कौन हैं तमिलनाडु राज्यपाल Rajendra Arlekari? जिन पर Vijay Thalapathy ने भाजपा का पक्ष लेने का लगाया आरोप
Who is Tamil Nadu Governor Rajendra Arlekar: तमिलनाडु चुनाव परिणाम के बाद यहां सियासी राजनीति में नया भूचाल आ गया है। राज्य में पहली बार चुनाव में उभरी तीसरी पार्टी TVK बहुमत के जादुई आंकड़े से चंद सीटें के लिए सरकार बनाने के लिए संघर्ष कर रही है। TVK प्रमुख विजय थलापति गुरुवार को दूसरी बार राजभवन पहुंचे लेकिन राज्यपाल से तमिलनाडु में सरकार बनाने का निमंत्रण न मिलने पर उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।
गर्वनर राजेंद्र आर्लेकर ने साफ शब्दों में कहां जब तक 118 विधायकों के हस्ताक्षर वाली लिस्ट टीएमसी नहीं जमा करती, तब तक शपथ ग्रहण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी और समर्थन कागजों पर पूरी तरह पक्का होना चाहिए।

इस घटना से राजभवन के बाहर मौजूद उनके समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा, जिन्होंने राज्यपाल पर जानबूझकर देरी करने और भाजपा का पक्ष लेने का आरोप लगाया। विजय ने दावा किया है कि उनके पास कांग्रेस विधायकों सहित कुल 112 विधायकों का समर्थन है। इतना स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया जा रहा है।
सरकार बनाने का आमंत्रण ना देने पर बुरे फंसे तमिलनाडु राज्यपाल
विजय थलापति के समर्थकों ने दावा किया बहुमत साबित करने का सही मंच विधानसभा है, न कि राजभवन। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मशहूर एस.आर. बोम्मई केस का हवाला देते हुए कहा कि फ्लोर टेस्ट ही असली तरीका है। समर्थकों ने तर्क दिया कि 108 विधायकों के साथ TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, ऐसे में संविधान के अनुसार राज्यपाल को विजय को सरकार बनाने के लिए बुलाना चाहिए था।
हालांकि पीटीआई के अनुसार, राज्यपाल ने विजय को आश्वासन दिया है कि वह सरकार बनाने के लिए किसी अन्य पार्टी को न्योता नहीं देंगे। हालांकि, उन्होंने एक प्रक्रिया पूरी करने को कहा है, जिसके तहत विजय को अपने समर्थक विधायकों के हस्ताक्षर वाली सूची दोबारा जमा करनी होगी।
कौन हैं राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर? भाजपा से क्या है कनेक्शन
राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर का जन्म 23 अप्रैल 1954, गोवा में हुआ। भारतीय जनता पार्टी से जुड़े वरिष्ठ राजनेता और वर्तमान में तमिलनाडु के वर्तमान राज्यपाल हैं। वे लंबे समय तक गोवा की राजनीति में सक्रिय रहे हैं, गोवा में उन्होंने विधायक, मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले। बाद में उन्हें केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया गया और उन्होंने हिमाचल प्रदेश, बिहार तथा केरल जैसे राज्यों में भी राज्यपाल की जिम्मेदारी निभाई है। RSS से जुड़े शुरुआती राजनीतिक जीवन से लेकर संवैधानिक पदों तक उनका सफर संगठन और प्रशासन दोनों क्षेत्रों में अनुभव को दर्शाता है।












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