नीलामी के बाद ऐसा दिखेगा इलाहाबाद रेलवे स्टेशन, यह होंगी खासियतें

जब हम कभी विदेशी रेलवे सेवा के बारे में पढ़ते हैं तो ऐसा लगता है जैसे हम आज भी बैलगाड़ी से सफर करते हैं। हमारी ट्रेन का घंटों देर से आना मानो परंपरा हो और विदेशों में विदेशों में राइट टाइम जिम्मेदारी।

इलाहाबाद। जब हम कभी हालीवुड की फिल्में देखते हैं या विदेशी रेलवे सेवा के बारे में पढ़ते हैं तो ऐसा लगता है जैसे हम आज भी बैलगाड़ी से सफर करते हैं। हमारी ट्रेन का घंटों देर से आना मानो परंपरा हो और विदेशों में राइट टाइम जिम्मेदारी। हमारे यहां इंक्वायरी में रेलवे कर्मी ऐसे गुस्से से जवाब देते हैं जैसे किसी ने भूखा प्यासा कुर्सी पर बांध के रखा है और वहां मानों ससुराल में आवभगत हो रहा है।

अपने यहां प्लेटफार्म पर गंदगी-बदबू, गंदगी के बीच पानी, पानी के बीच शौचालय देखकर लगता हैं बस अभी-अभी यहां सुनामी आयी थी और सबकुछ तबाह कर गयी। वहीं विदेशों में लगता है मानों किसी फाइव स्टार होटल में आ गये हो। लेकिन परेशान मत होइए यह सब पुराने किस्से कहानी का हिस्सा हो जायेगा। भारत में भी रेलवे स्टेशन विश्वस्तरीय होंगे। स्टेशन पहुंच कर यह नहीं पता चलेगा यह इंडिया का है या इंग्लैंड।

कुछ ऐसी होगी व्यवस्था

कुछ ऐसी होगी व्यवस्था

आप बड़ी तेजी से रेलवे स्टेशन पहुंचते हैं। सूट बूट और टाई में खड़ा गेट मैन आप के लिये कांच कांग्रेस दरवाजा खोलता है। नमस्ते से आपका अभिवादन करता हैं और चेहरे परे मुस्कान बिखेरे बड़ी विनम्रता से कहता हैं - 'सर कृपया अपने सामान का वजन और जांच कराये' स्कैनर और वजन मशीन से जबतक आपका सामान आगे पहुंचता आप भी क्लीनसेव हैंडसम सिक्यूरिटी गार्ड से जांच कराकर आगे बढते हैं। जांच कर्मचारी आपको एक पर्ची देता हैं "सर आप निर्धारित वजन से 7 किलो ज्यादा वजन लेकर सफर कर रहे हैं। आपको इसके लिये 110 रुपये अलग से देने पड़ेंगे। आप भी मुस्कुराते हुये क्रेडिट कार्ड से डिजिटल पेंमेट करते हैं और अपने सामान के साथ आगे बढ जाते हैं।

आपको स्टेशन पर पता चला कि ट्रेन कुछ घंटे लेट हो गई है। आप दाहिनी ओर मुड़ते हैं और एसी रूम में गद्दायुक्त वीआईपी सोफे पर बैठकर बड़ी स्क्रीन टीवी देखने लगते हैं। थोड़ा उब लगते ही आप उठते हैं और दूसरी ओर बढते हैं। प्ले एरिया में बैडमिंटन खेलने पहुंचते हैं। लेकिन तभी रेलवे स्टेशन के खूबसूरत शॉपिंग मॉल को देखकर आपकी आंखे चकाचौंध हो जाती हैं। मॉल में टहल कर आप अपना टाइम व्यतीत करते हैं। आप आगे बढते हैं और वर्ल्ड क्लास होटल में लजीज व्यंजन का अर्डर देते हैं। रेलवे की वाई-फाई सुविधा के बीच आपकी नजर मल्टीप्लेक्स में लगी बाहुबली -6 पर नजर जाती है। आप मोबाइल पर ट्रेन की लोकेशन ट्रैक करते हैं और फिर टिकट लेकर बाहुबली फिल्म का मल्टीप्लेक्स में आनंद उठाते हैं।

यह ख्वाब नहीं हकीकत है

यह ख्वाब नहीं हकीकत है

बस-बस अब जरा रूकिये। ये ख्वाबों की दुनिया नहीं है। यह भारत सरकार की योजना है। जो चंद दिनों में जमीन पर दिखायी देगी और यह सारी वर्ल्ड क्लास फैसिलिटी आपको रेलवे स्टेशन पर ही मिलेगी। एक बात और यह सुविधा किसी एक स्टेशन पर नहीं बल्कि पहली ही किश्त में देश के 23 स्टेशनों पर होंगी। सरकार देश के 23 स्टेशनो को निजी हाथों में देगी। जिसका मकसद यहां वर्ल्ड क्लास फैसिलिटी देना है। इसके लिये स्टेशनों की नीलामी होगी, नीलामी में बोली लगेगी। बोली जीतने वाला ही रेलवे स्टेशन का कायाकल्प कर खुद कमायेगा और सरकार का भी राजस्व बढायेगा। अगर यूपी की बात करे तो यहां के भी दो स्टेशन ऑनलाइन नीलाम हो रहे हैं। पहला स्टेशन कानपुर सेंट्रल और दूसरा इलाहाबाद रेलवे स्टेशन।अगर आप भी खरीदना चाहते हैं रेलवे स्टेशन तो लगाइये बोली। 28 जून को स्टेशनों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू होगी। 30 जून को 45 साल के लिए अधिक कीमत देने वाले को स्टेशन मिलेगा।

क्या करेगा रेलवे?

क्या करेगा रेलवे?

रेलवे विभाग अब इन स्टेशनों पर सुरक्षा,तकनीकी, परिचालन, लॉ एंड आर्डर, टिकटिंग, पार्सल और ट्रेन के परिचालन की जिम्मेदारी संभालेगा । जबकि कंपनी पूछताछ, प्लेटफार्म, यूटीएस व होटल-मॉल आदि का संचालन करेगी। साथ ही रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा के लिये निजी कंपनी के गार्ड भी स्टेशन परिसर पर चौकसी बरतेंगे। जबकि शॉपिंग मॉल और मल्टी प्लेक्स में तो उनकी देखरेख में ही संचालन होगा। इस व्यवस्था में 45 साल के लिए स्टेशन को संबंधित निजी कंपनी को लीज पर दिया जाएगा। इस अवधि में कंपनी को संबंधित रेलवे स्टेशन को विश्वस्तरीय सुविधाओं से परिपूर्ण करना होगा।

कहां बनेगा मॉल और मल्टीप्लेक्स
स्टेशन पर वाणिज्यिक विकास के लिए छह एकड़ और 2.71 एकड़ के दो प्लाट पर काम होगा। यही स्टेशन की खाली जगह में पंचतारा होटल, शॉपिंग मॉल और मल्टी प्लेक्स बनेंगे। जबकि प्लेटफार्म पर फूड स्टॉल, रिटायरिंग रूम, फ्रेश एरिया, प्ले एरिया बनेगा। प्ले एरिया में तो इनडोर-आउटडोर गेम की बेहतर सुविधा होगी। हालांकि रेलवे स्टेशनों का जो हेरिटेज स्वरूप है वह बिल्कुल आज की तरह ही रहेगा।

क्या बोले अधिकारी?

क्या बोले अधिकारी?

इस संबंध में उत्तर मध्य रेलवे के पीआरओ अमित मालवीय ने बताया कि स्टेशन पर तैनात कर्मचारियों को नजदीकी स्टेशन पर स्थानांतरित कर दिया जायेगा स्टेशन पर केवल तकनीकी कर्मचारी व अफसर बने रहेंगे । एक तरह से रेल मंत्रालय कांट्रेक्ट बेस पर स्टेशन फैसिलिटेशन मैनेजरों की नियुक्ति कर रहा है। ये स्टेशन का विकास, पुनर्निर्माण व कामर्शियल डेवलपमेट करेगे। कंपनी और रेलवे के बीच होने वाली हिस्सेदारी अभी तय नहीं है। रेलवे 50-50 व कंपनी 70-30 कह रही है। इस व्यवस्था से सालाना 140 करोड़ रुपए की बचत तो होगी ही अतिरिक्त लाभ के रूप में 30 % हिस्सेदारी भी मिलेगी। इसकी शुरुआत मध्यप्रदेश में भोपाल के हबीबगंज स्टेशन से की गई है। यह स्टेशन बंसल कंस्ट्रक्शन को मिला है और वहां काम भी शुरू हो गया है ।

ये स्टेशन होंगे नीलाम
बेंगलुरु छावनी, यशवंतपुर, चेन्नई सेंट्रल, रांची, उदयपुर सिटी, इंदौर, विशाखापट्टनम, हावड़ा, कामाख्या, फरीदाबाद, जम्मूतवी, सिकंदराबाद, विजयवाड़ा, भुवनेश्वर, कानपुर सेंट्रल, इलाहाबाद जंक्शन और जयपुर स्टेशन शामिल हैं।

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