उज्जैन: सावन के पहले सोमवार पर परंपरागत मार्ग से निकलेगी महाकाल सवारी, डीजे प्रतिबंधित

उज्जैन, 15 जुलाई: प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में इन दिनों सावन माह का हर्षोल्लास देखने मिल रहा है। भगवान भोलेनाथ के सबसे प्रिय माह सावन की शुरूआत हो चुकी है, जहां धार्मिक नगर उज्जैन में सावन के पहले सोमवार को निकलने वाली बाबा महाकाल की तैयारियों का सिलसिला भी जारी है। इस बीच प्रशासन ने बड़ा निर्णय लेते हुए, सवारी में डीजे प्रतिबंधित किया है। साथ ही दो साल बाद एक बार फिर सवारी में रस्सा पार्टी को तैनात किया जाएगा। देखा जाए तो पुराना काल के लगभग 2 साल बाद बाबा महाकाल की सवारी एक बार फिर अपने परंपरागत मार्ग से निकलने जा रही है, जहां इस लेकर भक्तों में खासा उत्साह देखने मिल रहा है। वहीं बाबा महाकाल की सवारी में शामिल होने भक्त मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से धार्मिक नगरी उज्जैन पहुंचते हैं।

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    बैठक में हुए कई अलग-अलग निर्णय

    कलेक्टर आशीष सिंह ने सावन माह के प्रत्येक सोमवार को निकलने वाली बाबा महाकालेश्वर सवारी की व्यवस्थाओं को लेकर प्रबंध समिति के सदस्य, पुजारियों के प्रतिनिधियों और तमाम अधिकारियों के साथ त्रिवेणी संग्रहालय में बैठक की, बैठक में कलेक्टर आशीष सिंह ने अब तक के कार्यों की समीक्षा की, तो वहीं महाकाल सवारी में डीजे का प्रवेश प्रतिबंधित रखने का फैसला लिया.

    परंपरागत मार्ग से निकलेगी सवारी

    बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए, कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा कि, सावन में पहले ही दिन से श्रद्धालुओं की जो भीड़ देखने मिली है, उसमें व्यवस्थाओं के क्या कुछ सुधार की गुजाइंश है, उसको लेकर निर्णय लिए गए हैं। भजन मंडलियों से संबंधित ये निर्णय हुआ है, इस बात को रेंखाकित किया गया है की, कई सारे लोग डीजे और अपारंपरिक चीजों को लेकर आ जाते हैं, उसमें हम इस बार सख्ती करेंगे। साथ ही कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा कि, सवारी मार्ग पारंपरिक जो था वहीं रहेगा, उसकी सारी व्यवस्था हमारे द्वारा कर ली गई है।

    सवारी को लेकर भक्तों में उत्साह

    सावन और भादौ मास के प्रत्येक सोमवार को बाबा महाकाल नगर भ्रमण पर निकलते हैं, जहां वे अपनी प्रजा का हाल जानते हैं। चांदी की पालकी में सवार होकर जैसे ही बाबा महाकाल मंदिर परिसर से बाहर निकलते हैं, वैसे ही श्रद्धालुओं में अलग उत्साह देखने मिलता है। यही कारण है कि, बाबा महाकाल की सवारी के दर्शन करने श्रद्धालु दूर-दूर से धार्मिक नगरी उज्जैन पहुंचते हैं।

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