'Yogi जी...मुझे बर्दाश्त नहीं', इस्तीफा देकर फूट-फूटकर रोए अयोध्या GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार-VIDEO
Uttar Pradesh Deputy Commissioner Prashant Kumar Singh Crying Video Viral: उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच चल रहे विवाद ने अब प्रशासनिक स्तर पर तूफान मचा दिया है। अयोध्या में तैनात राज्यकर विभाग के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देते समय वे इतने भावुक हो गए कि पत्नी से फोन पर बात करते हुए फूट-फूटकर रो पड़े।
उन्होंने कहा, 'Yogi जी... मुझे बर्दाश्त नहीं हुआ।' प्रशांत ने CM योगी को अपना 'अन्नदाता' बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का अपमान वे अब सहन नहीं कर सकते। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की अपील की है। यह घटना बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के ठीक बाद हुई है, जिससे यूपी में ब्राह्मण और सामान्य वर्ग के बीच असंतोष और तेज हो गया है।

Prashant Kumar Singh Crying Video Viral: प्रशांत कुमार सिंह का रोते हुए वीडियो वायरल
इस्तीफा देते समय प्रशांत ने पत्नी को फोन किया और बात करते हुए खुद को संभाल नहीं पाए। उनकी आवाज भर्रा गई और वे फफक-फफक कर रो पड़े। पत्नी से उन्होंने सिर्फ इतना कहा:- 'हां, हैलो... मैंने इस्तीफा दे दिया है। अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा।' प्रशांत ने आगे कहा कि वे दो रात से ठीक से सो नहीं पाए थे। मन बेहद व्यथित था। उन्होंने लिखा- 'जिस प्रदेश का नमक और रोटी खाता हूं, प्रदेश के वेतन से मेरा परिवार चलता है। अगर उस प्रदेश के मुखिया पर असंसदीय शब्दों का प्रयोग किया जाएगा, तो मुझे दर्द होगा। मेरे अंदर भी दिल है और संवेदना है। क्योंकि मैं यूपी कर्मचारी नियमावली के तहत बंधा हुआ हूं। दो दिनों से इस पीड़ा को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था, इसलिए राज्यपाल को इस्तीफा भेज दिया है।'
Prashant Kumar Singh Resign: इस्तीफे की मुख्य वजह: शंकराचार्य की टिप्पणियां और CM का अपमान
प्रशांत ने अपने दो पन्नों के इस्तीफे में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने इन बयानों को 'अभद्र, अमर्यादित और अनर्गल प्रलाप' बताया। उनका कहना है कि ऐसे बयान लोकतांत्रिक ढांचे, संविधान और जनादेश पर हमला हैं।












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