ओम प्रकाश राजभर को काउंटर करने के लिए अखिलेश का प्लान; पूर्वांचल में सुखदेव राजभर का करेंगे इस्तेमाल

लखनऊ, 31 अगस्त: समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को पांच बार के बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर ने 31 जुलाई को अचानक ही राजनीति से सन्यास लेने का ऐलान कर दिया था। हालांकि उनके ऐलान के कुछ दिनों बाद समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव ने उनके घर जाकर सुखदेव राजभर से मुलाकात कर हाल चाल पूछा था। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो अखिलेश आने वाले चुनाव के लिहाज से संभावनाएं तलाशने गए थे कि क्या सुखदेव राजभर सपा में शामिल हो सकते हैं। हालांकि इसको लेकर अखिलेश ने एक तीर से कई निशाने साधने का प्रयास किया था।

अखिलेश यादव

बसपा को झटका देते हुए विधानसभा में आजमगढ़ जिले की दीदारगंज सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले राजभर ने 31 जुलाई को राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की और कहा कि उनका बेटा कमलाकांत (पप्पू) अखिलेश के नेतृत्व में काम करेगा। कमलाकांत, जो सपा अध्यक्ष और उनके पिता के बीच बैठक में मौजूद थे, उन्होंने कहा कि,

"मेरे पिता पिछले साल कोरोना से संक्रमित होने के बाद से उसकी जटिलताओं से जूझ रहे हैं। अखिलेश जी का दौरा राजनीतिक नहीं था। वह पिता के स्वास्थ्य के बारे में जानने आए थे। हम उनके आभारी हैं कि हमारे यहां आए।"

ओम प्रकाश राजभर के काउंटर के तौर पर रणनीति बना रही सपा
दरअसल, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर और बीजेपी की नजदीकीयों को देखते हुए अखिलेश यादव ने एक ऐसे नेता की तलाश शुरू की है जिसकी राजभर समुदाय में अच्छी खासी इमेज हो और राजनीतिक परिवार हो। सुखदेव राजभर बसपा के पुराने नेता रहे हैं और पूर्वांचल में राजभर समुदाय के वो बड़े नेता माने जाते हैं। इसको देखते हुए अखिलेश की उनकी मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि सुखदेव राजभर के बेटे को सपा में शामिल हर महत्वपूर्ण पद भी दिया जा सकता है।

मायावती

सुखेदव राजभर ने बहुजन आंदोलन कम होने का आरोप लगाया था
75 वर्षीय राजभर ने राजनीति से संन्यास की घोषणा करते हुए एक पत्र में चेतावनी दी थी कि बहुजन आंदोलन कमजोर हो रहा है। उन्होंने लिखा था कि,

"जैसा कि आप सभी जानते हैं कि मैं शुरू से ही बसपा का सक्रिय सदस्य रहा हूं। कांशीराम के साथ मैंने शोषित, हाशिए पर पड़े, दलितों और पिछड़ों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी है। आज के बदलते समय में, मुझे लगता है कि सरकार द्वारा शोषित, वंचित, दलित और पिछड़ों की आवाज को दबाया जा रहा है। इन परिस्थितियों में बहुजन आंदोलन कमजोर होता जा रहा है।'

बसपा के कई नेता छोड़ चुके हैं बहनजी का साथ
हाल के महीनों में बसपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने या तो पार्टी छोड़ दी है या अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। इसके बाद पिछले शनिवार को राज्य के पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी मायावती के नेतृत्व वाली बसपा को छोड़कर सपा में शामिल हो गए थे।

सपा का दामन थाम सकते हैं लालजी वर्मा और राम अचल राजभर

पंचायत चुनावों के दौरान इससे पहले "पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त" के आरोप में 3 जून को मायावती ने लालजी वर्मा और पार्टी के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक रामअचल राजभर को बाहर कर दिया था। लालजी वर्मा राज्य विधानसभा में बसपा के नेता थे, जबकि राम अचल राजभर पार्टी के राज्य प्रमुख थे और पिछली बसपा सरकारों में मंत्री के रूप में भी काम कर चुके थे। ऐसा माना जा रहा है कि ऐ दोनों नेता भी चुनाव से पहले सपा का दामन थाम सकते हैं।

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