2024 के आम चुनाव से पहले UP में बन सकता है नया मोर्चा, जानिए वो 5 कारण जिनको लेकर उठा है सियासी तूफान

लखनऊ, 29 अप्रैल: उत्तर प्रदेश में विधानसभा का चुनाव तो बीत गया है लेकिन यहां सियासी उठापटक अभी भी जारी है। चुनाव के बाद एक तरफ जहां अखिलेश यादव के खास आजम खान अपनी बगावत को लेकर सुर्खियों में है वहीं दूसरी ओर अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव भी उनके लिए परेशानियां खड़े कर रहे हैं। चुनाव से पहले अखिलेश ने जयंत और राजभर को लेकर एक मोर्चा बनाया था बीजेपी से मुकाबला करने के लिए लेकिन चुनाव में करारी हार मिली। लेकिन यूपी में अब नए समीकरणों के बीच क्या नया मोर्चा आकार लेगा। यानी शिवपाल और आजम मिलकर अब ओवैसी, चंद्रशेखर और राजभर को लेकर एक नया मोर्चा बनाने की कवायद में जुटे हैं। यदि शिवपाल अपने मकसद में कामयाब हुए तो यह मोर्चा अखिलेश और उनके गठबंधन के साथियों के लिए काफी परेशानियां पैदा कर सकता है।

आजम और शिवपाल मिलकर बना सकते हैं नया मोर्चा

आजम और शिवपाल मिलकर बना सकते हैं नया मोर्चा

यूपी में जिस तरह से नया मोर्चा बनने की अटकलें लगाई जा रही हैं उसके पीछे दो बड़े नाम आजम खान और शिवपाल यादव ही हैं। शिवपाल यदि आजम को साथ लेंगे तो एक बड़ा वर्ग उनके साथ जुड़ जाएगा। शिवपाल ने पहली बार मुलायम पर हमला बोलकर मुस्लिमों का भरोसा जीतन की कोशिश की है। शिवपाल ने कहा था कि मुलायम चाहते तो आजम खां बाहर आ सकते थे। ऐसा पहली बार हुआ जब मुसलमानों को खुश करने के लिए शिवपाल ने अपने बड़े भाई पर हमला बोला है। इसके पीछे की गणित यही है कि इससे मुसलमानों की सिमपैथी हासिल की जाए और आजम को अपने पाले में किया जाए।

बाबूसिंह कुशवाहा, द्ददू प्रसाद को मिल सकती है जगह

बाबूसिंह कुशवाहा, द्ददू प्रसाद को मिल सकती है जगह

यूपी में यदि आजम और शिवपाल एक साथ आए तो कई ऐसे लोग भी इससे जुड़ेंगे जो अखिलेश और मायावती से छिटके हैं। इनमें सबसे बड़ा नाम बाबसिंह कुशवाहा का है। एक समय था जब बाबूसिंह कुशवाहा बसपा के बड़े नेताओं में शुमार होते थे और उन्हें मायावती का खास माना जाता था लेकिन बसपा की सरकार जाने के बाद घोटालों की जांच में बाबूसिंह जेल चले गए और मायावती ने उनका साथ छोड़ दिया। बाद में बाबू सिंह कुशवाहा ने अपनी अलग पार्टी बना ली। बताया जाता है कि बाबू सिंह कुशवाहा और द्ददू प्रसाद जैसे नेताओं से शिवपाल की बात हो चुकी है और वो इस छतरी के नीचे आने पर सहमत हो गए हैं।

अखिलेश के गठबंधन के साथी भी छिटक सकते हैं

अखिलेश के गठबंधन के साथी भी छिटक सकते हैं

शिवपाल और आजम के मोर्चे ने आकार लिया तो अखिलेश के साथ खड़े उनके सहयोगी भी उनके पाले में खड़े हो सकते हैं। पूर्वांचल के नेता ओम प्रकाश राजभर हों या फिर पश्चिम में जाटों के नेता जयंत चौधरी हों। आजम और शिवपाल मिलकर दोनों को साध सकते हैं। इसमें भी रोचक यह है कि आजम के समर्थन के लिए जयंत चौधरी उनके घर जा चुके हैं और वह उनको जेल से छोड़े जाने की वकालत कर चुके हैं। इन दोनों को तोड़ने में शिवपाल और आजम को ज्यादा परेशानी भी नहीं होगी।

चंद्रशेखर-आजम मिलकर बनाएंगे दलित-मुस्लिम गठजोड़

चंद्रशेखर-आजम मिलकर बनाएंगे दलित-मुस्लिम गठजोड़

यूपी में बनने वाले इस संभावित मोर्चे में दलित नेता चंद्रशेखर भी आ सकते हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान चंद्रशेखर अखिलेश के साथ गठबंधन में शामिल होना चाहते थे लेकिन अखिलेश ने उन्हें एक से अधिक सीट देने से इंकार कर दिया था। फिर चंद्रशेखर ने खुद सीएम योगी के खिलाफ गोरखपुर से चुनाव लड़ा था। चंद्रशेखर भी यूपी में बन रहे नए सियासी समीकरण पर पूरी तरह से नजर बनाए हुए हैं। राजनीतिक पंडितों की माने तो यदि आजम और शिवपाल के साथ चंद्रशेखर आए तो यूपी में दलित-मुस्लिम गठजोड़ नया आकार ले सकता है। यूपी में यह गठबंधन बना तो अखिलेश और मायावती को तगड़ा झटका लगेगा।

आम आदमी पार्टी भी नए मोर्चे में हो सकती है शामिल

आम आदमी पार्टी भी नए मोर्चे में हो सकती है शामिल

यूपी में आम चुनाव से पहले नए मोर्चे की आहट सुनाई दे रही है। इस मोर्चे में आम आदमी पार्टी की एंट्री भी हो सकती है क्योंकि विधानसभा चुनाव के दौरान आप के यूपी प्रभारी संजय सिंह ने अखिलेश यादव से मुलाकात की थी लेकिन वह गठबंधन में शामिल नहीं हुए थे। इस नए समीकरण में आप को जगह मिल सकती है। आप के लिए भी यह फायदेमंद होगा क्योंकि वह अभी यूपी के सभी जिलों में अपना सांगठनिक ढांचा मजबूत करने में जुटी हुई है। एसे में आजम और शिवपाल का साथ यूपी में आप को खड़े होने में मददगार साबित हो सकता है।

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