भैंस-बकरी चोरी से जमीन हड़पने तक! आजम खान के 104 मामलों में 7 सबसे विवादित मुकदमे
Azam Khan Cases: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल मची है। समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान 23 महीने की जेल यात्रा के बाद रिहा हो गए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद मंगलवार को वे सीतापुर जेल से बाहर आए, जहां उनके बेटे अदीब आजम और समर्थक पहले से मौजूद थे।
आजम खान पर कुल 104 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 93 केवल रामपुर जिले में दर्ज बताए जाते हैं। उन पर जमीन पर कब्जा करने, सरकारी संपत्ति हड़पने, चुनावी धोखाधड़ी और भड़काऊ बयान देने जैसे गंभीर आरोप हैं। इस रिपोर्ट में जानते हैं आजम खान से जुड़े कुछ अहम मुद्दे और विवाद।

जौहर विश्वविद्यालय विवाद
रामपुर में मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के लिए किसानों की जमीन जबरन अधिग्रहित करने का आरोप आजम खान पर लगा है। यह मामला उनकी राजनीतिक जिंदगी का सबसे बड़ा और विवादित मुद्दा माना जाता है। अदालतों ने इस मामले में उन्हें कई बार तलब किया, जबकि जांच एजेंसियों ने लगातार कार्रवाई करते हुए मामले की गहनता से जांच की।
शत्रु संपत्ति का मामला
आजम खान पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी 'शत्रु संपत्ति' पर अवैध कब्जा किया। इस केस में उनके पूरे परिवार को आरोपी बनाया गया और कोर्ट से उन्हें सजा भी सुनाई गई।
डूंगरपुर प्रकरण
रामपुर में गरीबों के लिए बने 'आसरा आवास' प्रोजेक्ट की जमीन पर अवैध कब्जा करने और लोगों के मकान तोड़ने का आरोप भी आजम खान पर है। इस मामले में भी कई मुकदमे दर्ज हैं और उन्हें कड़ी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।
फर्जी जन्म प्रमाण पत्र विवाद
आजम खान, उनकी पत्नी डॉ. तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम पर दो अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्र बनवाने का आरोप है। अब्दुल्ला ने इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर चुनाव लड़ा था। अदालत ने दोषी करार देते हुए उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी।
भड़काऊ भाषण और नफरती बयान
आजम खान अपने बयानों के लिए हमेशा विवादों में रहे हैं। 2019 में चुनावी सभा में पीएम मोदी और सीएम योगी पर नफरती भाषण देने के मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया था। इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द हो गई और उपचुनाव में उनकी परंपरागत सीट बीजेपी ने जीत ली।
बकरी और भैंस चोरी का मामला
आजम खान के खिलाफ कई अजीबोगरीब केस भी दर्ज हैं। एक मामले में उन पर बकरी और भैंस चोरी का आरोप लगाया गया। इसके अलावा उन पर सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी, लूटपाट और धमकाने जैसे आरोप भी लगे हैं।
आजम खान का राजनीतिक पतन
2019 से आजम खान के राजनीतिक करियर का ग्राफ गिरता गया। लगातार कानूनी मुश्किलों, कोर्ट की सजा और परिवार के खिलाफ दर्ज मुकदमों ने उनके राजनीतिक 'एंपायर' को कमजोर कर दिया। 2022 में हेट स्पीच केस में दोषी करार दिए जाने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता भी चली गई।
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परिवार पर भी केसों की भरमार
आजम खान की तरह उनके परिवार के सदस्य भी कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। उनके बड़े बेटे अदीब आजम पर 20 से ज्यादा केस, छोटे बेटे अब्दुल्ला पर करीब 40 केस और पत्नी तंजीन फातिमा पर लगभग 30 केस दर्ज हैं।
2017 के बाद बढ़ी मुश्किलें
आजम खान की कानूनी परेशानियों का सिलसिला 2017 में तेज़ हो गया, जब उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार सत्ता में आई। उसके बाद से उनके खिलाफ लगातार नए मामले दर्ज होते रहे। अकेले रामपुर जिले में ही उनके खिलाफ 93 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें जमीन पर अवैध कब्जा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने, विरोधियों की संपत्ति पर कब्जा करने और फर्जी दस्तावेज़ तैयार करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। प्रदेश और देश की अलग-अलग अदालतों में कुल मिलाकर उनके खिलाफ 104 से ज्यादा केस लंबित हैं। कई मामलों में उन्हें जमानत मिल चुकी है, लेकिन पुराने और नए मुकदमों की सुनवाई ने उन्हें लगातार कानूनी दबाव में रखा है।
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