क्या सपा की रार लगाएगी भाजपा और बसपा की नैया पार?

प्रदेश में सत्तासीन पार्टी सपा, जिसके पास आधे से ज्यादा विधानसभाएं सीटें हैं वो बिखर जाएगी तो फिर इसका फायदा किस दूसरी पार्टी को फायदा होगा और नुकसान किसको ये सवाल उभरता है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा से ज्यादा दो महीने का वक्त बचा है। सपा इस वक्त जिस तरह से दो फाड़ है, उसके बाद ये बड़ा सवाल है कि इसका आने वाले विधानसभा चुनाव पर क्या असर पड़ेगा। पिछले कुछ महीनों से सपा की रार किसी से छुपी नहीं थी लेकिन इसके बावजूद अखिलेश ने प्रचार में खुद को पूरी तरह से झौंक रखा है, साथ ही वो मीडिया में लगातार सपा की सरकार बनने की बात कह रहे हैं। अब अखिलेश यादव सपा में नहीं हैं लेकिन सपा भी उनके बिना वो सपा नहीं है जो सरकार बना सके तो ऐसे में आने वाले चुनाव में इसका बड़ा असर पड़ने जा रहा है, ये साफ है।

क्या सपा की रार लगाएगी भाजपा और बसपा की नैया पार

उत्तर प्रदेश चुनाव में अभी तक तीन पार्टियों में सीधी टक्कर मानी जा रही है और वो हैं सपा, बसपा और भाजपा। अब जब वो पार्टी (सपा) जिसके पास प्रदेश की आधी से ज्यादा विधानसभाएं हैं, वो बुरी तरह से बिखरी है तो फिर इसका फायदा किसको होगा और नुकसान किसको। उत्तर प्रदेश के चुनाव में मुस्लिम, यादव और दलित अहम वोट बैंक रहे हैं, जिनके दम पर पार्टियां सत्ता तक कई बार पहुंची हैं। अभी तक जहां भाजपा जहां चुनाव को विकास और हिन्दुत्व के मुद्दे को ही भुनाती दिखी है तो बसपा दलितों के साथ मुस्लिमों को साधने की कोशिश कर रही है। अब जबकि सपा दो फाड़ हो गई है और मुलायम सिंह और अखिलेश यादव के उम्मीदवार अलग-अलग लड़ेंगे तो साफ है कि दोनों गुट खुद को जिताने से ज्यादा एक-दूसरे को हराने के लिए काम करेंगे। इसमें जाहिर है कि दोनों ही गुटों को भारी नुकसान होगा।

यादव वोट सपा के दो गुटों के बीच बंट जाएगा तो जाहिर है कि किसी तीसरी पार्टी को ही इससे फायदा होगा। ऐसे में जब सपा के उम्मीदवार आपसी लड़ाई में कमजोर पड़ते दिखेंगे तो इसका सबसे बड़ा फायदा बहुजन समाज पार्टी को होगा। बहुजन समाज पार्टी फिलहाल उत्तर प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। सपा के कमजोर पड़ने पर मुस्लिम वोट बैंक पूरी तरह से बसपा की तरफ झुक जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि सपा के हल्का पड़ने पर बसपा और भाजपा में सीधे टक्कर देखने को मिल सकती है। इस टक्कर में जाहिर है मुसलमान वोट बसपा की ओर जाएगा। ऐसे में बसपा काफी मजबूत हो जाएगी। वहीं कई पिछड़ी जाति भी सपा छोड़ बसपा की ओर जा सकती हैं।

भाजपा के सामने उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी चुनौती अभी तक अखिलेश यादव ही रहे हैं। वो अपने विकास कार्यों के बल पर भाजपा पर हमलावर होते रहे हैं, वहीं उनकी भाषण शैली भी बेहद बढ़िया है। अब जबकि सपा टूट पर है तो अगड़ी जातियां पूरी तरह से भाजपा की आर जा सकती हैं। ऐसे में भाजपा को बैठे-बैठाए तगड़ा फायदा हो जाए, इसकी पूरी उम्मीद है।

दरअसल पिछले कुछ सालों से देशभर में ये देखने में आया है कि जनता आधा-अधूरा फैसला ना सुनाकर पार्टी को बहुमत सौंपती है। उत्तर प्रदेश की जनता भी ये रुख पिछले तीन चुनावों से दिखाती रही है। ऐसे में जब सपा कमजोर दिखेगी तो जाहिर है कि भाजपा और बसपा में सीधी टक्कर हो जाएगी। वहीं छोटी-छोटी पार्टियों को इसका नुकसान होगा क्योंकि सीधी टक्कर में अमूमन छोटी पार्टियों की तरफ वोटर नहीं जाता और दो टक्कर वाली पार्टियों में से किसी एक को चुनता है। ऐसे में जहां बसपा और भाजपा को फायदा होगा तो वहीं एआईएमआईएम, रालोद, दूसरी छोटी पार्टियां और वामदलों को नुकसान रहेगा। अब देखना ये है कि आने वाले दिनों में मुलायम और अखिलेश का रुख क्या रहता है। एक बात जो साफ दिख रही है वो ये कि अगर सपा दो फाड़ रही तो बसपा सरकार बनाने की तरफ जाएगी और भाजपा मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरेगी, वहीं सपा के दोनों गुट और कांग्रेस तीसरे स्थान के लिए ही जोर लगाएंगे ऐसा अनुमान प्रदेश की राजनीतिक स्थिति को देखकर लगाया जा सकता है।

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