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अखिलेश यादव नहीं बन पाएंगे 'होटल मालिक', कोर्ट के रुख के बाद हमेशा के लिए रुका काम

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    लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के होटल पर शुरू हुआ विवाद अब थमता हुआ नजर आ रहा है। अखिलेश और उनकी पत्नी डिंपल यादव ने हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के सामने अपना पक्ष रखा हैं। जिसमें उन्होंने कहा है कि वो अब लखनऊ के ए-1 विक्रमादित्य मार्ग पर होटल नहीं बनाएंगे। वह उसका प्रयोग अपनी रिहाइश के तौर पर ही करेंगे। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इस आधार पर पूर्व मुख्यमंत्री को उक्त बंगले के जीर्णोद्धार की अनुमति दे दी है।

    akhilesh yadav drops plan to enter hotel business

    अखिलेश यादव ने पिछले दिनों लखनऊ के वीआईपी इलाके में होटल बनवाने की खबरों पर खूब सुर्खियां बटोरी थी। असल में अखिलेश और डिंपल की तरफ से एलडीए में एक प्रार्थना पत्र दायर किया गया था। जिसमें में विक्रमादित्य मार्ग स्थित जमीन 1A पर हेरिटेज होटल बनाने के लिए नक्शा पास करने का अनुरोध किया था। इस पत्र के वायरल होते ही अखिलेश विपक्ष के निशाने पर आ गए थे। इसी मामले को लेकर कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की गई थी।

    याचिका में कहा गया था कि इस वीवीआईपी जोन में जब सभी तरह के निर्माण पर रोक लगी हुई है तो फिर ये निर्माण कार्य कैसे हो सकता है। साथ ही इस बात का भी हवाला दिया गया था कि इस निर्माण स्थल के ठीक पीछे ही मुख्यमंत्री का सरकारी आवास है। याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने उक्त स्थान पर किसी तरह के निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी।

    कोर्ट में दायर अखिलेश यादव और डिंपल यादव की ओर से दायर अर्जी में कहा गया कि वो अब विक्रमादित्य मार्ग पर होटल का निर्माण नहीं करायेंगे, बल्कि इसको अपने रहने के लिए प्रयोग करेंगे। लखनऊ के विक्रमादित्य मार्ग पर प्लाट 1A पर 1940 में एक बंगला बनाया गया था, जिसे अखिलेश और डिंपल ने खरीदा था। दोनों की तरफ से दायर अर्जी में कहा गया है कि बंगला नंबर एक-ए पहले खसरा नंबर आठ सी के नाम से जाना जाता था जिसे उन्होंने उज्ज्वला रामनाथ से खरीदा था और नियमानुसार फ्रीहोल्ड करा लिया था। उक्त प्लाट पर 1940 में एक बंगला बनाया गया था। दोनों ने न्यायालय से अनुमति मांगी की इस बंगले को रहने लायक बनाने के लिये मेंटिनेंस का काम करने दिया जाए।

    इस पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अब्दुल मोईन की बेंच ने पूर्व मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी को अपने प्लाट पर बने पुराने बंगले के जीर्णोद्धार की अनुमति दे दी। साथ कि कोर्ट ने उक्त स्थान पर किसी भी तरह के नए निर्माण को ना कराने की चेतावनी भी दी। इस मामले में अब अगली सुनवाई पांच सितंबर को होगी।

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    English summary
    akhilesh yadav drops plan to enter hotel business

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