सपा राज में घोटाला कर हुए बीमार, योगी राज ने स्वस्थ कर भेजा जेल

सपा राज में लाखों रुपए का घोटाला करने वाला एक बैंक मैनेजर फर्जी रोगी बनकर अस्पताल में भर्ती हो गया। योगी राज में उसे अस्पताल से निकालकर जेल भेजा गया।

इलाहाबाद। सपा नेताओं के करीबी रहे एक बैंक मैनेजर सवा करोड़ के घोटाले में फंसे तो जेल जाने की बजाय अस्पताल के एसी रूम में शिफ्ट हो गये। सफेदपोश लोगों ने पुलिस से लेकर अस्पताल तक सारी व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी। जांच फाइल बंद हो गई और पिछले 10 माह से मैनेजर उसी अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं। लेकिन जाने कौन सा मर्ज उन्हें हो गया था, जो ठीक ही नहीं हो रहा था। लेकिन योगी सरकार ने जेल में बंद बंदियों की सूची मांगी तो मानो जादू हो गया। अचानक से मैनेजर की बीमारी छू मंतर हो गई । पुलिस टीम ने पुलिस अभिरक्षा में मैनेजर को अस्पताल से जेल में शिफ्ट कर दिया।

सपा राज में घोटाला कर हुए बीमार, योगी राज ने ठीक कर भेजा जेल

बीमारी का बहाना कर अस्पताल पहुंचे
लखनऊ के आशियाना के रहने वाले सुनील चतुर्वेदी काफी पहुंच वाले शख्स माने जाते हैं। बीते वर्ष वह प्रतापगढ़ जिले में पंजाब नेशनल बैंक की कुंडा शाखा में मैनेजर थे। मैनेजर रहते हुये सुनील ने 25 लोगों के नाम एक करोड़ 30 लाख का लोन पास कर दिया। लेकिन लोन पाने वाले का न कोई पता है न गारंटर । शिकायत हुई तो जो नाम-पता बैंक में दर्ज भी था वह पूरी तरह से फर्जी था। इस मामले में सुनील के खिलाफ गबन का मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस ने सुनील को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। सफेदपोश लोगों ने अपनी गुणा-गणित लगाई तो जांच पूरी होने, ट्रायल चलने व जमानत मिलने तक के बीच का रास्ता खोज निकाला। सुनील को बीमारी का बहाना कर अस्पताल पहुंचा दिया गया । वहां उन्हें बकायदा एसी प्राइवेट रूम के साथ सारी सुख-सुविधा उपलब्ध करा दी गई । आजकल मैनेजर आईपीएल मैच का लुत्फ उठा रहे थे। दिनभर वीआईपी गाड़ियों का जमघट लगा रहता। दोस्त यार, नाती -रिश्तेदार भी जुटे रहते थे। लेकिन अब उन्हें जेल की हवा खानी पड़ेगी।

बीरबल की खिचड़ी सरीखा था मर्ज
बात पिछले साल 1 जून 2016 की है। जब बीमारी की बात कहकर जेल प्रशासन ने सुनील को इलाज के लिए जिला अस्पताल भेज दिया था। अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें प्राइवेट वार्ड में रखा गया। मैनेजर साहब को बीरबल की खिचड़ी सरीखा कोई मर्ज था जो ठीक होने का नाम ही नहीं ले रहा था। दस माह से मैनेजर साहब वहीं 'स्वास्थ्य लाभ' ले रहे थे। लेकिन जिले के सबसे टाप डॉक्टर उनका मर्ज ठीक नहीं कर पा रहे थे। एक अजीब बात यह थी मैनेजर साहब की बीमारी बड़ी जटिल थी। क्योंकि बीमारी को लेकर भी डॉक्टर अलग-अलग बयान दे रहे थे। अभी एकदिन पहले ही अस्पताल के सीएमएस ने शुगर की बीमारी बताई । तो एक दूसरे डाक्टर ने मैनेजर साहब को हृदय की समस्याओं से ग्रस्त बताया। लेकिन एक तीसरे डाक्टर ने तो समस्या की जड़ ही बता दी। वह बोले कि आपरेशन हुआ है और हालत गंभीर है।

योगी सरकार की सूची ने स्वस्थ कर दिया
सूबे की नयी योगी सरकार ने जेल में बंद कैदियों की सूची मांगी तो फरमान प्रतापगढ भी पहुंचा। ऐसे में सरकार को यह जानकारी देना कि दस माह कोई बीमार है। जेल प्रशासन को सही नहीं लगा और ताबड़तोड़ मैनेजर साहब को वापस अपराधियों की ससुराल कही जाने वाली जगह यानी जेल में शिफ्ट कर दिया। दस महीने से बैंक मैनेजर को ठीक नहीं कर पा रहे डॉक्टरों ने शनिवार की शाम उन्हें फिट बता दिया। अस्पताल ने सुनील के स्वस्थ होने पर अपनी मुहर लगा दी और बैंक मैनेजर को अस्पताल से जेल शिफ्ट करा दिया। सीएमएस महेन्द्र विक्रम सिंह ने बताया कि सुनील के ऑपरेशन के बाद शुगर और हार्ट का मरीज होने के कारण रोका गया था। शनिवार को पट्टी बदलवाई गई तो घाव सूखा हुआ था इसलिए उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। जबकि डॉक्टर मनोज खत्री ने बताया कि मर्ज पर काबू पा लिया था, ऑपरेशन के चलते रोका गया था।

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