Success story : पानी पूरी का ठेला लगाने वाले के बेटे ने किया कमाल, पायलट बन उड़ाएगा विमान
मंदसौर जिले के मनासा गांव के ही धर्मशाला के सामने पानीपुरी का ठेला लगाने वाले देवेंद्र चौधरी के बेटे रविकांत का चयन भारतीय वायुसेना में पायलट के लिए हुआ है.

कहते हैं मंजिले उन्ही को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है, जहां इन्हीं पंक्तियों को साकार कर दिखाया है, नीमच के मनासा गांव में रहने वाले एक युवा ने, जहां गांव के ही धर्मशाला के सामने पानीपुरी का ठेला लगाने वाले देवेंद्र चौधरी के बेटे रविकांत का चयन भारतीय वायुसेना में पायलट के लिए हुआ है, जहां पढ़ाई के साथ-साथ पानी पुरी के व्यवसाय में अपने पिता का हाथ बंटाने वाले रविकांत की सफलता पर सभी को नाज है, रविकांत कि इस उपलब्धि से उनके गांव में भी जश्न का माहौल है, जहां सभी लोग रविकांत को शुभकामनाएं देते हुए, जश्न मनाते नजर आ रहे हैं।

कुछ ऐसा है पूरा मामला
दरअसल, मध्यप्रदेश के नीमच जिले में एक छोटा सा मनासा नामक गांव है, गांव की एक युवक ने एयरफोर्स में पायलट बनने का सपना देखा था, लेकिन इस युवक के घर के हालात ठीक नहीं थे, जहां युवक के पिता गांव की ही धर्मशाला के सामने पानी पूरी का ठेला लगाते थे, तो वहीं युवक भी समय-समय पर अपने पिता का साथ देने ठेले पर जाता था, लेकिन बावजूद इसके युवा ने अपना हौंसला टूटने नहीं दिया, और लगातार अपने सपने के लिए मेहनत की, जहां 4 साल की कड़ी मेहनत के बाद रविकांत नामक इस युवक की मेहनत साकार हुई, और आखिरकार रविकांत का चयन भारतीय वायु सेना में बतौर पायलट के लिए हो गया।

रविकांत की सफलता पर सभी को नाज
नीमच जिले के मनासा गांव में रहने वाले रविकांत की इस उपलब्धि से पूरा मनासा गांव गौरवान्वित महसूस कर रहा है, जहां सभी रविकांत और उनके परिजनों को शुभकामनाएं देते नजर आ रहे हैं। उधर, रविकांत की इस उपलब्धि के बाद ग्रामीणों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनका मुंह मीठा कराया। साथ ही आतिशबाजी कर रविकांत की सफलता का जश्न भी मनाया। रविकांत के पिता पानीपुरी का ठेला लगाते हैं। वहीं बेटे के द्वारा हासिल किया गया मुकाम उन युवाओं के लिए प्रेरणा साबित हो रहा है, जो रविकांत की तरह ही बड़ा सपना देख कर उसे हासिल करने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं।

रविकांत ने कही ये बात
रविकांत ने बताया कि, मुझे 4 साल का समय इस सफर को तय करने में लगा है, मम्मी पापा ने काफी टाइम दिया मुझे पढ़ाई के लिए, घर की परिस्थितियां जैसी भी रही, टाइम पढ़ाई के लिए पूरा मिला, जो भी सुविधाएं लगती है पढ़ाई में सब कुछ मिला। मेरे पापा की पानी पूरी की शॉप है, यह काफी पुराना बिजनेस है हमारा, इसमें बीच-बीच में हम भी काफी योगदान देते थे, जितना बन पाता था। पढ़ाई के साथ-साथ, फ्री टाइम में शॉप भी संभालते थे, और साथ ही साथ पढ़ाई भी करते थे।
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