सोलोमन आइलैंड्स ने अमेरिकी जहाज को एंट्री देने से इनकार किया

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नई दिल्ली, 26 अगस्त। प्रशांत महासागर में नियमित गश्त के दौरान अमेरिकी कोस्ट गार्ड के एक जहाज को रिफ्यूलिंग की जरूरत पड़ी. जहाज ने सोलोमन आइलैंड्स के अधिकारियों से संपर्क किया. अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक द्वीपीय देश की सरकार ने कॉल का जवाब नहीं दिया. पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक अमेरिकी कोस्ट गार्ड के जहाज ऑलिवर हैनरी को रूटीन के तहत सोलोमन आइलैंड्स जाना था.

यूएस कोस्ट गार्ड की जनसंपर्क अधिकारी क्रिस्टीन कैम के मुताबिक, "सोलोमन आइलैंड्स की सरकार ने होनिआरा में जहाज की रिफ्यूलिंग और दूसरे प्रावधानों को लेकर अमेरिकी सरकार की डिप्लोमैटिक क्लीयरेंस की दरख्वास्त का कोई जवाब नहीं दिया."

सोलोमन आइलैंड्स और चीन के रिश्ते

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, उसने सोलोमन सरकार का पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन अभी तक प्रतिक्रिया नहीं मिली है. सोलोमन आइलैंड्स ने मई 2022 में चीन के साथ एक सुरक्षा समझौता किया. इस संधि के बाद से ही सोलोमन आइलैंड्स और अमेरिका के रिश्ते बिगड़ रहे हैं.

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ऐसी आशंकाएं हैं कि चीन सोलोमन आइलैंड्स में मिलिट्री बेस बना रहा है. हालांकि दोनों देशों ने इन रिपोर्टों को खारिज किया है. लीक हुए एक दस्तावेज के मुताबिक दोनों देशों के बीच सुरक्षा समझौता हुआ है. इसके तहत सोलोमन आइलैंड्स चीनी नौसेना के जहाजों को अपने बंदरगाहों में रुकने की अनुमति दे चुका है.

सोलोमन आइलैंड्स में विदेश मंत्रालय वांग यी

गैरकानूनी फिशिंग और सुरक्षा का मसला

अमेरिकी कोस्ट गार्ड का जहाज ऑलिवर हेनरी दक्षिण प्रशांत महासागर में गैरकानूनी फिशिंग पर नजर रखने के लिए गश्त लगा रहा था. इस दौरान जहाज ने सोलोमन आइलैंड्स की राजधानी होनिआरा के पोर्ट में दाखिल होकर ईंधन भरने की अनुमति मांगी. यह जानकारी एक ईमेल के जरिए अमेरिकी कोस्ट गार्ड के एक अधिकारी ने रॉयटर्स को दी. सोलोमन आइलैंड्स में एंट्री नहीं मिलने के बाद कोस्ट गार्ड के जहाज को पापुआ न्यू गिनी भेजना पड़ा.

ऐसी रिपोर्टें हैं कि वहां ब्रिटिश नौसेना का गश्ती जहाज एचएमएस स्पे भी था. वह भी पेट्रोलिंग ऑपरेशन में शामिल था. ब्रिटिश नौसेना का जहाज भी फिजी, पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन आइलैंड्स और वानुआतु के एक्सक्लूसिव जोन में गैरकानूनी रूप से मछली पकड़ने वालों पर नजर रखने के इरादे से काम कर रहा था. सोलोमन आइलैंड्स ने ब्रिटिश नौसेना को भी अनुमति नहीं दी.

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एचएमएस स्पे में फिजी के नेवी अफसर भी मौजूद थे. इन समुद्री जहाजों के साथ ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के लंबी उड़ान भरने वाले विमान मिलकर काम करते हैं. ये सिस्टम इलाके में गैरकानूनी रूप से गतिविधियों में लगे जहाजों पर नजर रखते हैं.

ब्रिटेन की रॉयल नेवी के प्रवक्ता ने ईमेल पर भेजे बयान में कहा, "जहाजों के प्रोग्राम हर वक्त निगरानी में होते हैं, और उनका बदलना भी एक रूटीन प्रैक्टिस है. ऑपरेशनल सिक्योरिटी के कारण हम इसे विस्तार से नहीं बताते हैं."

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अमेरिका और ब्रिटेन का रुख

पैसिफिक आइलैंड्स फोरम के लिए बनाई गई फिशरीज एजेंसी में प्रशांत क्षेत्र के 17 देश शामिल हैं. एजेंसी का सर्विलांस सेंटर सोलोमन आइलैंड्स की राजधानी होनिआरा में हैं. एजेंसी प्रशांत महासागर में गैरकानूनी ढंग से मछली पकड़ने वाले जहाजों पर नजर रखती है. ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, न्यूजीलैंड और फ्रांस इस काम में एजेंसी की मदद करते हैं.

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यूएस कोस्ट गार्ड की जनसंपर्क अधिकारी क्रिस्टीन कैम ने अमेरिकी रुख की झलक देते हुए कहा, "अमेरिकी विदेश मंत्रालय सोलोमन द्वीप की सरकार के साथ संपर्क में है और उम्मीद करता है कि भविष्य में अमेरिकी जहाजों को क्लीयरेंस दी जाएगी." रॉयल नेवी ने भी अपने बयान में कहा है कि उसे उम्मीद है कि भविष्य में उसके जहाज सोलोमन द्वीप जा सकेंगे.

ओएसजे/एनआर (रॉयटर्स)

Source: DW

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