स्वामी प्रसाद मौर्य के सपा से जाते ही हो गया 'खेल', बदायूं से धर्मेंद्र नहीं, शिवपाल यादव लड़ेंगे चुनाव
समाजवादी पार्टी ने मंगलवार को लोकसभा चुनावों के लिए अपनी तीसरी लिस्ट जारी की है, जिसमें 5 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए गए हैं। सबसे चौंकाने वाला नाम अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव का है, जो बदायूं सीट से सपा के उम्मीदवार बनाए गए हैं।
सपा ने यह घोषणा पार्टी के पूर्व महासचिव और कद्दावर ओबीसी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के पार्टी छोड़ने के कुछ ही घंटों बाद की है। माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी सुप्रीमो ने बदायूं सीट से शिवपाल को उतारकर भाजपा के लिए कड़ी चुनौती पेश करने के साथ-साथ स्वामी प्रसाद मौर्य को भी बहुत बड़ा झटका दिया है।

शिवपाल यादव धर्मेंद्र की तुलना में ज्यादा बड़े नेता हैं
धर्मेंद्र यादव 2014 के मोदी लहर में भी बदायूं सीट से चुनाव जीत चुके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा प्रत्याशी संघमित्रा मौर्या ने उन्हें सिर्फ 18,454 वोटों से ही हराया था। लेकिन, इसके बावजूद अखिलेश ने भाई धर्मेंद्र की जगह चाचा शिवपाल यादव पर भरोसा किया है तो इसकी बड़ी वजह है।
शिवपाल यादव का समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और वोटरों में ज्यादा अच्छी पकड़ मानी जाती है। वह मुलायम सिंह यादव के समय से यादवों और मुस्लिम मतदाताओं के बीच लोकप्रिय रहे हैं। धर्मेंद्र की तरह उन्हें परिवार की पहचान की दरकार नहीं है।
बदायूं से बेटी के लिए टिकट की दावेदारी कर रहे थे मौर्य!
वहीं संघमित्रा मौर्या स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी हैं और जानकारी के मुताबिक वह अबकी बार इस सीट से उनके लिए सपा से टिकट की मांग कर रहे थे। क्योंकि, मौर्य को आशंका है कि उनके बयानों की वजह से इस बार बदायूं से बीजेपी संघमित्रा का टिकट काट भी सकती है।
शिवपाल की उम्मीदवारी से संघमित्रा का बढ़ गया चैलेंज
स्वामी प्रसाद मौर्य ने पहले सपा महासचिव का पद छोड़ा और फिर पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया। वैसे उन्होंने गुरुवार को अपनी अगली रणनीति के ऐलान की बात कही है, लेकिन माना जा रहा है कि वह नई पार्टी बनाएंगे और इसबार संघमित्रा बदायूं से अपने पिता की पार्टी की उम्मीदवार हो सकती हैं।
शिवपाल की वजह से बदायूं में बीजेपी की बढ़ेगी चुनौती
लेकिन, जिस तरह से अखिलेश यादव ने धर्मेंद्र यादव की जगह शिवपाल यादव पर दांव लगाया है, उसे स्वामी प्रसाद मौर्य की चुनावी दांव को भी बट्टा लगाने की कोशिश माना जा रहा है।
क्योंकि, शिवपाल यादव बदायूं में बीजेपी को भी कड़ी टक्कर दे सकते हैं; और संघमित्रा चाहे किसी भी पार्टी से मैदान में उतरीं तो उनकी भी राह भी मुश्किल हो सकती है।












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