दंगे के दर्द को मुस्लिम कार्ड से मिटाएंगे मुलायम
मुजफ्फरनगर। पश्चिम उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में हिंसा के बाद प्रदेश की समाजवादी सरकार सवालों के घेर में आ गई। हिंसा रोकने में नाकामयाब रही सपा सरकार को लोगों की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। दंगे के बाद जब हिंसा प्रभावित इलाकों में पीड़ितों का दर्ज बांटने के लिए जब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मुजफ्फरनगर पहुंचे तो उन्हें लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। लोगों ने उन्हें काले झंडे दिखा। सपा सरकार की हाय, हाय की।
लोगों द्वारा अखिलेश के विरोध और विरोधियों के बयान के बाद सपा सुप्रीमों समझ गए है कि मुजफ्फरनगर की हिंसा उनके लिए बड़ा ड्रा बैक बन सकता है। इसिलए उन्होंने अपना ड्रैमेज कंट्रोल करने के लिए मुस्लिम कार्ड खेलना शुरु कर दिया है। मुजफ्फरनगर में दंगों के बाद मुस्लिमों में सपा के प्रति फैली नाराजगी दूर करने के लिए मुलायम सिंह यादव ने जमकर 'मुस्लिम कार्ड' खेलने की तैयारी कर ली है।

मुसलमानों को दुबारा से अपने खाते में करने के लिए मुलायम ने मुस्लिम नेताओं को खुश करने की तैयारी शुरु कर दी है। सपा ने आनन फानन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में खासा दखल रखने वाले कांग्रेसी सांसद रशीद मसूद के भतीजे इमरान मसूद को सपा में शामिल कर लिया है। इमरान समूद सहारनपुर के मुजफ्फराबाद सीट से पूर्व विधायक है। दरअसल पूर्व केंद्रीय मंत्री सोमपाल शास्त्री के बागपत से सपा की उम्मीदवारी छोडऩे का ऐलान कर दिया। जिसके बाद फौरन सपा ने इमरान मसूद को पार्टी में शामिल कर पश्चिमी जिलों में मुस्लिम समीकरण का साधने की कोशिश की।
गौरतलब है कि इमरान मसूद पहले भी सपा में रहे हैं, लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले वह कांग्रेस में चले गए थे। इतना ही नहीं मुलायम सिंह ने बागपत के सिवाल खास विधानसभा क्षेत्र से विधायक गुलाम मुहम्मद को लोकसभा चुनाव का टिकट थमा दिया। दरअसल इस इलाके में जाट और मुस्लिम समुदाय का बहुल्य है। ऐसे में बागपत में राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजित सिंह के सामने जाट प्रत्याशी खड़ा ना कर सपा ने मुस्लिम प्रत्याशी खड़ा किया है।












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