'Ayodhya के 1940 के ब्रिटिश कालीन मंदिर पर चला बुलडोजर', Akhilesh Yadav ने क्यों कहा- 'बख्शा न जाए'
UP Elections 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। इसी बीच अयोध्या में विकास कार्यों के नाम पर एक पुराने शिव मंदिर के ध्वस्त होने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने 16 जून को इस वीडियो को शेयर करते हुए बीजेपी सरकार पर निशाना साधा और सभी कॉरिडोर व सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं की बहुसदस्यीय न्यायिक जांच की मांग की।
उन्होंने साफ कहा कि 'किसी ट्रस्टी, कमेटी सदस्य, अधिकारी या प्रशासनिक अधिकारी को बख्शा न जाए।' यह घटना अयोध्या के विकास मॉडल, धार्मिक भावनाओं, भूमि अधिग्रहण और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की नई बहस को जन्म दे रही है। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं...

क्या हुआ था अयोध्या में? पूरी घटना समझिए...
11 जून 2026 को अयोध्या के ककराही बाजार में 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के चौड़ीकरण के तहत प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की। इस दौरान 1940 में बना एक गुलाबी शिव मंदिर भी ध्वस्त हो गया। आसपास के कई मकान और निर्माण भी तोड़े गए।
प्रशासन का पक्ष क्या है?
- मंदिर और मकान परिक्रमा पथ की जद में आ रहे थे।
- प्रभावितों को पहले मुआवजा दिया जा चुका था।
- कई बार नोटिस जारी किए गए थे।
- निर्धारित समयसीमा के बाद कार्रवाई की गई।
एडीएम (वित्त एवं राजस्व) अमित कुमार भट्ट, सदर एसडीएम अरविंद कुमार और क्षेत्राधिकारी यश त्रिपाठी के नेतृत्व में पुलिस बल की भारी तैनाती के साथ शांतिपूर्ण कार्रवाई हुई।
विपक्ष और स्थानीय लोगों का आरोप क्या है?
- 1940 का प्राचीन मंदिर (लगभग 86 साल पुराना) विकास के नाम पर तोड़ा गया।
- मुआवजा पर्याप्त नहीं या कई लोगों को नहीं मिला।
- धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची।
- समाजवादी पार्टी के नेता अरुण निषाद ने मौके पर पहुंचकर विरोध दर्ज कराया।
अखिलेश यादव का हमला: 'बाबा के बुलडोजर' पर सवाल
- अखिलेश यादव ने पोस्ट में लिखा कि बीजेपी सरकार के हर कॉरिडोर और चौड़ीकरण प्रोजेक्ट में घपला-घोटाला है। उन्होंने मांग की है कि
- बहुसदस्यीय न्यायिक जांच हो। ट्रस्टी, कमेटी सदस्य, अधिकारी किसी को बख्शा न जाए। अवैध कमाई और काली संपत्ति की जांच आम जनता, ईमानदार पत्रकारों और जनप्रतिनिधियों की निगरानी में हो।
उन्होंने वीडियो शेयर कर 'बाबा के बुलडोजर' की आलोचना की। यह पोस्ट 2027 चुनाव से पहले अयोध्या में बीजेपी की 'राम-विकास' छवि को चुनौती देने वाला माना जा रहा है।
2027 की तैयारी
अखिलेश यादव लगातार सक्रिय हैं। हाल ही में राम मंदिर चढ़ावे के गायब होने के आरोप पर भी उन्होंने सवाल उठाए थे। इस घटना को उन्होंने ब्रॉडर घोटाले का हिस्सा बताते हुए जोड़ा है। यह मुद्दा यूपी की सियासत में हिंदू वोट, यादव-मुस्लिम समीकरण और विकास नैरेटिव को प्रभावित कर सकता है।
आजादी से पहले का था मंदिर
अयोध्या राम की नगरी है। 14 कोसी परिक्रमा प्राचीन परंपरा है। 1940 का मंदिर ब्रिटिश काल या आजादी से पहले का है। ऐसे मंदिरों का संरक्षण सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा माना जाता है। हालांकि, प्रशासन का तर्क है कि पथ की जरूरत ज्यादा व्यापक है। विशेषज्ञ कहते हैं कि विकास परियोजनाओं में हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट जरूरी होना चाहिए।













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