MP News: ईओडब्ल्यू ने फोड़ा बोगस फर्मों के घोटाले का सबसे बड़ा पहाड़, उज्जैन में 2 अरब के फर्जीवाड़े का खुलासा

MP news: मध्य प्रदेश में फर्जीवाड़े से अपनी घर की तिजोरिया भरने वालों ने अब लाखों-करोड़ों को पीछे छोड़ अरबों के घोटाले की राह पकड़ ली हैं। हर किसी के दिल की धड़कन बढ़ा देने वाला दो अरब के बड़े घोटाले का खुलासा EOW ने किया हैं। इसके लिए बोगस फर्मों को बड़ा हथियार बनाया गया।

ईओडब्ल्यू ने एक-दो नहीं बल्कि दनादन थोक के भाव 39 FIR दर्ज की। ये केस फर्जी कंपनियों के खिलाफ दर्ज किए गए। जिसमें फर्म ऑनर समेत 79 लोगों को आरोपी बनाया गया। इतनी FIR दर्ज करने में ईओडब्यू को खूब पसीना बहाना पड़ा।

शुरुआती जांच में यह भी पता चला कि बोगस फर्मों की बदौलत सरकार के खजाने को दस करोड़ की चपत भी लगाईं गई। जिन कंपनियों के खिलाफ एक्शन लिया गया, उनमें नीमच की अग्रवाल सोया एक्सट्रेक्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी भी शामिल हैं।

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EOW इतिहास की सबसे बड़ी कार्रवाई
ईओडब्ल्यू के आला-अफसर इस कार्रवाई को मध्य प्रदेश में सबसे बड़ी कार्रवाई करार दे रहे हैं। शुरुआती तौर पर हुई जांच के बाद जो तथ्य सामने आए, उन्हें जानकार अफसरों के पैरों तले जमीन खिसक गई। कोई सपने में भी नहीं सोच सकता कि जनता और सरकार की आंखों में धूल झोंककर फर्जी धंधा किया जा रहा हो। आरोपियों की संख्या कई गुना बढ़ने की संभावना हैं।

बिना खरीद-बिक्री के करोड़ों का धंधा!
EOW उज्जैन को हाथ लगी बड़ी सफलता में सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी सीमा शर्मा के मुताबिक नीमच में अग्रवाल सोया एक्सट्रेक्ट प्राइवेट लिमिटेड धामनिया नाम से कंपनी है। इसके डायरेक्टर दीपक, गोपाल, शालिनी सिंघल और नवनीत गर्ग हैं। इन सबने 36 फर्जी फर्मों के साथ मिलकर सोयाबीन, सोयाबीन डीओसी, सोयाबिन तैल की फर्जी खरीदी बिक्री और ट्रांसपोटेशन मामले में 2 अरब का बिजनेस किया। इसके डॉक्यूमेंट दिखाकर शासन को लगभग 10 करोड़ का आर्थिक नुकसान पहुंचाया। 10 करोड़ का GST भी नहीं भरा, जबकि वास्तविक तौर पर न तो कोई बिजनेस हुआ ही नहीं न ही ट्रांसपोर्ट हुआ।

पिछले 5 साल से धड़ल्ले से चल रहा था धंधा
फर्जी कंपनी बनाकर तेल का व्यापार पिछले 5 सालों से चल रहा था। वर्ष 2017 से 2022 के बीच कुल 39 बोगस फर्म और उनके संचालक के साथ मिलकर कूटरचित इन्वाइस, बिल, बिल्टी तैयार किए गए। जिन्हें डायरेक्टर बताया उनके नाम भी रिकॉर्ड में नकली दर्शाए। उज्जैन ईओडब्ल्यू निरीक्षक शुक्ला ने ख़ास बात बताई कि कपिल ट्रेडिंग कंपनी के संचालक, जिसने इस मामले की शिकायत की थी, वह भी आरोपी निकला।

ब्लैक मनी को व्हाइट करने का खेल!
EOW की सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी सीमा शर्मा ने बताया कि इस मामले में धारा 420, 467, 468, 471, 120B के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। इसमें दीपक सिंघल नामक शख्स NDPS एक्ट में आरोपी रहकर जेल काट चुका है। संभवत: ब्लैक मनी को व्हाइट करने का ये पूरा खेल हो सकता है। फिलहाल इस बात की जांच जारी है कि ये पैसा कहां से आता था। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच का जब दायरा बढ़ेगा तो कई और बड़े खुलासे होंगे। फर्जी फर्म का रजिस्ट्रेशन और डाक्यूमेंट्स बनाने या बनवाने में जो सहयोगी रहे, उनकी भी शामत आएगी।

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