इलाहाबाद : कोर्ट में मुर्दे को होना था हाजिर, गुंडा एक्ट का वारंट लेकर गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस
अक्टूबर में ही मर चुके शंभू को 14 फरवरी 2017 को एडीएम कोर्ट में हाजिर होना था। शंभू को एक लाख का निजी मुचलका भरने को निर्देशित किया गया था। लेकिन मरा हुआ शंभू हाजिर नहीं हो सका।
इलाहाबाद। यूपी विधानसभा चुनाव के तहत 23 फरवरी को इलाहाबाद में मतदान होना है। इस मतदान में एक मरा आदमी लॉ एंड ऑर्डर भंग कर सकता है। इसलिए पुलिस ने उस मरे आदमी के विरुद्ध पहले गुंडा एक्ट की कार्रवाई की फिर उप जिलाधिकारी न्यायालय से वारंट जारी कराकर उसे पकड़ने के लिए घर भी पहुंच गई। लेकिन समस्या है कि अब तक तो उस शख्स की दफन हुई लाश भी मिट्टी में बदल गई होगी। ऐसे में पुलिस अब कैसे एक मरे हुए व्यक्ति पर कार्रवाई करेगी? यह देखना दिलचस्प होगा। वैसे आपको बता दें कि इस मरे हुए व्यक्ति को एसडीएम करछना की अदालत में पेश होना था। लेकिन वह हाजिर नहीं हुआ।

चार महीने पहले हुई थी मौत
इलाहाबाद के कौंधियारा थाना क्षेत्र के सड़वा खुर्द गांव में शंभूनाथ की 28 अक्टूबर 2016 को मौत हो गई थी। लेकिन पुलिस की नजर में शंभूनाथ न सिर्फ जिंदा था बल्कि इस विधानसभा चुनाव में बड़ी गड़बड़ी भी कर सकता था।
पुलिस ने लगाया गुंडा एक्ट
पुलिस ने शंभूनाथ पर गुंडा एक्ट के तहत कार्यवाई की और 25 जनवरी 2017 को एसडीएम करछना से गिरफ्तारी की कार्रवाई के लिये वारंट मांगा। एसडीएम करछना ने भी शंभूनाथ के खिलाफ धारा 111 (सीआरपीसी) की कार्रवाई करते हुए 7 फरवरी 2017 को शंभूनाथ यानी मरे व्यक्ति के खिलाफ वारंट जारी कर दिया।

मर चुके शंभू को कोर्ट में होना था हाजिर
अक्टूबर में ही मर चुके शंभू को 14 फरवरी 2017 को एडीएम कोर्ट में हाजिर होना था। शंभू को एक लाख का निजी मुचलका भरने को निर्देशित किया गया था। लेकिन मरा हुआ शंभू हाजिर नहीं हो सका।
शंभू की कहानी है दिलचस्प
पुलिस के मुताबिक शंभूनाथ नक्सलियों की मदद करने के चलते जेल गया था। जबकि शंभूनाथ की पत्नी मुन्नी देवी ने बताया कि 10 साल पहले 10 अप्रैल 2007 को वह घर से 2 हजार रुपए लेकर इलाहाबाद के सिविल लाइंस कपड़ा खरीदने गया था। लेकिन वहां उसे चंदौली पुलिस ने नक्सलियों की मदद के आरोप में पकड़ कर जेल भेज दिया था। अक्टूबर 2013 में जेल से आने के बाद वह घर पर खेती-किसानी करता था। उसकी दोनों किडनी खराब हो गई थी।

जेल पुलिस के लिए काम करता था शंभू
शंभू की पत्नी ने आगे बताया कि शादी के समय वह कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ा था और जेल पुलिस में नौकरी कर रहा था। उसकी पोस्टिंग यहीं नैनी जेल में थी। लेकिन दो साल बाद जाने क्यों उसने नौकरी छोड़ दी। यह बात आज तक रहस्य बनी हुई है। शंभू ने नौकरी क्यों छोड़ी इस बारे में किसी को कुछ नहीं पता है।
नहीं है कोई जवाब
इस मामले में थानाध्यक्ष कौंधियारा ताहिर हुसैन से बात करने की कोशिश की गई लेकिन वह कुछ भी बताने से बचते रहे। जबकि अधिकारियों ने मामला संज्ञान में न होने की बात कही है।












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