Ujjain Mahakal Lok: मूर्तियों की 10 साल लाइफ, 7 महीने में ही क्यों हो गई ढेर? 5 साल में बना पाए थे कलाकार
छोटा सा कोई मकान भी बनता है तो भविष्य में आंधी-तूफ़ान भूकंप जैसी आपदा का ख्याल रखकर निर्माण कराया जाता हैं। लेकिन मध्य प्रदेश में उज्जैन महाकाल लोक में ऐसा क्यों हुआ कि 30 किमी रफ्तार की आंधी में मूर्तियां गिरती चली गई।

Ujjain Mahakal Lok Idols Fell: 'ये और बात की आंधी हमारे बस में नहीं, मगर चराग़ जलाना तो इख़्तियार में है'। अज़हर इनायती के ये लाइनें एमपी के उज्जैन महाकाल लोक में आई आंधी पर फिट बैठती हैं। ताश के पत्तों की तरह ढेर हुई सप्तऋषियों की मूर्ति ने क्वालिटी को उखाड़ दिया है।
विपक्ष हो या फिर इस सिद्ध जगह पर कदम रखने वाले लोग सत्ता पक्ष से सवाल इसलिए भी कर रहे है क्योकि जिस बुनियाद के सहारे महाकाल लोक का सपना देखा गया, वह दो-चार या पचास-सौ करोड़ का नहीं बल्कि 856 करोड़ का प्रोजेक्ट हैं। पहला फेज 351 करोड़ रुपये में पूरा हुआ।
900 मीटर लंबे इस कॉरिडोर के पहले चरण में धार्मिक महत्व को दर्शाती कई मूर्तियां स्थापित की गई हैं। इनमें सप्तऋषियों की 7 मूर्तियां भी शामिल थी। महज 30 किमी रफ्तार की आंधी के झोंके में 6 मूर्तियां ऐसे ढेर हुई, जैसे हवा में कागज का टुकड़ा उड़ जाता हैं।

10 से 25 फीट ऊंचाई की इन मूर्तियों की गुणवत्ता के अलावा महाकाल लोक में अन्य निर्माण कार्यों पर तराना से कांग्रेस विधायक महेश परमार ने कई गंभीर आरोप लगाये थे। कंपनी के ठेकेदार मनोज भाई पुरुषोत्तम भाई बाबरिया के खिलाफ लोकायुक्त में भी शिकायत की गई थी।

जब जांच हुई तो लोकायुक्त की प्रथम दृष्टया जांच में आरोप सही पाए जाने की बात भी सामने आ चुकी हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में भी इसके दावे किए गए हैं। बताया गया कि तीन आईएएस तत्कालीन उज्जैन कलेक्टर और स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अध्यक्ष आशीष सिंह, उज्जैन स्मार्ट सिटी के तत्कालीन कार्यपालक निदेशक क्षितिज सिंघल और तत्कालीन नगर निगम आयुक्त अंशुल गुप्ता समेत 15 अफसरों को नोटिस जारी किया गया था।

तेज आंधी में गिरकर क्षतिग्रस्त हुई मूर्तियों को लेकर कांग्रेस जिन बिंदुओं पर सवाल उठा रही हैं, उसके जबाव में स्थानीय प्रशासन कह रहा है कि ठेके की शर्तों के अनुसार ठेकेदार कंपनी नई मूर्तियां लगाएगी। इस बीच सवाल यह भी उठ रहा है कि कुल 136 मूर्तियों में जब 6 मूर्तियों का ऐसा हाल हुआ तो आने वाले वक्त में बाकी 130 मूर्तियों का क्या होगा?

कुछ रिपोर्ट्स पर यदि यकीन करें तो इन मूर्तियों की लागत 15 करोड़ रुपये रही, औसतन हर मूर्ति को बनाकर लगाने में 11 लाख रुपये खर्च हुए। क्षतिग्रस्त 6 मूर्तियों का हिसाब जोड़ा जाए तो नुकसान 66 लाख रुपये पहुंचता हैं। टेंडर की शर्तों के हिसाब से बाबरिया कंपनी नई मूर्ति भी लगा देगी, लेकिन यह जानना जरुरी है कि शुरू में गुणवत्ता युक्त की काम की दुहाई के सामने ये मूर्तियां 30 किमी रफ्तार की आंधी सहन क्यों नहीं कर पाई?

जबकि निर्माण कार्य के वक्त जब इन्हें स्थापित किया गया था तो कंपनी ने इनकी 10 साल लाइफ का दावा किया था। कई नेताओं ने तो यह तक बयान दिए थे कि भूकंप में भी ये हिलेंगी तक नहीं। बताया गया था कि ये मूर्तियों गुजरात, ओडिशा और राजस्थान के कलाकारों ने 5 साल में तैयार किया हैं। अब नई मूर्तियां लगाने के मामले में यह स्पष्ट नहीं है कि कंपनी क्षतिग्रस्त मूर्तियों को ही रिपेयर करके लगाएगी या फिर नए सिरे से निर्माण होगा? यदि ऐसा होता है तो फिर नई मूर्तियां बनने में 5 साल लगेंगे।
अब इस मामले में ठेकेदार कंपनी का बयान भी सामने आया है। कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर संजय पटेल का कहना है कि तेज हवा से बवंडर बना, जिससे मूर्तियों के अंदर के ज्वाइंट कमजोर पड़ गए। अंदर का स्ट्रक्चर टूटा तो मूर्तियां जगह से तेज आंधी में गिर गई। आगे इस कमी को दूर करने का दावा किया जा रहा हैं।












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