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म्यांमार: विरोधियों के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई की आशंका

वॉशिंगटन, 11 नवंबर। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बुधवार को म्यांमार के सैन्य जुंटा और रखाइन प्रांत में एक बड़े मिलिशिया समूह के लड़ाकों के बीच हिंसा की खबरों का हवाला देते हुए यह बयान जारी किया. सुरक्षा परिषद ने बयान में कहा, "हालिया घटनाक्रम रोहिंग्या शरणार्थियों और आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की स्वैच्छिक, सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थायी वापसी के लिए विशेष रूप से गंभीर चुनौतियां हैं"

Provided by Deutsche Welle

रिपोर्टों के मुताबिक सैन्य जुंटा चिन प्रांत में बड़ी संख्या में भारी हथियारों और सैनिकों को तैनात कर रही है. सैन्य जुंटा ने इसी साल 1 फरवरी को चुनी हुई सरकार को सत्ता से हटा दिया था.

ब्रिटेन द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट बयान में म्यांमार की सेना से संयम बरतने का भी आह्वान किया गया है. बयान में कहा गया है, "हम म्यांमार के लोगों की इच्छाओं और हितों के अनुसार बातचीत और सुलह को प्रोत्साहित करते हैं." दक्षिणपूर्व एशियाई देश में फरवरी के बाद से अराजकता का माहौल है, जिसमें जातीय सशस्त्र संगठनों से जुड़े सीमावर्ती क्षेत्रों में असंतोष और बढ़ती लड़ाई पर क्रूर कार्रवाई हुई है.

फरवरी के विद्रोह के कुछ ही दिनों बाद सैन्य जुंटा ने अराकन सेना के साथ अपने युद्धविराम की पुष्टि की, जो जातीय रखाइन आबादी के लिए एक स्वतंत्र रखाइन राज्य के लिए एक खूनी युद्ध लड़ रही है. युद्धविराम ने सेना को स्थानीय "आत्मरक्षा बलों" के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुमति दी, जो विद्रोह के बाद से देश भर में सेना के खिलाफ बनाई गई हैं.

अराकन सेना के एक प्रवक्ता ने बुधवार को एएफपी को बताया कि संघर्ष तब शुरू हुआ जब म्यांमार के सैनिकों ने क्षेत्र में प्रवेश किया. झड़पों से मरने वालों की संख्या का तत्काल पता नहीं चल पाया है. सैन्य जुंटा ने अभी तक चिन की ताजा स्थिति पर कोई टिप्पणी नहीं की है. फरवरी के विद्रोह के बाद से दक्षिण पूर्व एशियाई देश उथल-पुथल में है. सेना विरोधियों और लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं पर नकेल कसना जारी रखे हुए है. झड़पों में अब तक सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं, जबकि हजारों को जेल हो चुकी है.

सेना ने 1 फरवरी को नागरिक नेता आंग सान सू ची की पार्टी की सरकार को उखाड़ फेंका और सत्ता पर कब्जा कर लिया. सेना प्रमुख मिन आंग हलिंग ने सू ची की नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) के सदस्यों को "आतंकवादी" कहा था और उन पर विद्रोह के बाद से देश में हिंसा भड़काने का आरोप लगाया था. सैन्य जुंटा ने 2020 के आम चुनाव में सत्ता की अपनी जब्ती को सही ठहराते हुए धांधली का आरोप लगाया था. सेना ने पिछले चुनाव परिणाम को रद्द कर दिया था.

एए/सीके (एएफपी)

Source: DW

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