Akhilesh Yadav की हुंकार- 2024 में भाजपा का सफाया, गठबंधन के सवाल पर दिलचस्प जवाब दिया
2024 में गठबंधन के सवाल पर पूर्व सीएम और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कानपुर में कहा, आज जिन दलों के साथ हैं, उनके साथ मिलकर ही चुनाव लड़ेंगे। जानिए अखिलेश के बयान के मायने

Akhilesh Yadav लोक सभा चुनाव 2024 में किस तरह के गठबंधन करेंगे? इस सवाल पर Samajwadi Party के मुखिया और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, 2024 Lok Sabha Election भाजपा को केंद्र की सत्ता से उखाड़ फेंकने का मौका है। उन्होंने कहा, गठबंधन उन्हीं दलों के साथ होगा जो पार्टियां आज सपा के साथ हैं। उन्होंने कानपुर में मीडिया से ये बात कही है।
अखिलेश के बयान के मायने क्या हैं?
कानपुर पहुंचे यूपी के पूर्व CM ने पत्रकारों के सवाल के जवाब में बीजेपी को उखाड़ फेंकने के भरोसे के साथ कहा, "2024 में भाजपा का सफाया होगा।" 2024 में गठबंधन पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, "आज जो गठबंधन दल समाजवादी पार्टी के साथ हैं, हम उनके साथ ही चुनाव लड़ने जा रहे हैं।" गौरतलब है कि अखिलेश के इस बयान के बाद स्वाभाविक रूप से नजरें पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर भी रहेंगी।
सपा की नसीहत- क्षेत्रीय सहयोगियों को मजबूत करे कांग्रेस
बता दें कि 2024 के आम चुनाव से पहले विपक्षी एकता पर सवालिया निशान लग रहे हैं। ऐसे में अखिलेश के बयान के कई सियासी निहितार्थ हो सकते हैं। अखिलेश पहले भी कह चुके हैं कि कांग्रेस को क्षेत्रीय सहयोगियों को मजबूत करना चाहिए। जिन सीटों पर छोटे दलों के नेता मजबूत उम्मीदवार हैं, वहां उसे समर्थन देना चाहिए।
2024 से पहले कर्नाटक और छत्तीसगढ़ के मुकाबले
ये भी दिलचस्प है कि कांग्रेस के अयोग्य करार दिए गए सांसद राहुल गांधी को लेकर विपक्षी दल एकजुट होते दिख रहे हैं। हालांकि, किसी भी गठबंधन का औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है। आम चुनाव से पहले इसी साल कर्नाटक और छत्तीसगढ़ में विधानसभा होने हैं। ऐसे में इन राज्यों के चुनावी नतीजों पर भी सबकी नजरें होंगी।
अलग-अलग राज्यों के क्षत्रपों की भूमिका पर भी नजर रहेगी
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी को करारी पटखनी दी है। ऐसे में नजरें बंगाल पर भी होंगी। तेलंगाना में मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव भारत राष्ट्र समिति (BRS) को मजबूत करने की कवायद में जुटे हैं। बिहार में भी नीतीश बीजेपी का दामन छोड़ चुके हैं। नीतीश की जनता दल यूनाइटेड (JDU) और लालू की पार्टी- राष्ट्रीय जनता दल (RJD) किस तरह का रूख अपनाते हैं, ये देखना भी काफी दिलचस्प होगा।












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