कानपुर के पुलिस कमिश्नर रहे असीम अरुण ने अपने विभाग में बदला काम का तरीका , जानिए कैसे
लखनऊ, 8 अप्रैल: उत्तर प्रदेश सरकार में योगी सरकार बनने के बाद कई मंत्री ऐसे हैं जो नौकरशाही से रिटायर होकर नेता बने हैं। इन नेताओं ने अपने विभाग में कार्य करने का तरीका भी बदल दिया है। जी हां हम बात कर रहे हैं कि यूपी के सामाजिक कल्याण मंत्री असीम अरुण की जो अपने विभाग में ठीक वैसा ही रवैया अख्तियार कर रहे हैं जैसा कि वह अधिकारी रहने के दौरान उठाते थे। कानपुर के कमिश्नर रह चुके असीम अरुण ने अपने विभाग के अधिकारियों को साफतौर पर निर्देश जारी किया है कि काम करने का तरीका बदलना होगा और जो लोग उसमें ढल नहीं पाएंगे उन्हें बक्शा नहीं जाएगा।

पहली बैठक में अपनी प्राथमिकता तय करते हुए राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) समाज कल्याण असीम अरुण ने कहा कि भ्रष्ट आचरण में लिप्त पाए जाने पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा। मंगलवार को अपने विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए, अरुण ने विभाग के कामकाज को तेज करने के लिए प्रौद्योगिकी और सॉफ्टवेयर उन्नयन के उपयोग पर जोर दिया।
सिटिजन चार्टर लागू करें और कार्यों का समयबद्ध निपटारा हो
मंत्री ने कहा कि समाज कल्याण विभाग के अधिकारी सिटिजन चार्टर को लागू करें और समयबद्ध तरीके से कार्यों का निपटारा सुनिश्चित करें। उन्होंने अधिकारियों से कहा, "सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लाभार्थियों तक जल्द से जल्द पहुंचना चाहिए।" मंत्री ने सरकारी योजनाओं का लाभ जनता तक सुनिश्चित करने के लिए सभी अधिकारियों और कर्मियों से सुझाव भी मांगे हैं। अरुण ने अधिकारियों को तकनीक का स्मार्ट तरीके से इस्तेमाल कर भ्रष्टाचार की संभावना को खत्म करने के भी निर्देश दिए।
समीक्षा बैठक के दौरान अरूण ने अधिकारियों से छात्रवृत्ति, राष्ट्रीय वृद्धावस्था योजना, मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना समेत विभिन्न योजनाओं की प्रगति का ब्योरा भी मांगा। अधिकारियों ने मंत्री को योजनाओं और उनसे लाभान्वित होने वाले लोगों से अवगत कराया और विभाग में सॉफ्टवेयर के धीमी गति से चलने से होने वाली असुविधा पर भी प्रकाश डाला। मंत्री ने तकनीकी टीम को साफ्टवेयर का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

मंत्रिमंडल में जगह पाने वाले एकलौते सेवानिवृत आईपीएस
दरअसल कानपुर नगर के पूर्व पुलिस आयुक्त असीम अरुण मंत्रिमंडल में जगह पाने वाले एकलौते आईपीएस हैं। योगी आदित्यनाथ सरकार की मंत्रिपरिषद में अरुण ने स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली थी। अरुण IPS कैडर के दूसरे दलित (जाटव) अधिकारी हैं जो भाजपा में शामिल हुए थे और मंत्री बनाया गया। इससे पहले, अरुण के गुरु और यूपी के पूर्व डीजीपी बृजलाल, जो एक दलित अधिकारी भी थे, उनकी सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद भाजपा में शामिल हो गए थे और उन्हें भगवा संगठन द्वारा राज्यसभा सदस्य बनाया गया था।
राजनीति में कम अधिकारियों को मिली सफलता
पिछले 25 वर्षों में, लगभग एक दर्जन पुलिस अधिकारी राजनीति में शामिल हुए, लेकिन उनमें से अधिकांश महत्वपूर्ण सफलता हासिल करने में विफल रहे। इनमें 1972 बैच के आईपीएस अधिकारी एसआर दारापुरी हैं, जो 2003 में महानिरीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए और 2004 में लखनऊ से और फिर 2014 में रॉबर्ट्सगंज से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों मौकों पर हार गए। इसी तरह, 1991 बैच के स्पेशल टास्क फोर्स के पुलिस उपाधीक्षक शैलेंद्र कुमार सिंह ने कांग्रेस में शामिल होने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी और चंदौली से 2009 का लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। 2012 के विधानसभा चुनावों में, उन्होंने फिर से अपनी किस्मत आजमाई लेकिन जीत नहीं पाए।












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