रोहित यादव : भीख मांगने वाले हाथों में GRP सिपाही ने थमाई कलम, ट्रांसफर पर पूरा गांव फूट-फूटकर रोया, VIDEO

उन्नाव, 22 अगस्त: उन्नाव के जीआरपी थाने में तैनात सिपाही रोहित यादव का ट्रांसफर हो गया। रोहित यादव को रविवार को फूल-माला पहनाकर गाजे-बाजे के साथ विदा किया गया। इस दौरान गांव के सैकड़ों बच्चे भी पहुंचे। बच्चों के आंखों में आंसू थे। लड़के-लड़कियां सभी सिपाही से लिपटकर रोने लगे। रोहित ने भी बच्चों को प्यार किया और उन्हें मन लगाकर पढ़ने और कुछ बनकर दिखाने का वादा लिया। इस दौरान गांव के प्रधान और सभी ग्रामीण मौजूद रहे। एक जीआरपी सिपाही की अनोखी विदाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। आइए जानते हैं जीआरपी सिपाही ने गांव और जरूरतमंद बच्चों के लिए ऐसा क्या किया कि उन्हें अपने से दूर जाता देख सभी भावुक हो गए।

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    भीख मांगने वाले बच्चों को दी मुफ्त शिक्षा

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    मूल रूप से इटावा के रहने वाले रोहित यादव की पहली पोस्टिंग झांसी में सिविल पुलिस में हुई थी। जून 2018 में उन्हें उन्नाव जीआरपी थाने में तैनाती मिली। रोहित की ड्यूटी उन्नाव-रायबरेली पैसेंजर ट्रेन में लगाई गई थी। ड्यूटी के दौरान जब भी ट्रेन सिकंदरपुर कर्ण ब्लॉक के गांव कोरारी कला में कोरारी स्टेशन पर रुकती तो गरीब परिवारों के बच्चे भीख मांगने आ जाते थे। रोहित रोजाना उन्हें भीख मांगते हुए देखते थे। एक दिन रोहित ने इन बच्चों को पढ़ाने और कुछ काबिल बनाने की ठानी।

    'हर हाथ में कलम पाठशाला' की स्थापना की, ड्यूटी के बाद बच्चों को पढ़ाते थे रोहित

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    रोहित अपनी ड्यूटी पूरी होने के बाद गांव पहुंचे और बच्चों के माता-पिता से मिले। उन्हें बच्चों की पढ़ाई करवाने के लिए प्रेरित किया। परिवारवाले भी रोहित की बात से सहमत हो गई। इसके बाद रोहित ने सितंबर 2018 में गांव के बाहर एक पेड़ के नीचे पाठशाला की शुरुआत की। वह रोज ड्यूटी के बाद पांच बच्चों को पढ़ाने जाते थे। धीरे-धीरे छात्रों की संख्या बढ़ती गई। डेढ़ साल में 80 से ज्यादा छात्र हो गए। रोहित ने 'हर हाथ में कलम पाठशाला' की स्थापना की।

    5 बच्चों के साथ की शुरुआत, अब पढ़ने आते हैं 125 बच्चे

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    रोहित ने इतनी बड़ी संख्या में आने वाले बच्चों के बारे में तत्कालीन डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद से मुलाकात कर मुहिम की जानकारी दी, जिसके बाद उन्होंने रोहित को पंचायत भवन में पढ़ाने की अनुमति दे दी। गांव के प्रदीप कुमार, बसंत, रंजीत, मंगल और पूजा देवी भी जुड़ गए और बच्चों को पढ़ाने लगे। बताया गया कि वर्तमान में इस पाठशाला में 125 छात्र पढ़ने आते हैं।

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