मध्य प्रदेश-राजस्थान में सहयोगियों की तलाश में सपा, समझिए यादव-मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर क्यों है फोकस
लखनऊ, 17 सितंबर: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के बाद रामपुर और आजमगढ़ जैसी दो अहम सीटें गवां चुकी समाजवादी पार्टी अब राजस्थान और मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभ चुनाव की तैयारियों में जुट गई है। पार्टी के सूत्रों की माने तो 2024 चुनाव से पहले ये चुनाव पार्टी की तैयारियों को परखने का काम करेंगे वहीं दूसरी ओर अन्य राज्यों में पार्टी के विस्तार की कोशिश को भी अमली जामा पहनाया जा सकेगा। इन दोनों राज्यों में सपा यादव और मुस्लिम बाहुल्य सीटों के हिसाब से रणानीति बनाने में जुटी है। सूत्रों की माने तो पार्टी के चीफ अखिलेश यादव ने साफतौर पर यह निर्देश जारी किया है कि पार्टी का कार्यकर्ता जी जान से इन चुनावों की तैयारी में जुट जाए क्योंकि आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए ये काफी अहम साबित होंगे।

2014 के बाद से ही लगातार चुनाव हार रही सपा
दरअसल 2014 से बार-बार लोकसभा और यूपी विधानसभा चुनाव हारने के बाद अस्तित्व के संकट का सामना कर रही समाजवादी पार्टी 2024 में अपने लिए एक बड़ी भूमिका की तलाश में जुटी है। पार्टी अन्य राज्यों में अपने पदचिह्न का विस्तार करने की इच्छुक है। पार्टी अक्टूबर, 2023 में मध्य प्रदेश और राजस्थान में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कमर कस रही है। सपा का लक्ष्य न केवल इन राज्यों में चुनाव लड़ना है, बल्कि 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए अपनी जड़ें भी मजबूत करना है।

एमपी-राजस्थान में सहयोगियों की तलाश में अखिलेश
सपा मध्य प्रदेश और राजस्थान में संभावित सहयोगियों की भी तलाश कर रही है। हालांकि सपा नेता बोलने को तैयार नहीं हैं, लेकिन सूत्रों ने कहा कि पार्टी कांग्रेस के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है। पार्टी के नेताओं की माने तो संगठन की नजर मप्र और राजस्थान की राजनीति में भविष्य की संभावनाओं पर है। सूत्रों ने यह भी सुझाव दिया कि दोनों राज्यों में, सपा यादव और मुस्लिम समुदायों के मतदाताओं के वर्चस्व वाली सीटों के लिए एक नया खाका तैयार कर रही थी।

अखिलेश ने हाल ही में किया था ग्वालियर का दौरा
हाल ही में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर ग्वालियर का दौरा किया था और मप्र में चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। हरियाणा, राजस्थान के अलवर और यूपी के सीमावर्ती इलाकों में जाति अंकगणित सपा के पक्ष में है। राजस्थान में पिछले विधानसभा चुनाव में, सपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने की तैयारी की थी, लेकिन गठबंधन नहीं हो सका और पार्टी ने एक दर्जन से अधिक सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा।

पिछले चुनाव में छाप छोड़ने में नाकाम रही थी सपा
पार्टी जहां पिछले चुनाव में कोई छाप छोड़ने में नाकाम रही, वहीं अब एक बार फिर राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। दिलचस्प बात यह है कि इस बार राजस्थान में कम्युनिस्ट पार्टियों की मदद से एक तीसरा मोर्चा बनाया जा रहा है जिसमें गैर-भाजपा और गैर-कांग्रेसी दल शामिल होंगे। सूत्रों ने बताया कि राजस्थान में कम्युनिस्ट पार्टियों के नेतृत्व वाले तीसरे मोर्चे में सपा अहम भूमिका निभाएगी। इस बीच, सपा मध्य प्रदेश की 55 विधानसभा सीटों पर ध्यान केंद्रित करेगी, जिसमें मुस्लिम और यादव मतदाताओं का मजबूत संयोजन है।

चुनाव में कौन होगा सहयोगी जल्द होगा फैसला
पार्टी के प्रवक्ता राजीव राय कहते हैं कि समाजवादी पार्टी एमपी और राजस्थान में पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगी। आने वाले समय में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से लगातार बैठकें भी की जाएंगी। इन चुनावों में शामिल होने का मकसद उन राज्यों में पार्टी की जड़ों को और मजबूती प्रदान करना है। इसको लेकर पार्टी की तरफ से बैठकों का दौर अभी से शुरू हो गया है। जहां तक इन राज्यों में किसी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का सवाल है तो इसपर कोई भी अंतिम निर्णय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से लिया जाएगा।












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