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Kargil War : 'मैंने दिलाई थी भारत को पहली जीत, सीने में 5 गोलियां लगने के बाद ऐसे मारे पाक के 48 फौजी'

जयपुर। 26 जुलाई 2020 कारगिल विजय दिवस को 21 साल पूरे हो रहे हैं। वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने पाक के नापाक मंसूबों का मुंहतोड़ जवाब दिया था। मई से जुलाई 1999 के बीच करीब दो माह तक ऑपरेशन विजय के नाम से चले कारगिल युद्ध में पहली जीत फौजी दिगेन्द्र सिंह ने दिलवाई थी।

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इंडियन आर्मी के सबसे खतरनाक कोबरा कमांडो में से एक दिगेन्द्र कुमार सिंह ने कारगिल में अदम्य साहस और वीरता का ऐसा उदाहरण पेश किया, जिस पर हिन्दुस्तान को आज भी गर्व है और आने वाली कई पीढ़ियां इनकी बहादुरी से प्रेरित होंगी।

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5 गोलियां खाने वाले दिगेन्द्र कुमार ने पाकिस्तान के 48 फौजी मारे और पाक मेजर अनवर खान का सिर काटकर तिरंगा फहरा दिया। वन इंडिया की 'कारगिल में राजस्थान के फौजी' सीरीज में ​जानिए पूरी कहानी खुद महावीर चक्र विजेता दिगेन्द्र कुमार की जुबानी।

पाक सैनिकों ने घुसपैठ कर तोलोलिंग पर जमाया कब्जा

पाक सैनिकों ने घुसपैठ कर तोलोलिंग पर जमाया कब्जा

राजस्थान के सीकर जिले के नीमकाथाना उपखण्ड के गांव दयाल का नांगल निवासी दिगेन्द्र कुमार सिंह बताते हैं कि जम्मू कश्मीर के द्रास सेक्टर में का​रगिल युद्ध स्मारक के ठीक सामने स्थित तोलोलिंग की पहाड़ी पर मई 1999 को पाक के हजारों सैनिकों ने घुसपैठ कर कब्जा जमा लिया था।

तोलोगिंग को मुक्त करवाने में भारतीय सेना की 3 यूनिट फेल हो गई थी। एक यूनिट के 18, दूसरी के 22 और तीसरी यूनिट के 28 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। तो​लोलिंग पर विजय पाना भारतीय सेना के लिए चुनौती बन गया था। तब भारतीय सेना की सबसे बेहतरीन बटालियन को तोलो​लिंग को मुक्त करवाने की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला लिया गया और 300 किलोमीटर दूर कुपवाड़ा से हमारी 2 राज रिफ बटालियन को द्रास बुलाया गया।

एक गोली से 144 उग्रवादियों को करवाया था सरेंडर

एक गोली से 144 उग्रवादियों को करवाया था सरेंडर

2 राज रिफ बटालियन द्रास पहुंचने के बाद आर्मी चीफ ने कमांडर कर्नल रविन्द्र नाथ से सवाल किया कि क्या उसकी बटालियन में कोई ऐसा फौजी है, जो तोलोलिंग की पहाड़ी पर तिरंगा फहरा सके। यह सुनकर कोई फौजी नहीं बोला। मैं फौजियों की पंक्ति सबसे पीछे बैठे था। हाथ खड़ा किया और बोला-जय हिंद सर, बेस्ट कमांडो दिगेन्द्र कुमार उर्फ कोबरा। सेना मेडल सर...। चीफ का जवाब था कि तुम वो ही कमांडो हो ना जो हजरतवन में एक गोली से 144 उग्रवादियों को सरेंडर करवाया था। बहुत सुना है तुम्हारे बारे में।

10 साथियों में सिर्फ दिगेन्द्र कुमार बचे जिंदा

10 साथियों में सिर्फ दिगेन्द्र कुमार बचे जिंदा

एक जून 2019 को पूरी चार्ली कम्पनी ने तोलोलिंग पहाड़ी पर चढ़ाई के लिए आसान की बजाय दुर्गम रास्ता चुना, क्योंकि आसान रास्ते से जाने पर चोटी पर बैठे पाक घुसपैठियों उन्हें मार गिरा रहे थे। हम रस्से बांधकर 14 घंटे की मशक्कत के बाद तोलोलिंग की पहाड़ी पर चढ़े।

9 कमांडो शहीद हो गए

9 कमांडो शहीद हो गए

हम 10 कमांडो मेजर विवेक गुप्ता, सुबेदार भंवरलाल भाकर नागौर, सुमेर सिंह राठौड़ खारा दूधवा चूरू, शेख चिल्ली मेरठ, हवलदार सुल्तान सिंह भिंड मुरैना, नायक सुरेंद्र आदि को कवरिंग फायरिंग करनी थी, मगर 12 जून को तोलोलिंग की पहाड़ी पर पहुंचने के बाद पाक सैनिकों से आमना-सामना हो गया तो पीछे नहीं हटे। मुकाबला किया। तब 9 कमांडो शहीद हो गए थे। मैंने उनका पहला टैंकर उड़ाया और फिर 11 बंकर धवस्त किए, जिसमें पाक के 48 फौजी मारे गए। 13 जून को पाकिस्तान के मेजर अनवर खान का सिर काटकर दिगेन्द्र कुमार ने उसी की मूंडी पर तोलोलिंग की पहाड़ी पर तिरंगा फहरा दिया। कारगिल युद्ध में भारत की यह पहली जीत थी। इसके बाद टाइगर हिल समेत अन्य चोटियों को मुक्त करवाया। 26 जुलाई को युद्ध समाप्त हुआ।

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