिया अख्तर अपने समर्थकों के साथ पहुंची और नामांकन करवाया। लेकिन हिन्दू कैंडिडेट नामांकन करवाने के लिए नहीं पहुंचे। मीडिया से जुड़े लोग तब कयास लगाने लगे कि कैंडिडेट ज्योतिषाचार्य की कही बातों पर विश्वास कर रहे और उनकी सलाह पर मुहूर्त देखकर अपना नामांकन करा रहे है। ये भी पढ़ें: बरेली में कांग्रेस ने उतारे अपने उम्मीदवार, जानिए उनकी राजनीतिक कुंडली

आंवला विधानसभा, फरीदपुर विधानसभा के साथ अन्य विधानसभाओं के उम्मीदवार भी नामांकन करवाने के लिए नहीं पहुंचे। बताया जा रहा है कि पीस पार्टी की कैंडिडेट राबिया के आने से कैंट में मुकाबला दिलचस्प हो गया है। अब इस सीट पर दो मुस्लिम उम्मीदवार के बीच मुस्लिम वोटरों को अपनी और रिझाने की कोशिश होगी। बसपा से राजेन्द्र सिंह अपना नामांकन दाखिल कर चुके हैं। बता दें कि इस सीट पर मुस्लिम और पंडित वोट, वैश्य वोट प्रत्याशी की जीत तय करते हैं। वहीं, बसपा प्रत्याशी अपनी सीधी टक्कर भाजपा के राजेश अग्रवाल से मानते हैं।
कैंट सीट -राजेन्द्र सिंह (बीएसपी)
खूबियां: राजेन्द्र सिंह व्यापार मंडल के अध्यक्ष हैं। राजेन्द्र की पकड़ व्यापारियों के साथ-साथ जनता पर भी है। राजेन्द्र सिंह का टिकट शुरू में हो जाने के कारण राजेन्द्र को पूरी तैयारी करने का मौका मिल गया था।
कमियां: राजेन्द्र सिंह ने भाजपा से अलग होकर बसपा का दामन थामा है। इस कारण लोग नाराज़ है। वहीं, आज भी व्यापारी वोट भाजपा से जुड़ा हुआ है।
कैंट सीट- राबिया (पीस पार्टी)

खूबियां: राबिया अच्छा बोलती हैं और उन्हें मुस्लिम वोटों का सहयोग मिलता दिख रहा है। वहीं, वे पैसे से संपन्न उम्मीदवार हैं।
खामिंया: राबिया पर सट्टे का कारोबार चलाने का आरोप है। राबिया की पार्टी भी एक नई पार्टी है। ये भी पढे़ं: शाहजहांपुर: भाजपा नेता सुरेश कुमार खन्ना ने भरा पर्चा, कलराज ने बोला विरोधियों पर हमला












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