Shiva Chouhan की तैनाती वाली Kumar Post कितनी डेंजर? Siachen में पोस्टेड रहे फौजी ने बताई आपबीती
उदयपुर की कैप्टन शिवा चौहान (Shiva Chouhan) की तैनाती Siachen Glacier) में 15632 फीट ऊंचाई पर कुमार पोस्ट पर हुई है। इधर, सीकर के पूर्व फौजी दिगेंद्र सिंह ने बताया कि सियाचिन में तैनात फौजियों की जिंदगी कैसी होती है?

Indian Army Capt Shiva Chouhan Life at Siachen Glacier : चारों तरफ सन्नाटा...। जहां तक नजर जाए वहां तक सिर्फ बर्फ ही बर्फ...। खून जमा देने वाली ठंड...। न्यूनतम तापमान माइनस 30 डिग्री...। नश्तर चुभतीं सर्द हवाएं...। सीमा पार से पाक की नापाक हरकतें...और कंधों पर देश सुरक्षा की जिम्मेदारी।
मौसम की चुनौतियां भी ऐसी कि ऑक्सीजन की कमी के कारण कब सांसें उखड़ जाएं पता नहीं? बर्फ में कहां दफन हो जाएं कुछ नहीं कह सकते? इन तमाम मुश्किलों का सामने करने के लिए पहाड़ सा हौसला और तन पर खाकी वर्दी ही काफी है। कुछ ऐसी ही होती है सियाचिन ग्लेशियर में तैनात रहने वाले भारतीय सेना के जवानों की जिंदगी। इसके बारे में पूर्व फौजी दिगेंद्र कुमार उर्फ इंडियन आर्मी के बेस्ट कोबरा कमांडो ने बताया है। (वीडियो नीचे)

शिवा चौहान सियाचिन में कुमार पोस्ट पर तैनात
दुनिया में सबसे ऊंचा युद्ध क्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर भारत-पाकिस्तान सीमा पर नियंत्रण रेखा के पास स्थित है। यह World's Highest Battlefield एक बार फिर से सुर्खियों में है। वजह है कि भारतीय सेना की कैप्टन शिवा चौहान। राजस्थान के उदयपुर शहर की Shiva Chouhan को सियाचिन ग्लेशियर में 15 हजार 632 फीट की ऊंचाई पर तैनात किया गया है। भारतीय सेना के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी महिला सैन्य अफसर को सियाचिन ग्लेशियर की कुमार पोस्ट की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

महावीर चक्र विजेता दिगेंद्र कुमार का इंटरव्यू
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में महावीर चक्र विजेता नायक दिगेन्द्र कुमार बताते हैं कि साल 1988 में छह माह के लिए उनको सियाचिन ग्लेशियर में 22 हजार फीट की ऊंचाई पर तैनात किया गया था। किसी फौजी को सीधे सियाचिन ग्लेशियर में तैनात नहीं किया जाता है। पहले उसे कई दिन तक लेह कैम्प में रखा जाता है और यहां पर उसे क्लाइमेंट के परीक्षण से गुजरना पड़ता है। उसे रोजाना 15 से 20 दिन तक छोटी-छोटी पहाड़ियों पर भेजकर परखा जाता है। इस परीक्षण में 100 में से 80-90 फौजी ही सियाचिन ग्लेशियर में तैनात होने के काबिल निकलते हैं।

सियाचिन ग्लेशियर में सिर्फ दो घंटे ड्यूटी
दिगेंद्र कुमार कहते हैं कि अब नियमों में बदलाव हो गया तो पता नहीं, मगर 35 साल पहले हमारे टाइम में तो सियाचिन ग्लेशियर में भारत पाकिस्तान सीमा पर एक फौजी महज दो घंटे ही ड्यूटी कर पाता था। इससे ज्यादा घंटे तक की ड्यूटी के लिए उसे मौसम इजाजत नहीं देता। हर दो घंटे बाद फौजी को बंकर में आकर आराम की जरूरत पड़ती है। फिर उसकी जगह दूसरा फौजी ड्यूटी संभालता है। दो घंटे तक तो उसे सीमा पर बर्फ में मुस्तैदी से खड़ा रहना पड़ता है। पेट्रोलिंग भी।

सियाचिन ग्लेशियर में बर्फ जानलेवा कैसे?
साल 1988 में फरवरी से जुलाई तक सियाचिन ग्लेशियर में तैनात रहे दिगेंद्र कुमार उर्फ दिगेंद्र सिंह यादव कहते हैं कि वहां फौजियों का सामना दो तरह की बर्फ से होता है। एक पक्की और दूसरी कच्ची। पक्की बर्फ वो जो वर्षों से वहां जमी है। उसकी परत 20 से 30 फीट तक होती है। वह स्थायी होती है। कभी हटती नहीं। बस पिघलती रहती है।
दूसरी कच्ची बर्फ, जो सड़क जैसी जगहों पर मिलती है और उसे हटाया भी जा सकता है। पक्की बर्फ में कहीं अगर कोई सैनिक फंस जाए या दब जाए तो उसका बचना मुश्किल हो जाता है। सियाचिन ग्लेशियर में फौजियों की ज्यादा मौतें युद्ध की बजाय बर्फ या क्लाइमेट की चपेट में आने से होती है।
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सियाचिन ग्लेशियर में फौजियों के बंकर कैसे होते हैं?
सियाचिन ग्लेशियर में भारतीय सेना की काफी चौकियां हैं, जिन पर हजारों फौजी तैनात किए जाते हैं। ये फौजी पाकिस्तान की सीमा से आधा-एक किलोमीटर की दूरी पर बने बंकर में रहते हैं। सियाचिन ग्लेशियर में सीमा पर भारत पाक की पोस्ट एक दूसरे को नजर भी आती हैं। बर्फ से ढकीं चोटियों के बीच विशेष जगह पर बंकर बनाया जाता है, जिसके अंदर फौजी आराम से रह सकते हैं।
पहले तो फौजी अपने साथ केरोसिन तेल लेकर जाते थे। उसी से खाना पकाते और बंकर में रोशनी करते, मगर अब वहां बिजली की सुविधा उपलब्ध हो गई बताते हैं। फौजियों के सोने के लिए स्लीपिंग बैग होते हैं। आराम के वक्त फौजी उसमें घुसकर चेन बंदकर लेते हैं। विशेष रूप से तैयार ये स्लीपिंग बैग काफी महंगे होते हैं। सियाचिन ग्लेशियर पर तैनात फौजी हमारी तरह रजाई ओढ़कर नहीं सो सकते।

सियाचिन ग्लेशियर में फौजियों का खाना व नहाना
दिगेंद्र सिंह कहते हैं कि सियाचिन ग्लेशियर वाली पोस्ट पर तैनात रहने वाले फौजियों के लिए भोजन भी मैदानी इलाकों के फौजियों से अलग होता है। सियाचिन ग्लेशियर वाले फौजियों को पैक्ड फूड मिलता है, जिसे कम्पो राशन बोलते हैं। इसमें हलवा, चिकन, मटन व अंडे का पाउडर भी शामिल है। पक्के पकाए इस भोजन को गर्म में डालते ही यह खाने लायक बन जाता है। इतने ठंडे इलाके में तैनात फौजियों के नहाने के सवाल पर दिगेंद्र कहते हैं कि 'फौजी एक-दो महीने में एक बार स्नान कर पाता है। मैं और यूपी के जयसिंह तो जिस दिन कोई फौजी नहाता था उस दिन उससे पार्टी लिया करते थे।'

कौन हैं नायक दिगेंद्र कुमार?
नायक दिगेंद्र कुमार का जन्म 3 जुलाई 1969 को राजस्थान के सीकर जिले के नीमकाथाना उपखंड के गांव झालरा में शिवदान सिंह परसवाल व राजकौर के घर हुआ। दिगेंद्र सिंह भारतीय सेना की 2 राज राइफल्स में भर्ती हुए थे। दिगेंद्र को इंडियन आर्मी को बेस्ट कोबरा कमांडो के रूप में भी जाना जाता है।
कारगिल जंग में भारत को पहली जीत दिगेंद्र सिंह ने ही दिलाई थी। कमांडो दिगेंद्र सिंह के शरीर में कारगिल युद्ध के दौरान की पांच गोलियां अभी भी फंसी हुई हैं। कारगिल युद्ध में 13 जून 1999 को तोलोलिंग की पहाड़ी पर दिगेंद्र सिंह ने पाकिस्तान मेजर अनवर खान की गर्दन काटकर उसमें तिरंगा फहरा दिया था। कारगिल युद्ध में दिगेंद्र सिंह ने पाकिस्तान के 48 फौजी मारे थे।

कौन हैं कैप्टन शिवा चौहान?
भारतीय सेना की कैप्टन शिवा चौहान राजस्थान के उदयपुर शहर में सेक्टर 7 हिरणमगरी की रहने वाली हैं। वर्तमान में इनका परिवार जयपुर में रहता है। शिवा चौहान का जन्म 18 जुलाई 1997 को राजेंद्र सिंह चौहान व अंजलि चौहान के घर हुआ। इनके एक बड़ी बहन शुभम चौहान है। भाई नहीं है। उदयपुर में रेडियम नंबर प्लेट की दुकान चलाने वाले राजेंद्र सिंह चौहान की बीमारी के कारण 2008 में मौत हो गई थी। इसके बाद मां अंजलि ने सिलाई करके शिवा चौहान को पढ़ाया। शिवा व उसकी बहन भी बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया करती थीं।

कैप्टन शिवा चौहान की शिक्षा
वन इंडिया हिंदी को बहन शुभम चौहान ने बताया कि शिवा चौहान की पढ़ाई उदयपुर में सेंट एंथोनी सीनियर सेकंडरी स्कूल सेक्टर 4 ब्रांच से की। टेक्नो इंडिया एनजेआर प्रौद्योगिकी संस्थान उदयपुर से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक भर्ती परीक्षा में शिवा ने भाग्य आजमाया। तीनों में ही शिवा का चयन हो गया था, मगर इन्होंने भारतीय सेना को चुना।

दो जनवरी 2023 से शिवा चौहान कुमार पोस्ट पर तैनात
भारतीय सेना की 14वीं फायर एंड फ्यूरी कोर में कैप्टन शिवा चौहान को 18 जुलाई 2021 में लेह में पहली पोस्टिंग मिली। अब 2 जनवरी 2023 से शिवा चौहान को सियाचिन ग्लेशियर पर स्थित भारतीय सेना की कुमार पोस्ट पर तैनात किया गया है। कुमार पोस्ट 15 हजार 632 फीट की ऊंचाई पर है। यहां पर सक्रिय तौर पर पोस्टिंग पाने वाली शिवा चौहान पहली भारतीय सैन्य अफसर बन गई हैं।
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