बड़े दलों से झटका खा चुके अखिलेश छोटे दलों पर लगाएंगे दांव, शिवपाल से मिलाएंगे हाथ या करेंगे इंतजार
लखनऊ, 18 अगस्त: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल चुनावी मोड में आ गए हैं। समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव भी चुनाव की रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। अखिलेश यादव कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर उसका हश्र देख चुके हैं लिहाजा अब उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए अब यूपी में छोटे दलों के साथ मिलकर प्रभावी गठबंधन बनाने की कवायद शुरू की है। सपा के रणनीतिकारों का कहना है कि सपा इस बार फूंक फूंक कर कदम रखना चाहती है। वह छोटे दलों को अहमियत देते हुए उनके साथ ही चुनाव में चाहती है।

कुछ दिनों पहले ही लखनऊ के ताज होटल में आयोजित एक निजी चैनल के कार्यक्रम में भी अखिलेश ने यह बात स्वीकार की थी कि यूपी में वह बड़े दलों की बजाए छोटे दलों के साथ ही गठबंधन बनाएंगे। अभी तक विधानसभा चुनाव के लिहाज से सपा ने राष्ट्रीय लोकदल, संजय चौहान की जनवादी पार्टी और केशव मौर्य के महान दल के साथ गठबंधन बनाने में कामयाब हुई है। अखिलेश यादव ने साफतौर पर कहा था कि विधानसभा चुनाव में वह बसपा और कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करेगी।

वर्ष 2017 में कांग्रेस और 2019 में बसपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ चुके हैं अखिलेश
दरअसल अखिलेश यादव का इससे पहले बड़े दलों के साथ गठबंधन करने का अनुभव अच्छा नहीं रहा है। उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ हाथ मिलाया था लेकिन जनता ने उन्हें नकार दिया था। इसके बाद उन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव में भी बसपा के साथ गठबंधन करके बड़ा दांव खेला था। हालांकि सपा के सूत्रों का कहना है सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने बसपा के साथ गठबंधन करने से मना किया था लेकिन अखिलेश की जिद्द के आगे उन्हें झुकना पड़ा था। हालांकि लोकसभा चुनाव में गठबंधन का फायदा मायावती को मिला और बसपा की सीटें शून्य से दस तक पहुंच गई जबकि सपा घटकर पांच सीटों पर सिमट गई थी।
आम आदमी पार्टी पार्टी से भी हो सकता है गठबंधन
तीनों छोटे दलों के अलावा अखिलेश यादव चुनाव से पहले जिस तरह के मोर्चे की कल्पना कर रहे हैं उसमें आम आदमी पार्टी के साथ भी समझतौ हो सकता है। कुछ दिनों पहले ही राज्यसभा सांसद आप के नेता संजय सिंह ने लखनऊ आकर अखिलेश से उनके आवास पर मुलाकात की थी। ऐसा माना जा रहा है कि इस मुलाकात के बाद अखिलेश की दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के साथ कई दौर की बैठक हुई थी। सीटों पर सहमति बननी अभी बाकी है। ऐसा माना जा रहा है कि दोनों पार्टियां एक बैनर तले अगला चुनाव लडें।

ओम प्रकाश राजभर के साथ नजदीकियों को लेकर उहापोह में हैं अखिलेश
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के चीफ ओम प्रकाश राजभर हालांकि आए दिन योगी और मोदी सरकार की बुराई कर रहे हैं लेकिन बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह के घर जाकर उनसे मुलाकात करना उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर गया। हालांकि इस नुकसान की भरपायी राजभर ने दो दिन बाद बनारस में एक बयान देकर करने की कोशिश की थी। बनारस में राजभर ने अखिलेश को यूपी का बेस्ट सीएम बताया था और योगी पर हमला करते हुए कहा था कि योगी को राजहमल में होने की बजाए मठ में होना चाहिए।
सुभासपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण राजभर ने कहा, '' पार्टी बीजेपी की नीतियों के पूरी तरह से खिलाफ है। यह सही है कि पार्टी अध्यक्ष की मुलाकात स्वतंत्रदेव सिंह से हुई थी लेकिन यह मुलाकात औपचारिक थी और राजनीति में ऐसा होता रहता है। इससे जनभागीदारी मोर्चा पर किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा और बीजेपी के दमनकारी नीतियों के खिलाफ पहले भी पार्टी थी और आगे भी रहेगी।''
शिवपाल को लेकर तस्वीर साफ नहीं कर पा रहे अखिलेश
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने चाचा और पूर्व कैबिनेट मंत्री तथा प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की है। दरअसल कार्यकर्ताओं का कहना है कि दोनों को एक होकर चुनाव लड़ना चाहिए जिससे बीजेपी से अच्छे से लड़ा जा सकता है। शिवपाल यादव की जमीनी पकड़ से सभी वाकिफ हैं और यह बात अखिलेश भी भली भांति जानते हैं।

5 प्वांइट में समझिए सपा के मिशन 2022 की प्लानिंग
- यूपी में अलग अलग इलाकें में सक्रिय छोटे दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ना
- भाजपा के गठबंधन में शामिल रहीं छोटी पार्टियों तोड़कर अपने साथ लाने की कोशिश
- बसपा, सपा और कांग्रेस से नाराज नेताओं को पार्टी में शामिल कराकर माहौल बनाना
- यूपी में मुस्लिम, दलित और ओबीसी नेताओं को सपा में शामिल कराकर जातियों को साधने की कोशिश
- यूपी में प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलनों के माध्यम से ब्राह्मणों को खुश कर ने की कोशिश करना

शिवपाल को लेकर जल्दबाजी के मूड में नहीं सपा चीफ
सपा के सूत्रों का कहना है कि शिवपाल को लेकर अखिलेश अभी वेट एंड वाच की भूमिका में रहना चाहते हैं। वह इंतजार कर रहे हैं चुनाव के और नजदीक आने का इंतजार किया उसके बाद ही उनको पार्टी में शामिल करने या उनकी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर कोई फैसला किया जाए। हालांकि शिवपाल यादव सार्वजनिक मंचों से कई बार यह कह चुके हैं कि वह अखिलेश से मिलने का समय कई बार मांग चुके हैं लेकिन अभी तक उन्हें समय नहीं मिला है।
सपा के प्रवक्ता राजीव राय ने कहा, '' विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की क्या प्लानिंग है इसके बारे में कुछ भी कहना अभी सही नहीं होगा। जहां तक छोटी पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की बात है कि तो राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी इस पर फैसला करेंगे कि किसके साथ मिलकर चुनाव लड़ना है। सही समय आने पर पार्टी इसकी घोषणा करेगी।''












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