कभी डीपी यादव- अतीक अहमद को लेकर चाचा से ही भिड़ गए थे, अब मुख्तार के भाई को सपा में शामिल कर फिर घिरे अखिलेश
लखनऊ, 29 अगस्त: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव क्या चुनाव जीतने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। क्या वो एक बार फिर अपराधियों और बाहुबलियों को पार्टी में शामिल कर किसी तरह चुनाव जीतना चाहते हैं। पूर्वांचल के माफिया डॉन और मऊ सदर सीट से विधायक मुख्तार अंसारी के भाई सिबगतुल्लाह अंसारी को पार्टी में शामिल कराने के बाद अब विरोधी उनसे ये सवाल पूछ रहे हैं। हालांकि अखिलेश यादव कभी अपनी क्लीन इमेज और अपराधियों की दूरी की वजह से सपा का नया चेहरा बनने में कामयाब हुए थे लेकिन पिछले दो चुनावों से पार्टी को मिल रही हार ने क्या उन्हें पुराने रास्ते पर ही लौटने को मजबूर कर दिया है।

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्तार के भाई को सपा का दामन तो पकड़ा दिया लेकिन क्या वो अपनी क्लीन इमेज की छवि बना पाएंगे। विरोधी अब उन पर अपराधियों का साथ देने का आरोप लगा रहे हैं। दरअसल यह अखिलेश यादव अपराधियों और उनके परिजनों को पार्टी में शामिल कराने की खिलाफत कई बार कर चुके हैं। सिबगतुल्लाह अंसारी के भाई और गाजीपुर से वर्तमान सांसद अफजाल अंसारी ने कौमी एकता दल का गठन किया था। अंसारी बंधुओं की शिवपाल यादव से नजदीकी जगजाहिर थी। जब कौमी एकता दल के सपा में विलय का मामला उठा था तभी अखिलेश ने इसपर कड़ी नाराजगी जतायी थी। इसको लेकर चाचा शिवपाल और उनके बीच गहरे मतभेद भी पैदा हुए थे।
डीपी यादव और अतीक अहमद को लेकर चाचा से ही भिड़ गए थे अखिलेश
इसके अलावा अखिलेश उन उस समय भी पार्टी के भीतर अपराधियों को शामिल करने की बात उठाई थी जब पूर्व सांसद अतीक अहमद को पार्टी में शामिल कराने का प्रयास चल रहा था। तब भी अतीक को पार्टी में शामिल कराने को लेकर अखिलेश और शिवपाल में मतभेद हुए थे। कौशांबी में एक कार्यक्रम के दौरान तो अखिलेश ने अतीक को मंच पर ही धक्का दे दिया था। अतीक के अलावा बाहुबली डीपी यादव को भी लेकर अखिलेश ने अपने तेवर दिखाए थे। अखिलेश यादव ने 2012 के चुनाव से ठीक पहले पश्चिमी यूपी के माफिया डीपी यादव को पार्टी में शामिल करने का खुलेतौर पर विरोध किया था। यहां भी मामला यहीं फंसा था कि चाचा शिवपाल चाहते थे कि डीपी यादव की पार्टी में एंट्री हो।

मोहम्मदाबाद विधानसभा से दो बार विधायक रह चुके हैं सिबगतुल्लाह
माफिया डान और बीएसपी विधायक मुख्तार अंसारी के बड़े भाई सिबगतुल्लाह अंसारी के साथ उनके बेटे मन्नू अंसारी आज यानी शनिवार को समाजवादी पार्टी (सपा) में शामिल हो गए। मोहम्मदाबाद विधानसभा से दो बार विधायक रहे चुके मुख्तार के बड़े भाई सिबगतुल्लाह समर्थकों के साथ गाजीपुर से लखनऊ पहुंचे। सिबगतुल्लाह अंसारी गाजीपुर की मोहम्मदाबाद सीट से विधायक रह चुके हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की अलका राय से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अब एक बार फिर वो सपा का दामन थाम रहे हैं, ऐसे में लगभग तय है कि उन्हें या उनके बेट को 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा वहां से टिकट देगी। ऐसे में गाजीपुर की सियासत एक बार फिर से दिलचस्प होने जा रही है।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता आनंद दुबे कहते हैं कि,
'' सपा और अखिलेश यादव का यही चाल, चरित्र और चेहरा है। एक तरफ तो वो डीपी यादव और अतीक अहमद जैसे लोगों को पार्टी में शामिल करने का विरोध करते हैं दूसर तरफ माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के भाई को सपा में शामिल करवाते हैं। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि अखिलेश चुनाव जीतने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं। जनता उनकी हकीकत को देख रही है और इसका जवाब चुनाव के दौरान देगी।''
पूर्वांचल की दर्जनभर विधानसभाओं पर है अंसारी बंधुओं का असर
दरअसल मुख्तार अंसारी पूर्वांचल के लिए केवल माफिया नहीं बल्कि मुस्लिम यूथ के भीतर उनकी छवि जेम्स बांड सरीखी है। पूर्वांचल में दर्जनभर विधानसभा और लगभग पांच-छह जिले ऐसे हैं जहां अंसारी बंधुओं का दखल मुस्लिम वोटरों के बीच चलता है। ऐसा माना जाता है कि गाजीपुर, बलिया, सोनभद्र, मिर्जापुर, बनारस, आजमगढ़, चंदौली में मुस्लिम समुदाय के भीतर अंसारी बंधुओं की स्वीकार्यता है और ये लोग कई सीटों पर अपना सीधा दखल रखते हैं। चुनाव से पहले इन्हीं समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अखिलेश ने कौमी एकता दल को साथ लेने का खतरा मोल लिया है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो अखिलेश का फैसला एकतरह से भाजपा को फायदा ही पहुंचेगा क्योंकि विधानसभा में गैर मुस्लिम और गैर यादव जातियों का ध्रुवीकरण भाजपा के पक्ष में आसानी से हो सकता है।












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