उज्जैन पुलिस ने महाकाल मंदिर के सामने आरोपी का जुलूस निकाला, श्रद्धालु हुए हैरान
उज्जैन के महाकाल मंदिर के पास शनिवार शाम को पुलिस ने एक आरोपी का जुलूस ढोल-बाजों के साथ निकाला। यह दृश्य देखकर मंदिर में आए देशभर के श्रद्धालु हैरान रह गए। आरोपी, जो घटना के बाद पुलिस गिरफ्त में था, ठीक से चल भी नहीं पा रहा था और उसे दो पुलिसकर्मी कंधे से सहारा देकर सड़क पर ले जा रहे थे।
आरोपी का यह जुलूस पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई का हिस्सा था और पुलिस का कहना है कि यह उनका तरीका था ताकि आरोपी को उसके अपराध का अहसास हो सके और दूसरों के लिए एक संदेश जाए।

शिवपाल और रेहान के बीच विवाद
यह घटना महाकाल थाना क्षेत्र के जयसिंहपुरा में स्थित श्री महाकाल महालोक पार्किंग के पास हुई थी। टीआई नरेंद्र सिंह परिहार के अनुसार, दो ऑटो चालकों-शिवपाल सिंह पवार और रेहान इलाही के बीच सवारी बैठाने को लेकर विवाद हुआ था। विवाद इतना बढ़ा कि रेहान ने शिवपाल को चाकू से हमला कर घायल कर दिया। आरोपी ने शिवपाल पर चाकू से करीब सात वार किए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना के बाद, स्थानीय लोगों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस को सूचित किया और घायल शिवपाल को जिला अस्पताल भेजा। पुलिस ने तुरंत आरोपी रेहान इलाही को गिरफ्तार कर लिया और उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया। पुलिस का कहना है कि आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी तरह की सजा से बचने का उसे कोई मौका नहीं मिलेगा।
पुलिस का संदेश
टीआई नरेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि पुलिस का यह तरीका किसी को डराने या दबाने का नहीं, बल्कि यह दर्शाने का है कि अपराधियों को उनके किए गए अपराध का परिणाम भुगतना होता है। पुलिस की इस कार्रवाई से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि किसी भी प्रकार की हिंसा और अपराध को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा, और ऐसे अपराधियों को कानून के शिकंजे में कस लिया जाएगा।
पहले भी निकाला था जुलूस
यह पहली बार नहीं था जब पुलिस ने इस तरह का जुलूस निकाला। इससे पहले, शुक्रवार को भी पुलिस ने 14 आरोपियों का जुलूस निकाला था। इस तरह की कार्रवाई पुलिस द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए की जाती है कि समाज में अपराध के खिलाफ सख्त संदेश जाए और लोगों में अपराध करने से पहले उसके परिणामों के बारे में सोचने की आदत बने।
इस प्रकार की पुलिस कार्रवाई अब चर्चा का विषय बन गई है, खासकर श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों में। कुछ लोग इसे पुलिस का नाटकीय तरीका मानते हैं, जबकि कुछ इसे अपराधियों को सख्त संदेश देने का प्रभावी तरीका मानते हैं।












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